भास्‍कर ने छापी झूठी और गलत खबर

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यशवंत जी नमस्कार, मैं आप को एक सूचना देना चाहता हूँ जो मेरी आँखों देखी है, इस घटना स्थल पर मैं मौजूद भी था, जो मेरी सूचना को पुख्ता करती है. भास्कार के बेब पर खबर छपी है जिसका शीर्षक है  पत्रकारिता विश्विद्यालय में छात्रों ने जमकर की तोड़-फोड़, जो सरासर गलत खबर है. ऐसा लगता है कि भास्कार वाले बिकी हुई खबर चलाने का ठेका ले लिए हैं, मगर पत्रिका और अन्य टीवी चैनलों ने भास्कर के विपरीत सही खबर चलाई है, जो मेरी बात को और भी पुख्ता करेंगे.

अगर सर भास्कर की बात को सच माना जाए तो फिर दृश्य एवं श्रव्य विभाग के 5 छात्र ,जनसंचार विभाग के 1 छात्र और पत्रकारिता विभाग के 5 छात्र का हिंदुस्तान के कैम्पस में कैसे सोमवार को चयन हुआ? जबकि पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का कहना था कि विभाग में लेक्चर चल रहा था, जो कि लेक्चर नहीं अन्य विभागों के विद्यार्थियों के अनुसार डेमो चल रहा था.

आप ही बताइये कि क्या डेमो की क्लास चल रही थी इसलिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों को छोड़ कर समस्त विभाग के छात्रों ने विरोध किया? फिर यह हिंदुस्तान का कैम्पस कैसे हो गया? और अन्य विभाग के छात्रों का सलेक्शन कैसे हुआ? भास्कर ने पूरी खबर को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया है और सच्चाई पर पर्दा डाला है, जिससे लगता है कि भोपाल भास्कर बिक गया है, और इसी तरह ये अपनी विश्वसनीयता पर भी ठप्पा लगा रहा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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