विचार.भड़ास4मीडिया.कॉम के एक लेख पर पत्रकार राहुल के खिलाफ आईटी एक्ट में मुकदमा

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बात पुरानी हो चली है. पत्रकार राहुल कुमार ने गरीबों-आदिवासियों-निरीहों के सरकारी दमन से आक्रोशित होकर गृहमंत्री पी. चिदंबरम को संबोधित एक पद्य-गद्य युक्त तीखा आलेख भावावेश में लिख दिया. और उसे हम लोगों ने भड़ास4मीडिया के विचार सेक्शन में प्रकाशित भी कर दिया.

बाद में जब दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने पूछताछ के लिए नोटिस भेजा तो मैंने राहुल के उस लिखे को ध्यान से दुबारा पढ़ा. तब समझ में आया कि कुछ चीजें आपत्तिजनक हैं, उस आलेख व कविता में भावुकता की भारी मात्रा है, तार्किक तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश बेहद कम है. हालांकि कविताई भावुकता से युक्त ही होती है लेकिन जब आप सीधे-सीधे किसी से निपटने लेने, किसी को उड़ा देने की बात करते हैं तो उसके मायने बदल जाते हैं. ऐसे में मैंने बिना इफ बट किए आर्टिकल को हटा दिया.

राहुल के साथ मैं दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के आफिस पहुंचा था. शायद ये पिछली सर्दियों की बात है. संबंधित इंस्पेक्टर से विस्तार से बातचीत हुई. उन्होंने भी समझ लिया कि नौजवान खून है, जोश में ज्यादा तीखा लिख दिया. इंस्पेक्टर समझाने की मुद्रा में रहे और मैं सुनने की. बात आई गई हो गई. पर आज अचानक पता चला कि राहुल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत एफआईआर लिख दिया है.

इस बाबत खबर दैनिक भास्कर के दिल्ली एडिशन में पेज नंबर चार पर छपी है. भास्कर में अभिषेक रावत की बाइलाइन खबर पुलिसिया ब्रीफिंग पर आधारित है, और, इस खबर को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे राहुल कुमार कोई सिरफिरा आतंकवादी है. खबर लेखक से संवेदनशीलता की उम्मीद थी. दूसरे पक्ष से भी बातचीत किए जाने की अपेक्षा थी. पर ब्रेकिंग के चक्कर में अब ऐसा कुछ कहां हो पाता है. भास्कर में प्रकाशित पूरी खबर हम नीचे दे रहे हैं.

मेरा इस पूरे प्रकरण पर साफ-साफ कहना है कि राहुल कुमार ने नक्सलियों को कुचलने और आपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर आम आदिवासियों, आम जनता को शासन-सत्ता, पुलिस-फौज द्वारा प्रताड़ित किए जाने की परिघटना से आक्रोशित होकर भावावेश में जो लिखा, उसे गैर जमानती अपराध (बताया जा रहा है कि आईटी एक्ट की धारा 66 नान बैलेबल है) मानना कतई सही नहीं है. वह भी तब जब दिल्ली पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर राहुल खुद मेरे साथ पुलिस आफिस गए हों. और, अभी तक जो पुलिस ने राहुल के बैकग्राउंड के बारे में जो जांच-पड़ताल की, दिल्ली से लेकर बेगूसराय तक, उसमें कहीं भी राहुल के प्रतिबंधित नक्सली संगठनों से जुड़े होने का कोई प्रमाण नहीं मिला हो.

साथ ही, संबंधित आर्टिकल वेबसाइट से, लेखक की सहमति से, हटाया जा चुका हो. ऐसे में दिल्ली पुलिस का राहुल को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर लिखना और उन्हें फरार घोषित करना चिंताजनक है. अगर वाकई लेखक के रूप में राहुल कुमार दोषी हैं तो प्रकाशक के रूप में मैं खुद भी दोषी हूं, तो दिल्ली पुलिस को मेरे खिलाफ भी उसी एक्ट के तहत एफआईआर लिख लेना चाहिए.

मेरा दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों और इस देश के सत्ता संचालकों से अनुरोध है कि कृपया इस प्रकरण में राहुल कुमार को अपराधी नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि हमने-उनने प्राथमिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार कर ली थी, उन्हीं दिनों, उसी कारण उस आर्टिकल को अनपब्लिश भी कर दिया. इसके बावजूद अगर राहुल कुमार को जेल के सलाखों के पीछे डालने की तैयारी है तो इसे साफ-साफ उत्पीड़नात्मक और बदले की कार्रवाई कहा जाएगा. और, इसे इस संदेश के रूप में भी लिया जाएगा कि केंद्र सरकार न्यू मीडिया, खासकर वेब और ब्लाग पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है.

