2जी घोटाला : सीबीआई की निगाह कई डीटीएच कंपनियों पर, मांगी जानकारी

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2जी घोटाले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए सीबीआई ने अब अपनी छानबीन का रुख डाइरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) कंपनियों को स्पेक्ट्रम आबंटन की ओर कर दिया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में बैंडविथ की मंजूरी के विस्तृत जानकारी मांगी है। सीबीआई ने इन कंपनियों से लाइसेंस समेत कई अन्‍य जानकारियां भी मांगी हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि 2जी घोटाले की जांच के दायरे में आने वाली कुछ टेलीकॉम कंपनियां डीटीएच सेवा भी मुहैया कराती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए डीटीएच प्रसारकों के खिलाफ छानबीन का फैसला किया गया है। सीबीआई ने स्पेक्ट्रम के लिए किए गए आवेदन की मूल फाइल और डीटीएच सेवा के लिए वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस समेत अन्य सारी जानकारियां मांगी है। जिन कंपनियों के बारे में जानकारी मांगी गई है, उनमें डिश टीवी इंडिया लिमिटेड, रिलायंस बिग टीवी प्राइवेट लिमिटेड, भारती मल्टी-मीडिया लिमिटेड, भारती बिजनेस चैनल प्राइवेट लिमिटेड, दूरदर्शन, सन डाइरेक्ट टीवी प्राइवेट लिमिटेड और टाटा स्काई लिमिटेड शामिल हैं।

सीबीआई सूत्रों ने रविवार को बताया कि इन कंपनियों की फाइलों का निरीक्षण किया जा रहा है, क्योंकि इनमें से कुछ कंपनियों के खिलाफ टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में छानबीन चल रही है। इस मामले में जांच एजेंसी एयरसेल-मैक्सिस सौदे में पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही सीबीआई इस मामले में दक्षिण भारतीय एक टीवी चैनल की भूमिका का पता लगाने की भी कोशिश कर रही है।

सीबीआई ने टूजी मामले में कनिमोझी को आरोपित किया है। रिलायंस टेलीकम्यूनिकेशन पर आपराधिक साजिश का आरोप है। भारती और टाटा डीटीएच तथा टेलीकॉम सेवा प्रदान करती हैं, लेकिन उन्हें टूजी मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है, जबकि डिश टीवी और दूरदर्शन टेलीकॉम व्यवसाय में नहीं हैं। साभार : एजेंसी


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