लफंगों की आखिरी शरणस्थली होती है देशभक्ति

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आनंद प्रधानदेश में पत्रकारिता छात्रों को तैयार करने वाले प्रीमियर इंस्टीट्यूशन इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी) के प्रोफेसर आनंद प्रधान की हिम्मत की दाद देनी चाहिए. शिक्षण जैसे पेशे में और खासकर पत्रकारिता जैसे पेशे के लिए नौनिहाल तैयार करने वाले काम में वर्तमान में इस कदर खरी-खरी बोलने और लिखने वाले अध्यापक बेहद कम हैं.

आनंद प्रधान ने प्रशांत भूषण पर हमले का बहुत बुरा माना और इसके कारण इन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले की विचारधारा रखने वालों को फेसबुक पर लताड़ने और अपने फ्रेंडलिस्ट से बाहर करने का ऐलान कर दिया. कई लोगों को उन्होंने अनफ्रेंड किया जो दक्षिणपंथी फासिस्ट विचारधारा रखते हैं. आनंद यहीं नहीं रुके. उन्होंने लगातार अपने तर्कों के जरिए यह बताने-समझाने की कोशिश शुरू कर दी है कि आखिर दुनियाभर में वे कौन लोग हैं जो देशभक्ति की आड़ में हमारे आपके जीवन, मनुष्यता, अस्तित्व को नष्ट करने पर आमादा हो जाते हैं.

आनंद के इस जनपक्षधर और मनुष्यता व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अगाध आस्था के नजरिए का भड़ास4मीडिया भी सपोर्ट करता है और इसे आगे बढ़ाने की हर किसी मुहिम में शामिल होने का ऐलान करता है. यहां बताते चलें कि आनंद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता की पढ़ाई और शोध के दौरान भी समाज और देश के कई ज्वलंत मसलों पर सक्रिय हस्तक्षेप करते रहे हैं और तत्कालीन छात्रों के प्रिय वक्ता और नेतृत्वकर्ता रहे हैं. आनंद प्रधान ने फेसबुक पर जो ताजा स्टेटस अपडेट किया है, वो इस प्रकार है.

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'देशभक्ति, लफंगों की आखिरी शरणस्थली होती है' - लगभग सवा दो सौ साल पहले की गई सैमुअल जानसन की यह टिप्पणी आज के भारत में बजरंग दल, श्रीराम सेने से लेकर शिव सेना जैसे लम्पट सांप्रदायिक संगठनों और भगवा ‘देशभक्तों’ पर बिलकुल सटीक बैठती है. देशभक्ति सिर्फ आड़ है. इनकी ‘देशभक्ति’ की हकीकत तहलका, विकीलीक्स और ताबूत घोटाले में खुल चुकी है. इसलिए प्रशांत भूषण पर हुआ हमला कोई अपवाद नहीं है. हिटलर के नाजी अर्द्धसैनिक गैंग स्टोर्मत्रुपर्स (एस.एस) भी देशभक्ति की आड़ लेकर विरोधी विचार रखनेवाले बुद्धिजीवियों पर ऐसे ही हमले करते थे, जैसे आज शिव सेना-मनसे और भगवा गैंग के गुंडे करते हैं. कभी बुद्धिजीवियों, लेखकों, पत्रकारों और फिल्मकारों पर और कभी आम गरीबों जैसे रेहडी-पटरी, टैक्सी और टेम्पोवालों और कभी अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है.

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...इस मसले पर आनंद प्रधान के कुछ अन्य फेसबुकी स्टेटस..

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कहते हैं कि असहमति देशभक्ति का सर्वोच्च रूप है.. लेकिन भारत के भगवा गुंडे देशभक्ति की आड़ में असहमति को दबाने और कुचलने की कोशिश कर रहे हैं.. लौह पुरुष नरेंद्र मोदी के राज में और क्या हो रहा है? असहमति की हर आवाज़ को कुचला और दबाया जा रहा है...इन्हें असहमति से इतना डर क्यों लगता है? क्या देशभक्ति की जमीन इतनी भुरभुरी है कि एक प्रशांत भूषण के बयान से भरभरा के ढह रही है...या, बहुत परिश्रम से गढ़ी जा रही लौह और विकास पुरुष और ईमानदारी की असलियत सामने आने का डर है?

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अभी-अभी प्रशांत भूषण पर हमले को जायज ठहराने की कोशिश कर रहे एक महोदय को मित्र सूची से बाहर किया है..जो भी इस हमले का समर्थक है और मेरे मित्र सूची में है, उसे तुरंत अन्फ्रेंड करूँगा...जो अब हमले का विरोध लेकिन कश्मीर पर प्रशांत भूषण के बयान पर हमले करके इस हमले को अप्रत्यक्ष तरीके से जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भी मित्र सूची से बाहर करने में देर नहीं करूँगा...अच्छा होगा कि ऐसे लोग अपने मित्र सूची से खुद ही मुझे अन्फ्रेंड कर दें...हिंदू तालिबानियों से बहस की गुंजाइश नहीं है और उनसे बहस करके समय बर्बाद नहीं करना चाहता...

