बीबीसी में छपी गुरु की खबर चोरी करके चेले ने आई-नेक्‍स्‍ट में छाप दी!

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नए दौर में पत्रकारिता का चेहरा ही नहीं बदला है बल्कि चरित्र भी बदल गया है. खबरों को खोजने की क्षमता की कमी कहें या रोज-रोज खबर देने का दबाव, या फिर किसी तरह पेज भर देने की मजबूरी, अब खबरें भी चोरी की जाने लगी हैं. एक अखबार दूसरे अखबार की खबरों की चोरी करके उसमें थोड़ी फेरबदल के बाद अपने पाठकों के सामने परोस दे रहे हैं. जो पकड़े गए वो चोर जो बच गए वो ईमानदार.

ऐसा ही एक मामला है आई-नेक्‍स्‍ट, लखनऊ का. आई-नेक्‍स्‍ट ने 10 सितम्‍बर को स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट कॉलम में होशियार, 'खबर' दार! हेडिंग से पूरे पेज की खबर छापी है. खबर पढ़ने-देखने में अच्‍छी है. पर जब इस खबर की सच देखें तो यह मामला पूर्ण रूप से बीबीसी हिंदी से चोरी का है. खबर का सार तत्‍व सभी वहीं से उठाए गए हैं, बस लिखने के तरीके और शब्‍दों को बदल दिया गया है. अब आम पाठक तो इस चोरी को नहीं पकड़ सकता, परन्‍तु जो पाठक तमाम साइटों को सर्च करते रहते हैं, वे ऐसी चो‍रियां पकड़ लेते हैं.

पूरा मामला यह है कि लखनऊ विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापक मुकुल श्रीवास्‍तव ने बीबीसी हिंदी के वेबसाइट के लिए एक खबर लिखी- अपनों के लिए उठी 'गाँव की आवाज़'. इसी खबर को उनके शिष्‍य रह चुके आई-नेक्‍स्‍ट के कौशलेंद्र ने थोड़ी नमक-मिर्च के साथ अपने अखबार में प्रकाशित कर दिया. अब कुछ लोग कह सकते हैं कि इसमें गलत क्‍या है. उसने तो सिर्फ आइडिया ही लिया है, कहानी तो खुद लिखी. तो मेरा कहना है कि तब तो सभी एक दूसरे की एक्‍सीक्‍लूसिव खबरों को चोरी करके थोड़ी फेरबदल करके छाप लें, पर पत्रकारिता का मानक और नैतिकता भी तो कोई चीज है.

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.


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