फेसबुक पर दिलीप मंडल पर बरसे अजीत अंजुम

E-mail Print PDF

दिलीप मंडल आपको अक्सर 'दलित दलित' करते मिल जाएंगे, यहां वहां जहां तहां. फेसबुक पर भी. हर चीज में 'दलित एंगल' तलाशेंगे. हर चीज पर 'शक' करेंगे. और ये करना कतई गलत काम भी नहीं है. शक करने का एक पूरा दर्शन है जो कहता है कि हर चीज पर शक करो. इस लोकतंत्र में हर किसी को कोई दर्शन मानने-जानने की छूट है. दिलीप जी अगर हर चीज पर शक करते हैं तो उससे एक अच्छी चीज ये हो रही है कि कम से कम कोई आंख मूंद कर भरोसा तो नहीं करेगा और आंख मूंद कर हम सभी ने जब जब जिस पर भरोसा किया, वो दिल तोड़ गया.

बातों, वादों, विश्वासों आदि से छले गए हम अगर हर चीज पर शक कर रहे हैं तो कोई गलत बात नहीं. फिर भी, मुझ समेत कई लोग ऐसे हैं जो दिलीप मंडल जी के शकवाद से आतंकित रहते हैं और उन्हें अक्सर विघ्नसंतोषी करार देते हैं. वजह ये कि माहौल और मौका चाहे जैसा भी हो, दिलीप मंडल हमेशा राग दलित बजाते रहते हैं. इससे मुझ समेत कई लोगों को कभी-कभार एलर्जी हो जाया करती है और कुछ अपनी एलर्जी को शब्दों के जरिए स्पष्ट भी कर देते हैं.

ताजा मामला अन्ना हजारे के अनशन का है जिस पर दिलीप मंडल ने सवालिया निशान लगाते हुए दो लाइनें क्या लिख दीं, अजीत अंजुम जी बिफर पड़े. अपना गुस्सा, प्यार, समर्थन और पक्ष खुलकर स्पष्ट करते रहने वाले अजीत अंजुम का ये अंदाज ही उन्हें अलग स्थान देता है. लीजिए दिलीप मंडल का स्टेटस और अजीत अंजुम के कमेंट्स पढ़िए... -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


Dilip Mandal : राडिया कांड में लिप्त मीडिया संगठन अचानक अण्णा हजारे के अभियान के समर्थन में खड़े हो गए। और आप कहते हैं कि इसे स्वाभाविक माना जाए। आपके भोलेपन और सरल हृदय का सम्मान करता हूं। आपकी सदिच्छाएं संदेह से परे हैं।

Ajit Anjum : मीडिया कवर नहीं करता तो यही दिलीप जी दस-बीस बार स्टेटस अपडेट करते. कवर कर रहा है तो भी कर रहे हैं. वैसे अब तक दिलीप जी ये भी हिसाब लगा ही चुके होंगे कि अन्ना की इस मुहिम में किस जाति के कितने लोग हैं और शायद ये आंकड़े दिलीप जी संतुष्ट करने लायक नहीं होंगे. वैसे दिलीप जी, सही कह रहे हैं कि मीडिया का ये रवैया स्वाभाविक नहीं है. देश के 122 चैनलों के मुखिया कल देर रात इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जमा हुए थे. फिर वहां 500 रिपोर्टर्स की मीटिंग हुई. सुबह इतने ही प्रोडयूसर भी एक पार्क में जमा हुए. फिर सबने मिल कर तय किया कि अन्ना को कैसे और क्यों कवर करना है. हैरत है कि आपको इन मीटिंग्स में हुए फैसलों की जानकारी मिल गई... चैनलों की मीटिंग के बाद आधी रात को देश के सभी अखबारों के संपादकों -संवाददाताओं की मीटिंग में यही तय किया गया है कि अन्ना को ठीक से कवर करना है, चाहे दिलीप मंडल कुछ भी कहें.... वैसे भी नहीं कवर करेंगे तो कहां चुप रहने वाले हैं.... संदेह का टार्च लेकर दिलीप जी वैसे ही घूमते रहते हैं. कोई कुछ करता दिखा नहीं कि उस पर रोशनी मार दी.... मुझे लगता है कि दो दिनों में दिलीप जी ये भी पता करने में कामयाब हो ही जाएंगे कि रैली में जमा हुई भीड़ में किस-किस जाति के लोग थे... क्यों थे... कितने थे... कब तक थे... और कब तक रहने वाले हैं..... वैसे आपकी जानकारी के लिए शरद यादव भी वहां थे और लंबी फेंकने के चक्कर में थे लेकिन जनता ने हूट कर दिया तो चलते बने.... कह गए कि नीतीश से कह कर बिहार में जन लोकपाल विधेयक लागू करवाएंगे... जैसे नीतीश उन्हीं से पूछकर बिहार में सरकार चलाते हों....

