'पत्रकारों की मानहानि बंद करे भड़ास4मीडिया'

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दूसरा पत्र : सम्पादक, भड़ास4मीडिया, महोदय, मीडिया की खबरों के नंबर वन पोर्टल www.Bhadas4Media.com में 7 अगस्त को समाचार कम लेख में 'आयोजन गुरु के बैनर तले एक और कारनामा' शीर्षक से जो आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है, वह दुखद है। आपने अपने समाचार के दूसरी और तीसरी लाइन में लिखा है कि ‘आयोजन गुरू के बैनर के तले इलाहाबाद की मीडिया ने एक और कमाल कर दिया।’ आपकी भाषा से लगता है आप इलाहाबाद की मीडिया को किसी आयोजन गुरू के तहत काम करने वाला या निर्देशन में चलने वाला बता रहे है। यह उचित नही है तथा इस कार्य में लगे लोगों के चरित्र पर आक्षेप कर रहे हैं, यह उचित नही है। आपने अपनी खबर के दूसरे और तीसरे पैराग्राफ में रेलवे से सम्बन्धित एक खबर का जिक्र किया है जिसमें कहा गया है कि गर्भवती महिला स्वेच्छा से हलफनामा देकर दौड़ी। इसमें पत्रकारो का क्या आयोजन था, यह समझ से परे है। जैसा आप उपर के पैरे में लिख रह है- इलाहाबाद के पत्रकारों का करनामा, तो क्या पत्रकारों ने उस महिला को जबरन दौड़ाया! अगर नही तो आपके कथित आयोजन गुरु और चेलों का क्या काम था आयोजन में। लगता है आपके रेलवे से सम्बन्धित कोई सफाई दे रहे हैं।

इलाहाबाद के पत्रकारों के कारनामें का आपने बड़ा गुणगान किया है और आप अन्तिम पैरे में लिखते है कि... खबर चली ही नहीं, तहलका मचा दिया। आपने यह तो लिखा नहीं कि किस चैनल पर कैसे खबर चली और कैसा तहलका मचा? आपने तो सिर्फ कुछ व्यक्तियों की मानहानि हो, इस तरह से अपने पोर्टल का बेजा इस्तेमाल कर जानबूझ कर ऐसी खबर डाली है।

मान्यवर कोई भी रिपोर्टर खबर भेजता है, चलाता नहीं। उसी तरह जैसे प्रिन्ट में कोई रिपोर्टर खबर लिखकर भेज देता है जिसे डेस्क वाले फाइनल करते हैं कि छापना है कि नहीं। अगर आपके अरोप के अनुसार सब आयोजन था तो आपने यह क्यूं नहीं लिखा कि चैनल के प्रोड्यूसर आयोजन की परख नहीं कर पाते और आंख मूंद कर खबर चला देते है! आपने चैथे पैरे की तीसरी लाइन में साफ लिखा है कि ....आयोजन गुरु फिर हिट हुए फर्जी खबर के आयोजन में....। उपर की लाइन कि ...आयोजन गुरू के बैनर तले इलाहाबाद की मीडिया ने कमाल कर दिया... और फिर ...आयोजन गुरू फिर हिट हुए फर्जी खबर के आयोजन में... से खबर की बदनीयती साफ झलकती है। आप किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि इलाहाबाद की पूरी मीडिया पर आक्षेप कर रहे हैं, वह भी पत्रकारिता का धर्म निभाए बिना।

महोदय, आपकी खबर से पत्रकारिता पर सवाल खड़ा हुआ है। आपने कई ऐसे संगीन आरोप लगाये हैं जिससे साफ-सुथरी पत्रकारिता करने वालों को ताने सहने पड़ रहे हैं। उन्हें मानसिक कष्ट पहुंचाया जा रहा है। कई के कार्यालय से सवाल खड़े किये जा रहे है। किसी की नौकरी जा सकती है आपकी झूठी पत्रकारिता से। जो सबसे बड़ी बात है आपने अपने पोर्टल के अल्प स्वार्थ के लिए कई लोगों का चारित्रिक हनन किया है। मानहानि की है। जबकि आप अपने पोर्टल के शिकायत हेडिंग में लिखते है कि खबर के सम्बन्ध में दूसरे पक्षों से पूछ कर या उनका पक्ष रख कर अपने पत्रकारिता का धर्म निभा रहें हैं। किससे पूछा आपने और किसका पक्ष रखा आपने ! जरूर बतायें।  इससे जो भी हानि होगी उसके लिए आपका पोर्टल और आप सीधे तौर पर जिम्मेदार होगें। अगर आप समझते है कि आपकी खबर सही और सारे जानकारी जांच के बाद आपने सही लिखा है तो अपने रूख पर जरूर कायम रहें।

मै भी एक पत्रकार हू और उस खबर को मैंने भी बनाया था, इससे मै भी बुरी तरह आहत हुआ हूं और मेरी मानहानि हुई है। मै कई रातों से सो नहीं पा रहा हूं और यह मेरे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है, ऐसा डाक्टर बता रहे हैं। मेरे कई बार मेल कर इस खबर पर प्रतिवाद करने पर भी कोई उत्तर नही आया, इससे लगता है कि आप अपनी खबर पर कायम हैं।

