आलोक तोमर के अंतिम दिनों के दो वीडियो

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दो वीडियो हैं. एक डेढ़ मिनट के करीब और दूसरा आधे मिनट से कुछ कम. बत्रा अस्पताल में कीमियोथिरेपी कराने के दौरान आलोक तोमर जी से मिलने मैं कुछ लोगों के साथ गया था. एक बार अनुरंजन झा के साथ गया था दूसरी बार आचार्य राम गोपाल शुक्ला के साथ. फोटो उतारता तो आलोक तोमर हड़का लेते, .... फोटो मत लो, छाप मत देना, मेरे प्रशंसक दुखी हो जाएंगे मेरा चेहरा-मोहरा-सिर देखकर.

आलोक जी के कहने का आशय ये था कि बीमारी ने जो हालत बना दी है, उसे तो वे खुद झेल जाएंगे और हंसते हंसते झेल रहे हैं लेकिन उनके चाहने वालों को ज्यादा दुख पहुंचेगा. बावजूद उनके मना करने के, मैं हर बार तस्वीरें लेता, वीडियो बनाने का साहस एक बार कर सका. और दूसरी बार तब वीडियो बनाया जब वे भड़ास आफिस आए थे. उनके खराब स्वास्थ्य के कारण जितने लोगों ने कमेंट कर उन्हें जल्द ठीक होने और कुछ भी न होने और न घबराने जैसी बातें, आश्वस्तियां लिखी-कहीं थीं, उन सबका शुक्रिया अदा करने. उन्होंने बोल-बोल कर भड़ास4मीडिया के कंटेंट एडिटर अनिल सिंह को लिखवाया.

इस वीडियो में आप उन्हें लिखवाते-बोलते भी सुनेंगे. एक फोन आता है जिसमें वे बताते हैं कि वे इस वक्त भड़ास के आफिस में हैं. आलोक जी बीमारी के बावजूद अपने पैरों पर सीढ़ियां चढ़े उतरे और कार पर बैठ रवाना हुए. सच में, हम लोग मान बैठे थे कि इस आदमी के आसपास कभी गलती से भी यमराज फटक गया तो वह यमराज बुरी मौत मारा जाएगा. पर जाने क्या हुआ कि आलोक जी हम सबको छोड़कर चले गए. अब तो बस उनकी बातें, लेख, संस्मरण ही हमारे साथ हैं. उनके दिखाए रास्ते और उनका जीवन मिशनरी पत्रकारों व सरोकार वाली पत्रकारिता के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे और इस रूप में आलोक तोमर हमारे बीच हमेशा जिंदा रहेंगे. आलोक जी के अंतिम दिनों के दोनों वीडियो को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें...

भड़ास आफिस में आलोक तोमर जी

बत्रा अस्पताल में आलोक तोमर जी

आलोक तोमर जी की मृत्यु और उनसे जुड़े संस्मरण, आलोक जी के लिखे लेख आदि पढ़ने के लिए नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के ठीक बाद में आ रहे शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक करते जाएं.


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