यूपी के होते जूलियन असांजे तो बुरा हाल करती भ्रष्‍ट माया सरकार

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डा. नूतनयह तो हम सभी जानते हैं कि विकिलीक्स पर हमारे देश की एक महाराज्ञी सरीखी नेता सुश्री मायावती के विषय में काफी-कुछ खरी-खरी बातें लिखी गयी थीं. इनमे जो महत्वपूर्ण बातें थीं वे यह कि मायावती आत्ममुग्ध नेत्री हैं जिनके अंदर प्रबल तानाशाही प्रवृत्ति है और वे अपनी महानता के दिवा-स्वपनों में खोयी रहती हैं.

उनके काम-काज के तरीकों के विषय में भी कई टिप्पणियाँ विकिलीक्स में प्रकाशित हुईं.  सुश्री मायावती के भ्रष्टाचार सम्बन्धी आचरण के विषय में भी काफी कुछ लिखा गया. ये सब खबरें विकिलीक्स अथवा मिस्टर जूलियन असान्जे के निजी विचार नहीं थे बल्कि ये सारी वे बातें थीं जो विभिन्न अमेरिकी राजनयिक ने अपने विचार लिखित रूप में आधिकारिक तौर पर प्रेषित किये थे और जो अब जा कर सार्वजनिक हो रहे हैं. इन केबलों में खास कर एक खबर जो काफी चर्चा में आई थी वह यह कि सुश्री मायावती कई बार अपने लिए पसंदीदा चप्पल/सैंडल मंगवाने के लिए अपना निजी खाली विमान मुंबई भेजा करती रही हैं, जो एक प्रकार से उस गरीब जनता के साथ भद्दा मजाक है जिसका वे अपने आप को प्रतिनिधि बता कर राज करती हैं.

वैसे जो भी आदमी उत्तर प्रदेश में रहता है और निष्पक्ष रूप से चीज़ों का आकलन करता है. वह जूलियन असान्जे के वेबसाईट पर लिखे गए इस बात से शब्दशः इत्तेफाक करेगा. यदि यह सत्य है कि मायावती दलित वर्ग की अघोषित देवी हैं और दलित वर्ग का उन पर अगाध विश्वास है जो यह मानता है कि मायावती ने उन्हें वह इज्जत और सामाजिक प्रतिष्ठा दी, जिसके वे हमेशा से मोहताज थे, तो यह भी उतना बड़ा ही सत्य है कि मायावती की सरकार के भ्रष्टाचार के बारे में लोग सडकों और गली-चौराहों पर चर्चा करते हैं. प्रदेश का बच्चा-बच्चा इस बात से अवगत है कि यहाँ कोई भी सरकारी काम कराने के लिए पैसा देने की जरूरत शायद पड़ ही जाती है. यद्यपि इस सम्बन्ध में अकसर बातें रिकॉर्ड पर नहीं आ पाती हैं क्योंकि हर आदमी मायावती की सरकार में भय खाता है और उसे यह भी डर होता है कि यदि इसका प्रतिवाद किया तो एक तो काम नहीं ही होगा, उलटे कोई अन्य मामले में ना फंसा दिये जाएँ. पर कभी-कभार इंजीनियर मनोज गुप्ता की जन्मदिवस पर हुई हत्या या आईएएस अधिकारी की आत्महत्या के बाद इस तरह की बातें लगभग सार्वजनिक हो ही जाती हैं.

यह बात भी सत्य है कि मायावती की सरकार एक व्यक्ति के एकछत्र राज्य वाली सरकार है, जिस में पुराने जमाने के तानाशाहों की तरह विरोध का सिर्फ एक नियम है- राजनैतिक रूप से सजा-ए-मौत. आवश्यकता पड़ने पर कई बार पुलिसिया तंत्र का भी भरपूर उपयोग करने में किसी को भी हिचक नहीं होती जैसा दिवंगत किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा मायावती को कुछ अपशब्द कहने के मामले में हेलिकॉप्टर से ले कर पूरी बटालियन लगा कर उनकी गिरफ़्तारी कराने तथा उसी दौरान उत्तर प्रदेश की कॉंग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के घर को लगभग खुलेआम पुलिस के आला अधिकारियों के सामने जला देने की घटना में हुआ था.

मायावती के शाहखर्चे के विषय में भी किसी को अनभिज्ञता नहीं होगी क्योंकि सभी जानते हैं कि एक गरीब घर में पैदा होने और कोई भी ज्ञात व्यवसाय नहीं करने और पूरी तरह राजनैतिक जीवन जीने के बावजूद उनके पैसे ना जाने कैसे दिन-दूने रात-चौगुने बढ़ते ही जाते हैं और दिल्ली, नोयडा, अपने पैतृक गाँव, लखनऊ आदि में उनका निवास स्थान किसी राजघराने के मालिक से कम नहीं है. साथ ही उनका व्यक्तिगत जीवन, जो मीडिया के जरिये आम लोगों तक आता है, वह भी यही दिखलाता है कि अकूत ताकत और बेहिसाब दौलत की मालकिन मायावती बीते दिनों की एक मनमर्जी के तानाशाह की तरह आचरण करती हैं.

