शॉर्ट फिल्म 'मोमबत्ती' - एक बहस शहादत पर

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: समानांतर सिनेमा की वापसी के संकेत : युवा निर्देशक पुनीत प्रकाश की शॉर्ट फिल्म 'मोमबत्ती' उम्मीद की एक ऐसी रोशनी है जो दिखाती है कि भारतीय फिल्म जगत में 'अर्थ', 'अर्धसत्य', 'मिर्च मसाला' और 'मंडी' जैसी समांतर फिल्मों का दौर समाप्त नहीं हुआ है। जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि समांतर हिन्दी सिनेमा का युग समाप्त हो चुका है, उन्हें 'मोमबत्ती' एक बार देखने के बाद अपने इस दावे के बारे में गंभीरता से सोचना पड़ सकता है।

यह छोटी सी फिल्म देश के समांतर सिनेमा के युग की पुन: वापसी का एक पैगाम है।  फिल्म की कहानी नक्सली हमले में मारे गये बिहार के सुदूर गांव के एक गुमनाम शहीद पुलिसकर्मी के १० साल के बेटे 'पिन्टू' के  इर्द-गिर्द घूमती है। वह अपने पिता को एक हीरो की नजर से देखता है। पिता की शहादत से उद्विग्न मासूम पिन्टू मुंबई के आतंकी हमले के शहीदों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों को टेलीविजन पर देखकर यह सोचने को मजबूर हो जाता है कि आखिर उसके पिता भी तो नक्सली हमले में शहीद हुए हैं, फिर उनकी इतनी अनदेखी क्यों की जा रही है। उदास 'पिन्टू' अपने स्कूल जाता है और माट साहब से पूछता है कि शहीद क्या होता है? माट साहब का जवाब 'पिन्टू' के बाल मन को और ज्यादा झकझोर कर रख देता है।

इसके बाद 'पिन्टू' अपने पिता की स्मृति में जो कुछ करता है, वही इस फिल्म की आत्मा है। 'पिन्टू' अपने पिता को श्रद्धांजलि देने के लिये क्या करता है? क्या वह अपने पिता की शहादत के प्रति समाज के अज्ञान से उबर पाता है? क्या वह इसके लिये संघर्ष करता है या फिर कुछ ऐसा करता है, जिसकी लोगों को एक १० साल के बच्चे से उम्मीद नहीं थी? यह कहानी 'पिन्टू' की मासूमियत, दृढ़ प्रतिज्ञा, साहस और गरीब शहीद पिता को सम्मान देने की ललक सीधे दर्शकों के मर्म को छूती है। फिल्म देखने के बाद महानगरों में आये दिन शहीदों की स्मृति में आयोजित होने वाली शोकसभाओं का खोखलापन भी पूरी तरह से बेपर्दा हो जाता है। साथ ही यह भी पता चलता है कि देश में ऐसे हजारों गुमनाम शहीद होते हैं जिनकी सुध लेने की चिंता न तो हमारे समाज को है और न ही सबके साथ बराबरी का व्यवहार करने का दावा करने वाली हमारी सरकार को है।

बाल कलाकार अविनाश नायर ने 'पिन्टू' की भूमिका बखूबी निभायी है। अपने अभिनय से अविनाश ने यह साबित कर दिया है कि इतनी कम उम्र में कहानी और 'पिन्टू' के चरित्र को लेकर उसकी समझ काफी परिपक्व है। अविनाश का दमदार अभिनय सभी दर्शकों के अंदर एक नयी ऊर्जा का संचार करता है।

'पिन्टू' की मां की भूमिका में  'पीपली लाइव' में  नत्था की पत्नी के रूप में अपने अभिनय की छाप छोड़ चुकी शालिनी वत्स और माट साहब के रूप में चेतन पंडित का अभिनय आलोचना से परे है। शालिनी वत्स एक मंजी हुई थिएटर कलाकार हैं और उन्होंने लंबे समय तक जाने माने नाटककार हबीब तनवीर के साथ काम किया है। चेतन पंडित एनएसडी के छात्र रह चुके हैं और 'राजनीति', 'अपहरण', 'वेडनेस डे' व 'गंगाजल' जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय की छाप छोड़ चुके हैं। नामचीन फोटोग्राफर मुजाहिद रज़ा इस फिल्म के फोटोग्राफी निर्देशक हैं। 'थ्री इडियट्स' फेम और आइफा अवाड्र्स विजेता अतुल रनिंगा ने इस फिल्म का संगीत तैयार किया है।