Ajit Anjum : दिलीप जी, आज के कई अखबारों ने अन्ना के अनशन को खूब स्पेस दिया है और जबरदस्त कवरेज है. टीओआई, मेल टुडे, एचटी, जागरण, हिनदुस्तान, भास्कर में तो बैनर है, बाकी अखबारों ने भी खूब छापा है... तो जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था कि मीडिया के सारे... संपादकों-संवादादाताओं और डेस्क वालों की एक बैठक अनशन से पहले देर रात तक चली थी और एक साजिश के तहत अन्ना को इतना कवरेज देने का फैसला किया गया था... कल कई चैनलों पर लंबी-चौड़ी डिबेट भी हुई थी... वो भी उसी साजिश का हिस्सा थी... आपका संदेह सही है... मुझे तो इसमें आईएसआई और सीआईए की भी साजिश नजर आती है... बैकग्राउंड में तो जातिवादी ताकतें हैं ही... अब देखिए आपके दिव्य ज्ञान का इस्तेमाल ये मीडियावाले कर ही नहीं रहे हैं.... वैसे फिर एक मासूम सा सवाल है आपसे दिलीप - अगर मीडिया अन्ना को इतना कवर नहीं करता तो आप क्या लिखते.... लिखते कि देखो बिका हुआ मीडिया कैसे.... न न मैं आपकी सोच और चिंतन तक कैसे पहुंच सकता हूं.... आप ही कुछ बताएं तो बेहतर होगा... वैसे अगर आप इन अखबारों के संवाददाताओं और संपादकों की जाति का विश्लेषण करते हुए इनके डीएनए के बारे में कुछ बताएं तो बात बने... क्यों जो बात कई बार हमें आसानी से नहीं समझ में आती वो आप ही समझ पाते हैं... ज्ञानवर्धन के इंतजार में ...

Ajit Anjum : और हां दिलीप जी, अनशन से पहले देर तक चली संपादकों-संवाददाताओं की उस गोपनीय बैठक में द हिन्दू के एन राम नहीं आए थे, इसीलिए उनके अखबार ने पहले पन्ने खबर नहीं छापी है, सिर्फ एक फोटो छाप कर निपटा दिया है .....

Vineet Kumar : इस अन्ना हजारे के बीच शर्मिला इरोम कहां है, कोई है बतानेवाला? मीडिया इसे नोशन ऑफ सिलेब्रेशन के तहत कवर कर रहा है। ये नए मध्यवर्ग के उभार के भीतर से पैदा हुई पीटी ऑन अदर्स है, मीडिया अब ऐसी घटनाओं को इसी रूप में कवर करता है, डेली रुटीन का ये हिस्सा नहीं है। इसी मीडिया से पूछे कि वायस ऑफ इंडिया पर ताला लगने से सैंकड़ों मीडियाकर्मियों को रातोंरात बेरोजगार कर दिया गया, वो सड़क पर आ गए, स्टार न्यूज जैसे चैनल की सायम सहर के साथ वहीं के लोगों ने दुर्व्यवहार किया, किसी चैनल के आका ने कुछ नहीं लिखा जो कि बुद्धिजीवी कहलाने के लिए जान दिए फिरते हैं। ..अहमदाबाद में एक चैनल के रिपोर्टर ने आग लगाने के लिए शख्स को उसाया और बीइए ने दस दिन में कमेटी गठित करके रिपोर्ट भी जारी कर दी, इस पर ये आका चुप मार गए। मेरी सीधा मांग है कि जो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ बात कर रहे हैं, उसमें मीडिया के भीतर फैले भ्रष्टाचार और पनप रही अय्याशी को लेकर भी बात करें।

Rama प्रकाश Sinha : Anyway Anna should hv begun the campaign from Maharahtra...Mumbai where the biggest scamsters of the century reside

Pankaj Shukla : आपकी सदिच्छाएं संदेह से परे हैं।

अंशुमाली रस्तोगी : बस संदेह...

Rajiv Ranjan : chaliye news channels ke pap dhulenge.

Pankaj Shukla : जैसे उड़ान को पुरस्कार देकर फिल्म पुरस्कार देने वालों ने अपने पाप धोए।

Avinash Pawar : [email protected] ,aap bhi ....ya to bhole hai, ya anadi , ya adiyaal..... jo ye nahi samaz sakte ki ...vyakti koi bhi ho ,ya kisi bhi jaati ka, ya waad ka, ya sahi/ galat ya makkar ...........hur koi corruption ka maara hai ....koi bhi apne saath annyay nahi chahta ,aap ho ya raj thakare ya daud ebrahim

V.k. Chaudhary : i am right/good... only i am right / not good...