वीरेन्द्र पाठक

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पहला पत्र :
मैने आपकी खबर पढ़ी आयोजन गुरु के बैनर तले एक और कारनामा। मुझे लगता है आपको अपने कथित रिपोर्टर पर ज्यादा ही विश्वास है। पहले आपको खबर का पता करना चाहिए नहीं तो आपके पोर्टल की विश्वसनीयता खत्म हो जायेगी। वहां एक नहीं, दो महिलाए गर्भवती थीं, दूसरी महिला को 8 माह का गर्भ था, ऐसा उसने बताया था। रही बात हलफनामा की तो हलफनामा देकर मै रेलवे लाइन पर रेलगाड़ी के सामने कूद सकता हूं क्या? खबर के पीछे खबर यही थी कि गर्भवती महिलाएं दौड़ीं। यही असली खबर है और बाकी का सब विज्ञापन और खबर न पाने की हताशा है। अगर आयोजन की बात करते हैं तो जिस समय की यह खबर थी उस समय सहारा समय के छत्रपति, लाइव इण्डिया के आलोक, आज तक के आशीष ही मौजूद थे। जिस आयोजन गुरु की तरफ आपका इशारा है, वह वहां नही था। मै भी इस खबर का गवाह हूं और मेरे कैमरे में भी वह सब रिर्काड है। सीपीआरो की बाइट भी है जिसमें वह कहते हैं कि उन्हें बाद में पता चला।

यशवन्त जी, 25 साल से मैं भी इसी फील्ड में घिस रहा हूं। आपकी साइट भी पढ़ता हूं। जिस आयोजन गुरु की आप बारबार बात करते हैं, उससे बोलता भी नही हूं, लेकिन जो सच है, वह सच है। आपको यह सोचना चाहिए कि क्यों एक आदमी की ही बात हो रही है! अरे यहां तो आयोजन गुरुओं की भरमार है। निगेटिव आयोजन और पाजटिव आयोजन। चोरी थोड़ी हो या ज्यादा, होती चोरी ही है। अगर एक बड़े चैनल का रिपोर्टर आता है और और अपने लाइव प्रसारण के लिए गाने की मण्डली को बुलवा कर घन्टों गाना बजाना कराता है और कहता है कि प्रयाग में यहां यह चल रहा है तो क्या यह आयोजन नही है। हां, खबर बनाने के लिए उल्टी बाइट लेना और जो वास्तविकता न हो उसे भी सही बताना, यह गलत है। किसी सही खबर को आप स्वार्थवश या आपके आदमी स्वार्थवश उसे भी आयोजन बताने लगेंगे तो यह पत्रकारिता के लिए सबसे खराब बात होगी। मै अल्पज्ञ हूं और मुझे आशा है कि जरूर बताएं कि आयोजन क्या होता है या आप किस-किस को आयोजन मानते हैं!

मुझे आशा है कि खबर न पाने की हताशा और विज्ञापन के खेल में या तो आप पड़े नहीं, या पड़ें तो एकतरफा न हों, नहीं तो आपके पोर्टल की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगेगा। यहां तो आपके पोर्टल का नाम लेकर लोगों को धमकाया जाता है, ऐसा लगता है कि आपकी दोस्ती भारी है कंटेंट पर।

वीरेन्द्र पाठक

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जवाबी पत्र : वीरेंद्र भाई, आपके दोनों पत्रों को पढ़ा। आपने कई जिनुइन बातें कहीं हैं। आपने इतना सब कुछ साफ-साफ कहा, इसके लिए आपके प्रति दिल से आभार। जो भी लोग खुलकर बाते करते हैं, लिखते हैं, उन्हें दिल से चाहता हूं, यकीन करें। भड़ास4मीडिया कमियों से मुक्त है, ऐसा कतई नहीं है। गलतियां आप लोगों से भी होती हैं और हम लोगों से भी। गल्ती स्वीकारना और उसे सुधारना सबसे बड़ी चीज होती है। आपने कई जिनुइन प्वाइंट्स की ओर इशारा किया है। इसको मैं दिखवाता हूं। आपके पत्र के बाद खुद मैं निजी स्तर पर इसकी जांच करा रहा हूं। अगर लगा कि हम कहीं गलत हैं तो खबर को फिर संपादित कराऊंगा, और जरूरी हुआ तो अनपब्लिश करा दूंगा, ये मेरा वादा है।

भड़ास4मीडिया की खबरों के सूत्र, सोर्स आप जैसे साथी ही हैं। कई बार लोग पोर्टल का बेजा इस्तेमाल कर ले जाते हैं पर इस बारे में जब ध्यान दिला दिया जाता है तो हम लोग खुद को तुरंत दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर देते हैं। आपके दोनों पत्रों को प्रकाशित करने का भी मकसद यही है कि अगर हम लोगों ने जो खबर पब्लिश की, उसमें कहीं कोई त्रुटि व कमी रह गई हो तो वह दूसरे पक्ष के पत्र से ठीक हो जाए।

आपने सारी बातें कह दी हैं। इन बातों में आपका दुख, गुस्सा, प्यार, विश्वास सब झलका रहा है।

आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिए। पत्रकार किन्हीं भी तनावों से नहीं टूटता, मैं ऐसा मानता हूं। आप तो 25 वर्ष से इस पेशे में हैं। जाहिर है, आप मुझसे बड़े हैं और अनुभवी भी। आपने बहुत सारे तनाव झेले होंगे और उससे उबरे होंगे।

आपकी बातों को हम लोग जरूर ध्यान में रखेंगे।

कभी इलाहाबाद आना होगा तो जरूर मिलूंगा।

आभार के साथ

यशवंत

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