रवीश कुमार का वीकली ब्लाग कालम शशि शेखर ने शहीद किया!

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पता नहीं, पत्रकारिता और जनता के हित में शशिशेखर ने कितने काम किए हैं, लेकिन ये जरूर है कि उन्होंने अपनी हरकतों से लोगों की बददुवाएं खूब ली हैं. अच्छा भला रवीश कुमार का ब्लाग पर एक वीकली कालम हिंदुस्तान में छपता था और कई ब्लागर तो सिर्फ इस कालम को पढ़ने के लिए अपने यहां हिंदुस्तान मंगाते थे, अब उस कालम को हिंदुस्तान प्रबंधन ने बंद कर दिया है. जबसे हिंदुस्तान का लेआउट अंतरराष्ट्रीय हुआ है, क्षेत्रीय पहचान वाले बोल-वचन गोल हो गए हैं.

इस लेआउट चेंज में ही रवीश कुमार के कालम को शहीद कर दिया गया. जाहिर है, इस कालम को शहीद किए जाने का श्रेय शशि शेखर को ही दिया जाना चाहिए. खैर, रवीश कुमार किसी कालम के शुरू होने या बंद होने से कम या ज्यादा नहीं हो जाएंगे. उनकी अपनी पहचान है, जो शायद शशि शेखर जैसों से बहुत आगे व उपर है. रवीश ने फेसबुक पर अपने चाहने वालों को सूचित किया कि उनका कालम बंद हो चुका है, सो लोग उनके पास ब्लागों के लिंक समीक्षा के लिए न भेजा करें. पढिए, फेसबुक पर रवीश ने क्या लिखा, और उनके चाहने वालों ने क्या कहा...

Ravish Kumar : हिन्दुस्तान में हर बुधवार आने वाला लेख ब्लॉग वार्ता बंद हो चुका है। इसलिए अब ब्लॉग के लिंक न भेजें। वैसे भी जिन्होंने लिंक भेजे उन्हीं का रिव्यू नहीं किया। शायद एक को छोड़ कर। खुद से सैंकड़ों ब्लॉग को छांटता था, पढ़ता था। कई प्रतिभाशाली लोगों से मिलने का मौका मिला। अच्छा रहा मेरे लिए। हिन्दी में हिन्दी को नहीं पढ़ना। कई विषयों से दोस्ती हुई। शुक्रिया आप सभी का।

Zafar Irshad : Kyo band hua,,,yeh mai aapse poochna cha raha tha...Tueseday ko nigahe aapka column dhoondti hai Hindustan me

Navin Modak : boss aapki style aur aam aadami ki pida ko samzane ka tarika sundarta liye hue hota he me lagbhag aapki sabhi report dekhata hi hu.....jaari rakhiye aam aadami ki baat aam jan tak pahuchane ke liye

बी.पी. गौतम : किस चमचे को मिल गयी वो जगह अब, यह भी बता देते सर

Pramila Chaudhari : kyun band hua ? aapaka tarika aisa hai ki mere pass shabd nahin hain

Rajesh Paswan : इसे लाईक नहीं कर सकता. बहुत ही बुरा हुआ.

संदीप द्विवेदी : ‎Ravish Kumar आपको और आपके ब्लॉग naisadak.blogspot.com को भी हिंदुस्तान के माध्यम से ही जाना सर|

Prithvi Parihar : dukh hua jankar ..

Praveen Trivedi : ‎Ravish Kumar जी ! अफ़सोस !......हम जैसे नौसिखियों (@प्राइमरी का मास्टर) के लिए तो एक बड़ा प्लेटफोर्म बना हुआ था यह कॉलम |

Sajid Usmani : किस कारन से बंद हो रहा है सर? सही कहा है सब अच्छी चीज़ों का अंत हो जाता है काश हिंदुस्तान का संपादक मंडल विज्ञापन में मसाज पर्लोर और एस्कोर्ट सर्विस के विज्ञापन को भी बंद कर दें

Prabhat Dixit : sir p kai ratibhashali logo se mile aur aapko achcha laga,lekin ye khushi mujhe kab hogi jabki mein pratibhasali nahi hoo

Vineet Kumar : मैं इस कॉलम के बंद होने पर मानकर चल रहा हूं कि ब्लॉग का क्रेज खत्म होता जा रहा है दिनोंदिन।.वैसे अब आपको फेसबुक जंक्शन पर शुरु कर देना चाहिए लिखना।

Neeraj Bhushan : शायद... ब्लॉग पर टेलीविजन पर कार्यक्रम अच्छा रहेगा. सीधा संवाद स्थापित हो सकता है. हन हन को अगर पढ़ें तो आप भी उत्साहित होंगे. मैं लिंक यहां डे रहा हूँ: http://neerajbhushan.com/2011/04/10/han-han-can-help-you-change-the-world/

Aradhana Chaturvedi : बहुत अफ़सोस की बात है इस कॉलम का बंद होना क्योंकि मुझे इसी के माध्यम से तीन साल पहले हिन्दी ब्लॉगिंग का पता चला था... सबसे पहले ब्लॉग जो मैंने पढ़े थे वे प्रवीण जी का 'प्राइमरी का मास्टर' और अरविन्द मिश्र जी का 'साईब्लॉग' था. उसके बाद ही मैंने दो साल पहले ब्लॉग लिखना शुरू किया था.

Prashant Priyadarshi : नहीं विनीत, क्रेज खत्म नहीं हो रहा है.. यह पुराने लोगों से नए लोगों पर शिफ्ट हो रहा है.. बस अपनी कहूँ तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की आपका कॉलम छपे या ना छपे.. क्योंकि मैं तो उसे नहीं ही पढता था, और पढ़ भी नहीं सकता.. मगर अपने कई उन ब्लॉग मित्रों को लेकर बुरा लग रहा है जिन्हें आपने उस कॉलम के द्वारा आम जन से जोड़ा..

Krishan Kumar : ब्लॉग वार्ता बंद हुआ है. इसको कोई लाइक कैसे कर सकता है. लाइक केने वाले दोस्तों....!!!!

Ravish Kumar : cheze band hotee rahtee hain. ye ek saamanya prakriyaa hai. koi barhee baat nahee hai. facebook junction ka idea achhaa hai.

Divya Tripathi : mai bhi is baar ki aapke blog barta ko dundh rahi thi nahi mila samjhi day change ho gaya hoga ,mujhe bahut dukh huha ye jan kar.

शैशव कुमार : अब समझा हमारा इंतज़ार, इंतज़ार क्यों रह गया!

Susheel Shrivastav : buri khabar hai.

Animesh Nachiketa : wE WILL MISS YOU THERE.

सैयद अख्तर अली : वास्तव में मुझे यह कालम बंद होने से दुःख पहुंचा.

रवीश कुमार के फेसबुकी स्टेटस से साभार


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