Avinash Pawar : ya aatankwaadi

V.k. Chaudhary : system mai awaz na nikal paye to dhamaka hota hai/atankvadi kahlata hai

Rajeet Sinha : NAU SAU CHOOHE KHAKER.....!!

Dhananjay Aditya : People diverted from Radia.

Grijesh Kumar : अपना मीडिया हवा का रुख देखकर दिशा बदल लेता है , बाजार की मांग है अन्ना हजारे को कवर करना , टी आर पी का सवाल है जनाब

Sanjay Grover : ‎..सिर्फ मीडिया ही नहीं, पब्लिक के भी हज़ारों ऐसे चेहरे इन अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं जिनके लिए भ्रष्टाचार एक मज़ेदार रुटीन की तरह रहा है। यह खतरनाक लग रहा है।..

Avinash Pawar : ‎@ ajit , perfect..

Anurag Kumar : Trp ki mazburi hi Agar midiya ka kendriya sach hai to aur saare sach to midia ke phlsaphe main paridhi ke sach honge .

Surender Kumar : [email protected] shot

Maya Mrig : हा हा हा हा

Prakash K Ray : प्रशांत भूषण के बारे में क्या ख़्याल है!!

Nikhil Srivastava : anjit anjum sir ki baat se puri tarah sahmat hun. aap kihni karanwash har mamle mein alag hi baat likhte hain. kuch mamlon mein to aapka nazariya hamein bhi nazar deta hai lekin ye status kuch jama nahin. pahle ramdev se dikkat thi, samajh mein aaya. lekin aab anna hazare aur unki awaaz ban rahi (for any goddamn reason) media se bhi dikkat hai aapko. ye jyaddati hai.

Vikas Mogha : पैसा जो देश में मौजूद हैं, वह देश की जनता तक पहुँच नही रहा हैं। दिल्ली से चल कर देश के एक गावं तक पहुँचने में एक रुपये की कीमत दस पैसे रह जाती हैं और ख़ुद को लोकतंत्र का चौथा मजबूत स्तम्भ के रूप में परिभाषित करने वाला इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया विदेश में जमा काले धन को देश में लाने की बात कर रहा हैं । शायद इस बार बँटवारे में चौथे स्तम्भ का भी हिस्सा बने। पहले तो लोकतंत्र के चारो स्तंभों को स्वरुप सुधार जाए, तब देश का पैसा देश में लाने की बात की जाए वरना जहाँ आएगा वही चला जाएगा।!!!


और, इसी फेसबुक पर एक मजेदार स्टेटस युवा पत्रकार हरीशंकर शाही का... वे हम लोगों को सूचित करते हैं कि ...

Harishankar Shahi : आज दोपहर में टी.वी. पर अन्ना हजारे के आमरण अनशन की खबर देखने की कोशिश कर रहा था. उसी समय एक बड़े चैनल पर दोपहर धमाका नाम का प्रोग्राम देखने का दुर्भाग्य मिला. न्यूज़ चैनल पर लड़कियों की चाल और सेक्स करने के फायदे बताये जा रहे थे. और मजेदार बात यह की लड़कियों की चाल से उनके सेक्स लाइफ के बारे में महिला रिपोर्टर ही बता रही थी. यानी अब न्यूज़ चैनल वासना बेचने उतर आये. इनके बावजूद जी टी.वी. की तारीफ करने लायक है जिसने बाबा हजारे के अनशन को समय दिया और हम जैसे लोगो को उसके बारे में जानने को मिला.


AddThis
Comments (6)Add Comment
...
written by krishnsa kumar, April 14, 2011
दिलीप मंडल नाम का ये प्राणी निहायत ही जातिवादी और छोटी सोच रखते है। सिवाय दलित राग अलापने के इस बेचारे के पास कुछ नहीं है,सुना है कि ये जनाब आई.आई.एम.सी में भी पढाते हैं और वहां भी छात्रों को दलित मुद्दों पर भड़काने के कुछ नहीं करते,.खुद तो कुछ नहीं कर पाते लेकिन एक दूसरे दलित पुरोधा अविनाश दास के पोर्टल मोहल्ला लाइव पर लिखकर अपनी भड़ास को शांत करने की कोशिश जरूर करते हैं,इन मंडल साहब का बस चले तो देश के सारे सवर्णों को अपने हाथ से जहर देकर मार डालें.....
...
written by ravi, April 06, 2011
dilip mandal ka cricket me bhi aarakshan chahiye.....
...
written by S.K.Singh, April 06, 2011
कौन है ये दिलीप मंडल....आइडेंटिटि क्राइसिस थी शायद इस इंसान को, इसको कृपया इतना स्पेस ना दें, दलित समाज ने अपनी खेती करने वाले उदितराज और रामविलास तक को हाशिये पर भेज दिया...अब ये नये पुरोधा कहां से आ गयें....ये साहब दलितों का झंडा उठा कर अपना बाजार टाइट करते हैं.....
...
written by Haresh Kumar, April 06, 2011