महात्मा गांधी कह गए हैं कि सौ अपराधी भले छूट जाएं पर हम किसी निर्दोष को अपराधी न बनाएं. इसी भावना के तहत मैं दिल्ली पुलिस से अनुरोध करूंगा कि वे लोग राहुल कुमार के प्रकरण पर अतियों में, एक्सट्रीम पर न जाएं. लोकतांत्रिक तरीके से विचार करें. अगर वे भी दूसरी अति पर पहुंच जाएंगे तो वही काम करेंगे जो राहुल कुमार ने एक अति पर पहुंचकर लिखकर और मैंने प्रकाशित करके किया. इस मसले पर मैं देश के (खासकर दिल्ली-एनसीआर के) सभी पत्रकार साथियों से अपील करूंगा कि वे राहुल कुमार को पुलिस द्वारा फंसाए जाने का विरोध करें और अपनी नाराजगी, अपना विरोध, अपना अनुरोध प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी. चिदंबरम तक पहुंचाएं.

अभी मेरे पास कोई मेल आईडी नहीं है गृहमंत्री और प्रधानमंत्री का, तो संभव हो तो आप पी. चिदंबरम व मनमोहन सिंह की मेल आईडी पता करके नीचे कमेंट बाक्स के जरिए सभी तक पहुंचाने का कष्ट करें. साथ ही यह भी बताएं कि राहुल कुमार को कैसे बचाया जा सकता है, क्या क्या किया जा सकता है. नीचे इस प्रकरण से संबंधित वो खबर दो रहे हैं, जो आज के दैनिक भास्कर अखबार में प्रकाशित हुई है.

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया

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वेबसाइट पर गृहमंत्री को भेजा धमकी भरा मेल, केस दर्ज

अभिषेक रावत, दैनिक भास्कर

नई दिल्ली :  नक्सली संगठनों के खिलाफ ऑपरेशन ग्रीन हंट चलाने पर गृहमंत्री पी. चिदंबरम को एक वेबसाइट के माध्यम से धमकी देने वाले शख्स को दिल्ली पुलिस सरगर्मी से तलाश रही है। हालांकि जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपी युवक का किसी नक्सली या आतंकी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उसने अपने लेख में नक्सली संगठनों से सहानुभूति दिखाते हुए न सिर्फ गृहमंत्री को अपशब्द कहे बल्कि उनको जान से मारने की धमकी भी दी।

इतना ही नहीं उसने संसद में आग लगाने जैसी गंभीर बात भी कही है। इस बाबत दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आठ मई 2010 को एक वेबसाइट पर राहुल कुमार नामक व्यक्ति ने एक लेख लिखा, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ छेड़े गए ऑपरेशन ग्रीन हंट की निंदा की गई। इसमें धमकी भरे अंदाज में लिखा गया कि चिदंबरम तुम्हारी गोली से तुम्हें ही उड़ाउंगा।

यदि एक और जंगल जला तो संसद में अबकी आग लगाऊंगा। इसके अलावा कई अन्य तरह की अपमान जनक बातें भी इस लेख में लिखी गईं। आरोपी ने यह भी लिखा था कि वह ओडीशा, बिहार, झारखंड़, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के माओवादियों का समर्थन करता है। इस लेख पर जैसे ही गृहमंत्रालय के अधिकारियों की नजर पड़ी तो उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने स्पेशल सेल के डीसीपी को इस मामले की जांच कराने के लिए कहा। पुलिस ने जांच करते हुए वेबसाइट के मालिक से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसे लेख ईमेल के माध्यम से मिला था।

पुलिस ने गुगल को उस ईमेल आईडी की जानकारी भेज कर आईपी एड्रेस के बारे में पता लगाने के लिए कहा। गहन जांच के बाद पता चला कि राहुल कुमार मूल रूप से बेगूसराय (बिहार) का रहने वाला है और दिल्ली में मुनिरका गांव में किराए पर रह रहा था। उसने मुनिरका के ही एक साइबर कैफे से यह धमकी भरा लेख वेबसाइट को ईमेल किया था। पुलिस अब राहुल कुमार की तलाश कर रही है। उसके खिलाफ पिछले दिनों तीन अगस्त को साइबर सेल ने आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।


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