भारत सरकार को सविता भाभी पसंद नहीं

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भारतीय चरित्रों पर आधारित मशहूर कार्टून पोर्न पोर्टल सविता भाभी डॉट कॉम पर भारत सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। इस पोर्टल का काम तमाम कर दिया गया है। इस वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। 3 जून को भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ टेलीकम्युनिकेशन्स (डाट) की तरफ से जारी आदेश में सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से कहा गया है कि वे सविताभाभी डॉट कॉम को ब्लाक कर दें। भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन सरकारी एजेंसी द कंट्रोलर आफ सर्टिफाइंग अथारिटीज (सीसीए) के पास वेबसाइटों को ब्लाक करने का अधिकार आईटी एक्ट के तहत है। सीसीए से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सविताभाभी डॉट कॉम के खिलाफ ढेरों शिकायतें मिलीं थीं।

हम लोगों ने आईटी एक्ट की धाराओं के तहत इस साइट के खिलाफ कार्रवाई की है। सीसीए के अधिकारियों ने बताया कि उन लोगों ने सविता भाभी डॉट कॉम के संचालकों से अपना पक्ष रखने के लिए संपर्क किया था लेकिन उधर से कोई भी सामने नहीं आया। सीसीए के अफसरों ने सविता भाभी डाट काम को बंद तो करा दिया पर इसके संचालकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर निर्णय नहीं ले पाए हैं।

ज्ञात हो कि सविता भाभी डॉट कॉम को पिछले साल मार्च महीने में अंग्रेजी में लांच किया गया था। बाद में इसे हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में देखने के आप्शन दे दिए गए। इस बेहद लोकप्रिय पोर्न पोर्टलल को जल्द ही मराठी और पंजाबी में भी लांच करने की तैयारी थी। सविताभाभी डाट काम की नायिका सविता एक शादीशुदा भारतीय स्त्री हुआ करती थीं, जो घर के अकेलेपन और सेक्सुअल लाइफ से हताश होने के कारण पराए पुरुषों संग सेक्स के प्रयोग करती और सेक्स फंतासियों को जीती। यह साइट सविता भाभी के सेक्स प्रयोगों और फंतासियों को कार्टून चरित्रों के जरिए कई भाषाओं में देश-विदेश के करोड़ों पाठकों तक पहुंचा रही थी। इस साइट पर हर हफ्ते लाखों यूनिक विजिटर आते थे। साइट के सत्तर फीसदी से ज्यादा विजिटर भारत के होते थे।

सविता भाभी डॉट कॉम को लेकर भारतीय समाज में कई बार कई तरह की बहस भी छिड़ी। परंपरागत विचार के लोग इस साइट को भारतीय संस्कृति के लिए खतरनाक मानते थे तो आधुनिक लोग नेट की दुनिया में अरबों-खरबों खराब साइटों के होने के तर्क के साथ इस साइट के भी बने रहने में कोई दिक्कत नहीं देखते थे। इन लोगों का कहना था कि नेट पर बुरे से बुरा भी होता है और अच्छे से अच्छा भी मौजूद है। ये आप पर है कि आप क्या देखना और क्या नहीं देखना चाहते। 

उल्लेखनीय है कि आईटी एक्ट में सरकार एक ऐसे संशोधन की तैयारी कर रही है जिसके तहत किसी भी वेबसाइट को बिना किसी कारण के सरकार कभी भी बंद करा सकती है। इस संशोधन को लेकर फ्रीडम आफ एक्सप्रेसन में विश्वास करने वाले लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी है। वेबसाइटों को मिलने वाली हिट्स और लोकप्रियता की गणना करने वाली साइट अलेक्सा डाट काम के आंकड़े बताते हैं कि सविताभाभी भारत की सौ सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइटों में शुमार हो चुकी थी। सविताभाभी का 82वां स्थान था।

खबर है कि सविताभाभी के संचालकों ने इस प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बनाया है। देशमुख नामक इस पोर्टल के संचालक ने मेल के जरिए कई मीडिया हाउसों को भेजे गए अपने पक्ष में कहा है कि उनकी साइट न तो देश की सुरक्षा के लिए खतरा है और न ही गैर-कानूनी काम कर रही है। ऐसे में साइट को ब्लाक करना इंटरनेट से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन है। देशमुख का कहना है कि सविताभाभी के संचालक यूरोपीय यूनियन में कहीं रहते हैं और उन्हें साइट प्रतिबंधित किए जाने को लेकर कहीं से कोई मेल या सूचना नहीं दी गई। देशमुख ने यह भी बताया कि सविताभाभी डाट काम का डोमेन नेम अमेरिका में रजिस्टर कराया गया था।

सविताभाभी डाट काम पर प्रतिबंध लगाकर सरकार भले ही भारतीयों की वाहवाही लूटे लेकिन दुनिया के मीडिया विश्लेषकों और आजाद खयाल लोगों ने सविताभाभी डाट काम पर भारत सरकार द्वारा पाबंदी लगाए जाने के बाद भारत को भी इंटरनेट सेंसरशिप वाले कट्टरपंथी, दकियानूसी और अलोकतांत्रिक देशों चीन, इरान और उत्तरी कोरिया की श्रेणी में डाल दिया है। 

इस मुद्दे पर आप क्या सोचते हैं, अपनी राय हम तक भेजिए, This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए


सविता भाभी डॉट कॉम के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए और पाबंदी के बाद शुरू हुई बहस को समझने के लिए इन लिंक पर जा सकते हैं-

 


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