दिलीप मंडल जैसे लोग इसी जातिवादी नजरिये से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। हर खबर में उन्हें जातिवादी दृष्टिकोण नजर आता है। कुछ गलतियां अतीत में जरूर हुई लेकिन मंडलवादी मानसिकता के लोग हर चीज में आरक्षण ही खोजते रह जायेंगे। विकास के लिए आरक्षण की कोई जरूरत नहीं है बस आप अपना ध्येय सही रखिये और प्रयासों को सही तरीके से अंजाम दीजिये। डॉ. अंबेदकर एवं के आर नारायणन जैसे लोग बगैर आरक्षण के ही सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गए। क्या यह उदाहरण अनुकरणीय नहीं है। आज कार्यालयों में कई लोग जो काम नहीं करते अपनी जाति का हवाला देते हुए अनाप-शनाप बोलते रहते हैं कि उन्हें गलत तरीके से परेशान किया जा रहा है क्योंकि वे फलांने जाति से हैं क्योंकि उन्हें काम करना है नहीं बस राजनीति करनी है। जरूरत है हमें गलतियों से सबक सीखने की और आगे से ना दोहराने की लेकिन जो हमारा कार्य है उसे तो हम करते नहीं बस सीधे आलोचना पर उतर जाते हैं। वैसे निंदक की भी जरूरत है नहीं तो व्यक्ति घमंडी हो जाता है। आज जरूरत है पूरे देश को एकजुट होकर अन्ना के आंदोलन को समर्थन करने की। मैं दिलीप जी के इस बात से सहमत हूं कि कई बार मीडिया ने गलतियां की है और बहुत सारे पत्रकार बेवजह सड़को पर असमय आ गए हैं। लेकिन कुछ व्यक्तियों के गलत कारनामों के कारण सारी मीडिया गलत नहीं हो जाती है जैसे कि कुछ व्यक्तियों के गलत कार्यों से सारा समाज गलत नहीं हो जाता है। जरूरत इस बात की है सभी लोग मिलजुल कर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करें। आप अपने पड़ोस में देख सकते हैं कि कितने पानी के नल खुले होते हैं लोग उसका उपयोग करते हैं लेकिन कभी बंद नहीं करते और आगे बढ़ जाते हैं। क्या उसके लिए भी हमें अन्ना की आवश्यकता है? छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर हम समाज को काफी कुछ दे सकते हैं। जैसे अपने पड़ोसियों को प्लास्टिक के उपयोग से रोक कर। इसी तरह की कई समस्यायें हैं। जरूरत है इस पर ध्यान देने की। कारवां बनाने के लिए पहल तो खुद से करनी पड़ेगी।
...
written by Sujit Thamke, April 06, 2011
Anna Hazare koi politics chamkane ke liye ye sab nahi kar raha.yaa unko koi political party join nahi karnaa hai vaisaa hotaa to vo kabhi ke politics me kariya hote aur accha ohodaa bhi mil jaataa tha.Aaj unhi ki kaaran desh me Right To Information Act aaya hai....Unhi ke kaaran Maharashtra ke kai kaddavar Minister ki sacchi saamne aai hai.......NCP ke kaddavar netaa MP.Padmasing Patil jaisaa netaa Jail me aata pis rahaa....Kai Bhumaphiyaa aur Sugar Lobby Anna ke kaaran hi benakaab hui hai.........Unkaa housaala badhaiye nahi to Politician + Bureaucrates desh ko bech ke khayenge.......
...
written by anurag singh, April 06, 2011
ajit anjum ho yaa dilip mandal ya koi A B C....pata nahi ye apne aap ko patrakar kyon kahte hai...arey aap sabhi naukri karne wale ho....8 ghante kee shift bajao...mahina khatam ho to salary pao...busss...or agar iss naukri ke darmyan kooch netao se jaan pehchann ban jaye to kisi ghotale me apratyksh roop se shaamil ho kar kooch paise bana lo....gyan to matt he baton

Write comment

busy