उत्तर प्रदेश में गाजीपुर के रहने वाले फिल्म  के युवा निर्माता-निर्देशक पुनीत  प्रकाश दिल्ली विश्वविद्यालय के  ग्रेजुएट रहे हैं और उन्होंने  न्यूयार्क फिल्म एकेडमी, लॉस एंजेलिस से फिल्म निर्माण-निदेशन का अध्ययन किया है। यहां एक साल रहकर पुनीत प्रकाश ने फिल्म के महारथियों से निर्माण और निर्देशन के व्यावहारिक गुर सीखे। उन्होंने अबतक कुल सात लघु फिल्मों और एक वृत्तचित्र का निर्माण किया है, जिनमें से कई फिल्में हालीवुड के यूनिवर्सल स्टूडियो और लास एंजेलिस में फिल्माई गई हैं। इसके अलावा अपने शुरुआती दौर में उन्होंने इंस्पायर्ड मीडिया के साथ एक दिग्गज निर्माण कंपनी के लिये भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी और पेस बॉलर आरपी सिंह को लेकर टेलीविजन विज्ञापन की परिकल्पना, निर्माण और निर्देशन में भी अपनी छाप छोड़ी है। इससे पहले उन्होंने बड़े बजट वाली और कई सितारों के साथ बनी फिल्म 'कैश' के निर्माण में बालीवुड के स्टाइलिश निर्देशक अनुभव सिन्हा के सहायक के रूप में काम किया है। कैश की शूटिंग साऊथ अफ्रीका के कैपटाउन में हुई थी। बाद में पुनीत ने अनुभव के साथ उनकी दो अन्य फिल्मों में प्रथम सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया है। उन्होंने कई टेलीविजन विज्ञापनों में ऐड गुरु गजराज राव के साथ कोड रेड फिल्म कंपनी में बतौर फस्र्ट एडी के रूप काम किया है। पुनीत ने अनुपम सिन्हा द्वारा निर्देशित लता मंगेशकर के म्यूजिक अलबम के निर्माण में फस्र्ट ऐडी के रूप में भी योगदान दिया है। इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान में रह रहे मुहाजिरों की दुर्दशा पर आधारित पांच  कडिय़ों के लघु धारावाहिक 'यू-टर्न' और 'कन्यादान' में बतौर कार्यकारी निर्माता काम किया है। उन्होंने आकाशवाणी के लिये भी कई डाक्यूमेंट्रियों और कार्यक्रमों का निर्माण किया है। जानेमाने लेखक शैवाल की लिखी रेडियो श्रृंखला 'मुल्ला नसीरुद्दीन जिन्दा है' की २६ कडिय़ों का निर्देशन भी पुनीत ने किया है। अभी पुनीत मुंबई में रहते हैं।

'मोमबत्ती' के निर्माण का विचार पुनीत के मन में तब आया जब उन्होंने मुंबई के आतंकी हमलों के शहीदों की स्मृति में महानगरों में मोमबत्तियां जलाकर लोगों को टी.वी. कैमरों के सामने शोक सभाएं करते देखा। फिल्म की कहानी पूरी तरह कसी हुई है और कलाकारों ने गजब का अभिनय किया है।

शहादत कोई दुर्घटना नहीं है कि प्लेनक्रेश में मरने वाले को १ करोड़, टे्रन  एक्सीडेंड में मरने वाले को ५ लाख  और बस दुर्घटना में मरने वाले को ५ हजार रुपये मिलते हैं।

मोमबत्ती 'शहादत' को पुनर्परिभाषित करने की एक सार्थक कोशिश है।


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Comments (19)Add Comment
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written by ynmishra, April 25, 2014
puneet aur mombatti dono ko meri sahardik subhkamnae. ummeed ka deepak hamesa jalte rahna chahiye.
ynmishra editor
uttar pradesh patrika
[ news web portal ]
call me 09453272166/09452184482/09935522275
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written by ynmishra, April 25, 2014
puneet ji
' MOMBATTI ' is veary fentastic short film
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written by madhumita, May 11, 2011
Badhaayee Bhadaas ko !.Mombatti cannes filmfestival me dikhaayi jaa rahi hai..Puneet Prakash ki short film ke baare me pehli baar apke news portal per hi humne dekha tha.great moment for A young film maker from eastern U.P..proud of India and Puneet.
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written by sanjay rai, April 07, 2011
puneet prakash ki ye koshish parallel hindi cinema ke liye meel ka patthar sabit ho yahi kamna hai.
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written by sanjay rai, April 07, 2011
puneet prakash ka yeh prayas parellel hindi cinema me meel ka patthar sabit hoga. keep it up!
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written by ashutosh srivastava, April 07, 2011
In feature films the director is God; in documentary films God is the director..... i m really proud to be part of this film....best of luck for ur future my dear friend....
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written by Bhavna gupta,Ghaziabad, April 07, 2011
Mombatti oon lakho shahid-parivaro ke dil ki tees aur jeevan ki unkahi peeda hai jinke tyaag ko rojmarra ki aayi gayi baat samajh ke samaaj aur satta ke hamaare vidhaata puri besharmee se nazar andaaj kar dete hain.Mombatti ko short nahi feature film honi chahiye...shukriya Puneet Prakash and Mombatti team.
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written by Bipin, April 04, 2011
Outstanding work by this young director Puneet.....
At your age while most of the guys infatuated, fascinated by chokletty stories.. touching upon such a wonderful, very sensitive and appealing theme attracts all the gratitudes.............
I am forced to think on this never touched subject after watching the film...
do well...........

Bipin
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written by Madhumita, April 04, 2011
Read and heard much about this experimental short film Mombatti. This web portal must upload the short film Mombatti so that we can view this movie in Jharkhand.

