चोरी की सामग्री से सजी एक साहित्यिक दुकान उर्फ नईख़बर.कॉम

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रवि रतलामीयदि आपकी साइट की सारी की सारी सामग्री की चोरी कर कोई अन्य साइट अपनी दुकान सजा ले तो आपको कैसा लगेगा? आज मैं गूगल में कुछ सर्च कर रहा था तो नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html) सर्च रिजल्ट में पहले आया. जबकि सामग्री ठेठ रचनाकार.ऑर्ग (http://rachanakar.org) की थी. मेरा माथा ठनका.

मुझे लगा कि रचनाकार.ऑर्ग की रचनाओं को उदाहरण के लिये फिर से छापा गया होगा या कोई एकाध सामग्री साभार पुनःप्रकाशित हुई होगी या किसी लेखक की सहमति से उसकी रचनाएँ रचनाकार.ऑर्ग सहित दोबारा वहाँ प्रकाशित हुई होगी. तो मैं महज जाँच पड़ताल के लिए वहाँ गया. वहाँ दुख और आश्चर्य के साथ मैंने पाया कि रचनाकार.ऑर्ग की तमाम रचनाएँ वहाँ बड़े शान से प्रकाशित हैं. प्रकटतः रचनाकार.ऑर्ग की फुल फ़ीड को वो बेशर्मी से पुनः प्रकाशित कर रहे हैं और अपने साइट में सामग्री भर रहे हैं. नईखबर के साहित्य खंड के आज का स्क्रीनशॉट ये है जिसमें रचनाकार.ऑर्ग की तमाम नई रचनाएँ यहाँ कॉपी-पेस्ट की गई हैं.

आप देखेंगे कि रचनाकार की तमाम रचनाओं को यहाँ बड़ी ही खूबसूरती से सजाया गया है. यहाँ तक कि अजय 'अज्ञात' की पूरी की पूरी 85 ग़ज़लों को भी रचनाकार स्टाइल में छाप दिया गया है जबकि इस तरह की साइटों में आमतौर पर बड़ी सामग्री को मल्टी पेज (स्क्रॉलिंग नहीं, ताकि बार बार पेज लोड हो) में प्रकाशित किया जाता है! और, कोढ़ में खाज यह कि न तो कहीं रचनाकार.ऑर्ग का नाम दिया गया है और न ही कहीं रचनाकार.ऑर्ग की लिंक दी गई है.

इससे पहले भी रचनाकार.ऑर्ग की विशिष्ट-वृहद सामग्रियों को अन्यत्र प्रकाशित किया जाता रहा है - खासकर एक सरकारी-वित्त-पोषित साइट में, मगर सारी की सारी सामग्रियों को अपनी साइट पर कॉपी-पेस्ट करने की यह विशिष्ट घटना है.

आप सभी पाठकों से आत्मीय आग्रह है कि नेट पर इस तरह के सामग्री डाका के खिलाफ आवाज बुलंद करें नहीं तो कल आपकी साइट की सामग्री के साथ भी यही खतरा हो सकता है. साथ ही नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html)  में छपी चोरी की रचनाओं के नीचे टिप्पणियों में इस संबंध में अपना कड़ा विरोध दर्ज करें. नईख़बर.कॉम में कोई संपर्क सूत्र भी प्रकाशित नहीं है, अलबत्ता डोमेन नेम रजिस्ट्रार के यहाँ कंटेंट चोरी का मामला दर्ज करने की शिकायत प्रारंभ की जा रही है.

नईख़बर.कॉम को लेकर एक मित्र की प्रतिक्रिया, जिनकी भी सामग्री को उनसे बिना अनुमति के प्रकाशित किया गया है : "इस तरह के चोर-उचक्के किसी की अनुमति क्या लेंगे. नाम-पता तो छोड़ो, ये भूतनी का तो अपने फ़ेसबुक की wall तक पर ढक्कन लगाए बैठा है. ये कमीना चोर ही नहीं है, अव्वल दर्ज़े का डरपोक भी है. इसके फेसबुक के सभी मित्रों को ये ख़बर दे रहा हूं." मित्र की बात सत्य प्रतीत होती है क्योंकि डोमेन-टूल्स द्वारा इस जाल-स्थल के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर इसके संपर्क-सूत्रों का कोई अता पता दर्ज नहीं मिलता है.


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Comments (1)Add Comment
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written by Editor, September 06, 2011
Dear Sir/Madam,

Our Website is updated by most of the people.
It was accidentally updated in website by other people.
We have removed all the materials related to your website.
Again we are sorry for inconvenience caused by us.

Thanks and Regards


Editor
NaiKhabar.com

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