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प्रशांत भूषण पर हमले की सख्ती से भर्त्सना की जानी चाहिए...लेकिन हमलावर कुछ सिरफिरे भर नहीं थे बल्कि वे भगवा सांप्रदायिक-फासीवादी राजनीति से प्रेरित थे...साथ ही, हमलावरों की सांप्रदायिक-फासीवादी-अंधराष्ट्रवादी राजनीति की उससे भी अधिक भर्त्सना होनी चाहिए...इस राजनीति के कारण देश में असहिष्णुता और फासीवादी गुंडागर्दी बढ़ रही है..इसका वैचारिक तौर पर मुंहतोड जवाब दिया जाना चाहिए.

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फेसबुक पर आनंद प्रधान से दोस्ती करने के लिए और उनके उनके अन्य स्टेटस को जानने-पढ़ने के लिए उनके नाम के इस लिंक पर क्लिक करके जा सकते हैं- फेसबुक पर आनंद प्रधान


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Comments (7)Add Comment
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written by Alok, October 19, 2011
Aise logo kot o main dekhana bhi nahi chata hun...........Sade hue secular ki santan.............
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written by veeru veer pratap singh, October 17, 2011
prasant jaiso logo ki pitai honi jaruri hai,kya kejrival ye bataenge ki ford foundation se unke kya riste hain,parth j shah ko jo paisa america se aa raha hain,vo kidhar jata hain,kya anna team ko desh me garibi or mahgai nahi dikhti.
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written by Rohit Rai , October 17, 2011
आनंद प्रधान से अब दोस्ती हो गयी है लगता पहले तो काफी अलग सुर में उनके लिए लिखा जाता था ये मामला क्या है
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written by पंकज झा., October 17, 2011
ऐसा लगता है जैसे आनंद प्रधान के फ्रेंड लिस्ट से बाहर हो जाना जैसे कोई बड़ा दंड हो. देश भक्ति को लफंगई कहने से बड़ा कमीनापन और कुछ नहीं हो सकता. इस तरह भगत सिंह, चंदशेखर आजाद समेत तमाम लोग लफंगे हो गए और आनद प्रधान एकमात्र सभ्य. दो सौ साल पहले किसी विचारक का किसी अन्य सन्दर्भ में दिए उपरोक्त उद्धरण आज के परिप्रेक्ष्य में कितना सही है यह अपने को नहीं पता. हां ये ज़रूर है कि देश्द्रोहिता अभागे, उचक्कों, कमीनों, कुत्तों, लुटेरों और बदतमीजों, अहसान फरामोशों का आख़िरी हथियार ज़रूर होता है.
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written by prashant, October 17, 2011
inse friendship kyon baat rahe ho yashwant ji. jabardasti link pakda rahe ho.deshbhakti lafango ki shran-sthali hai, maan liya jaaye aapke anusaar, to choron, dalalon, dakaiton ki sharansthali ka naam bhi bata do.
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written by A Ram Pandey, October 17, 2011
संपादक यशंवत जी,
अगर बात देशभक्त लफंगों की जाए, तो ये कैटेगरी इतनी विशाल है कि इसमें आप, मैं और वो तमाम लोग भी शामिल हो जाएंगे, जिनके चलते आनंद प्रधान की रोजी-रोटी चल रही है। सच कड़वा होता है, उसे कहने की हिम्मत रखते हैं तो पचाने की भी हिम्मत रखिए।
बात जहां तक देशभक्ति की है, तो वो जुनूनी और क्रांतिकारी विचारधारा वाले व्यक्ति (आपके लफ्जों में 'लफंगों') के अंदर होती है। किसी सड़क छाप के अंदर नहीं, जो केवल अपने से मतलब रखता है। देशभक्तों के लफंगा बताने के कारण मैं आनंद प्रधान को अपने फेसबुक में अनफ्रैंड कर रहा हूं। मुझे खेद है कि ऐसे व्यक्ति को फ्रैंडलिस्ट में शामिल किया, जो विचार की स्वतंत्रता को अपने वैचारिक सुविधानुकुल स्वतंत्रता ही मानता है। धन्य है वो आईआईएमसी भी जो ऐसे लोगों को ढो रहा है।

प्रणाम
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written by Girish Mishra, October 17, 2011
Congratulations, Anand, for your courageous stand!

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