Madhumita from Bokaro
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written by Noor Afshan, April 04, 2011
I had a privilege to watch Mombatti. I salute young boy Pintu (Avinash Nair) for his breath taking performance.Shalini Vatsa & Chetan Pandit are asusual outstanding. you cant hold on tears while watching this movie...Thanx Mr. Director
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written by desi minoru, April 04, 2011
hmm... gr8 piece of wrk, such cinema needs to be encouraged even mre in our country... nw lets see wat our audience response is to dis art all from my syd dis genre of film is definitely sumthn dat i wud love watching .. good wrk and all da very best
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written by Manish verma, April 04, 2011
First fall warm congrats to all the people who have shown the marvalous work by making this film.great thing abt this film is that small kid who teach us that never think helplesss,hopeless dat we r unable to do this n dat thing have self confidence is the best way u can uplift ur work n ur life.
So cheers for MOMBATTI..........
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written by Nitin Gupta, April 04, 2011
The HOPE, The STRUGGLE and The HARD WORK towards a goal/ success is part of the rewards. Achieving goal itself is not the whole reward.....Gud luck
Aur chand shabd merey dil sey....
Har kamyabi pe apka nam hoga,
Apke har kadam pe duniya ka salam hoga,
Mushkilo ka samna himmat se karna,
Dua hai ek din waqt bhi apka gulam hoga...
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written by Nitin Gupta, April 04, 2011
The HOPE, The STRUGGLE and The HARD WORK towards a goal ,success is part of the rewards. Achieving goal itself is not the whole reward......May Ur future always shine...Good Luck. .Aur chand shabd merey dil sey..
Har kamyabi pe apka nam hoga,
Apke har kadam pe duniya ka salam hoga,
Mushkilo ka saamna himmat se karna,
Dua hai ek din waqt bhi apka gulam hoga.
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written by Chandan Anand, April 04, 2011
लेखक संजय साहब ने एक मेरे प्रिय मित्र पुनीत के बारे में एक ज़रूरी बात छोड़ दी वोह यह की दिल्ली विश्वविद्यालय में अपनी पढाई के दौरान पुनीत का दिल रंगमंच से जुड़ गया और वोह दिल्ली ही क्या भारत के सुप्रसिध्ह रंगकर्मी श्री एन. के. शर्मा उर्फ़ पंडित जी के थेटर ग्रुप 'एक्ट वन' के साथ जुड़ गए जहाँ से उनका सम्बन्ध आज भी है. यह बात मैं इस लिए कर रहा हूँ क्यूँ की एक्ट वन की परम्परा रही है की उन्होंने ने हमारे समाज और फिल्म इंडस्ट्री को कई प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं जैसे की मनोज वाजपेयी, विशाल भरद्वाज, पीयूष मिश्र, स्वानंद किरकिरे, इम्तिआज़ अली, दीपक दोबरिआल, गजराज राव, अनुराग कश्यप आदि... बाकी जहाँ तक इनकी short फिल्म का सवाल है, मैंने फिल्म देखि है और मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूँ की पुनीत ने बहुत ऐसा मार्मिक विषय चुना है जो की एक १० वर्षीय बालक की नज़रों से समाज को आइना दिखाती है. मेरी शुभकामनाएं पुनीत और मोमबत्ती के साथ हैं.
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written by minni, April 04, 2011
Great work..
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written by Mohit, April 04, 2011
Beautiful. i think we need to have good filmakers like this chap puneet, brilliant attempt, looking forward to see more films from Mr. Puneet... congrats.. keep it up
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written by minni, April 04, 2011
hey its gud..gud work..
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written by Chandan Anand, April 04, 2011
लेखक संजय साहब ने एक मेरे प्रिय मित्र पुनीत के बारे में एक ज़रूरी बात छोड़ दी वोह यह की दिल्ली विश्वविद्यालय में अपनी पढाई के दौरान पुनीत का दिल रंगमंच से जुड़ गया और वोह दिल्ली ही क्या भारत के सुप्रसिध्ह रंगकर्मी श्री एन. के. शर्मा उर्फ़ पंडित जी के थेटर ग्रुप 'एक्ट वन' के साथ जुड़ गए जहाँ से उनका सम्बन्ध आज भी है. यह बात मैं इस लिए कर रहा हूँ क्यूँ की एक्ट वन की परम्परा रही है की उन्होंने ने हमारे समाज और फिल्म इंडस्ट्री को कई प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं जैसे की मनोज वाजपेयी, विशाल भरद्वाज, पीयूष मिश्र, स्वानंद किरकिरे, इम्तिआज़ अली, दीपक दोबरिआल, गजराज राव, अनुराग कश्यप आदि... बाकी जहाँ तक इनकी short फिल्म का सवाल है, मैंने फिल्म देखि है और मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूँ की पुनीत ने बहुत ऐसा मार्मिक विषय चुना है जो की एक १० वर्षीय बालक की नज़रों से समाज को आइना दिखाती है. मेरी शुभकामनाएं पुनीत और मोमबत्ती के साथ हैं.

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