उन का यह सब कुछ उनके दल वाले इसीलिए बर्दाश्त करने को तैयार बैठे हैं क्योंकि उनके पास पन्द्रह से बीस प्रतिशत ऐसे मत हैं जो उनकी जेब में हैं और जिसे वे जिसको चाहें, एक इशारे में दान दे सकती हैं. एक लोकतंत्र में इससे बड़ी ताकत और कोई नहीं हो सकती और इसीलिए हर नेता बहुजन समाज पार्टी का टिकट पाने को सतत प्रयत्नशील रहता है. दूसरे दल भी इन्हीं कारणों से बहन मायावती को खुश रखने में लगे रहते है कि यदि उनकी नजरें इनायत हो गयीं तो सत्ता का रास्ता सीधे खुल जाएगा. यह अलग बात है कि मायावती से इतनी आसानी से कुछ पा सकना आसान नहीं है और आज तक जिसने भी उनसे कुछ पाने के चक्कर में हाथ बढ़ाया है उसने अपना हाथ जलाया ही है, पर फिर भी यह तय है कि आगे भी अन्य राजनैतिक दल इन अनुभवों को दरकिनार करते हुए बार-बार अपना हाथ जलाते रहेंगे और मायावती के सम्मुख सतत उनकी कृपा पाने को नतमस्तक रहेंगे. इस प्रक्रिया में उनके द्वारा किये गए सारे कार्य स्वीकार्य होंगे क्योंकि लोकतंत्र में शायद एक ही चीज़ का मतलब होता है- किसके पास कितने वोट हैं, और इस मामले में आज पूरे हिंदुस्तान में सुश्री मायावती का कोई जोर नहीं है.

जिस महिला के सामने देश के प्रधानमंत्री और देश की सबसे ताकतवर महिला सुश्री सोनिया गाँधी तक आदर से पेश आते हों और उनकी सभी इच्छाओं को शिरोधार्य करते हों यदि उन्हें एक कल का युवक जूलियन असान्जे अपनी वेबसाईट पर उनका चेहरा दिखाने की कोशिश करेगा तो सम्राज्ञी का तिलमिलाना निश्चित रूप से स्वाभाविक है. तत्काल उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने असांजे के लिए फरमान जारी कर के कहा था कि उन्‍हें उनके देश के पागलखाने में भर्ती कराना चाहिए. साथ ही यह भी कि अगर वहां जगह नहीं हो तो मैं अपने प्रदेश के आगरा में स्थित पागलखाने में उन्‍हें रखने के लिए तैयार हूं.

यह तो सही है कि यदि असान्जे उत्तर प्रदेश (या शायद हिंदुस्तान में कहीं के भी होते) तो मायावती उन्हें आगरे के पागलखाने में डाल देतीं और तब असान्जे को खबरी पत्रकारिता का असली मजा मिलता, पर चूँकि वे सात समुन्दर पार आराम से एक लोकतांत्रित देश में बैठे हुए हैं, तभी वे वहाँ से मायावती को अपना जवाब दे पा रहे हैं, और ये जवाब उसी अंदाज में दे रहे हैं जिस अंदाज में सुश्री मायावती ने असांजे पर खुलासे के बाद तिलमिलाते हुए कहा था. असांजे ने माया पर शब्‍दों से कड़े प्रहार करते हुए ये मांग की है कि माया अपनी गलती स्‍वीकार करते हुए उनसे माफी मांगें. उन्होंने एक टीवी चैनल से पत्राचार में कहा कि अगर मायावती उन्‍हें लेने के लिए इंग्‍लैंड जहाज भेज दें तो वे खुशी-खुशी चले आयेंगे, और साथ ही मायावती के लिए चुनिन्दा चप्पलों की जोड़ी भी ले आयेंगे.

सुनने में तो यह बहुत प्यारा और दिलेर लगता है पर मैं यह सोच रही हूँ कि यदि असान्जे भारत/ उत्तर प्रदेश के होते तब उत्तर प्रदेश की सम्राज्ञी उनका क्या हाल बनातीं, किस पागलखाने में भेजतीं या उनके पुलिसवाले असान्जे के खिलाफ किन धाराओं में मुक़दमा बना रहे होते?

डॉ. नूतन ठाकुर

स्वतंत्र पत्रकार

लखनऊ


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