हिन्दी दिवस पर तोहफा, 'कथादेश' ऑनलाइन

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कथादेश के आनलाइन संस्करण के उदघाटन के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का एक दृश्य

हिन्दी साहित्यिक पत्रिकाओं में अग्रणी ‘कथादेश’ को पाठक अब इंटरनेट पर भी पढ़ पाएंगे। www.HindiLok.com की पहल पर कथादेश ऑनलाइन हो गई। आगरा के केंद्रीय हिन्दी संस्थान के नज़ीर सभागार में कथादेश के ऑनलाइन संस्करण का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सेंट जोंस कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष (हिन्दी) श्री भगवान शर्मा ने कंप्यूटर पर एक क्लिक के साथ इसे लोकार्पित किया। हालांकि, ‘कथादेश’ का मीडिया विशेषांक भी हिन्दीलोक डॉट कॉम पर उपलब्ध था, लेकिन औपचारिक तौर पर इसकी शुरुआत सितंबर अंक के साथ की गई है।

इस अवसर पर श्री भगवान शर्मा ने कहा कि इंटरनेट के जरिए हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार तेजी से संभव है, और साहित्यिक पत्रिका ‘कथादेश’ का ऑनलाइन होना एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा को राजभाषा बनाने के लिए गंभीर कोशिशें नहीं हुई हैं, लेकिन हिन्दी का धीरे धीरे प्रसार हो रहा है, और आम लोगों को हिन्दी के प्रति संकल्प लेने की आवश्यकता है। हिन्दी लोक डॉट कॉम पोर्टल पर कथादेश की शुरुआत के बाबत इसके संचालक प्रतीक पांडे ने कहा कि इंटरनेट पर हिन्दी के प्रचार के लिए बहुत कोशिशें हो रही हैं,और हिन्दीलोक डॉट कॉम उन्हीं में से एक हैं। प्रतीक ने कहा, कथादेश के जरिए देश-दुनिया के लोग निशुल्क इस साहित्यिक पत्रिका का आनंद ले सकेंगे। और जल्दी ही वो साइट पर रंगमंच, फिल्म आदि से जुड़ी गंभीर सामग्री साइट पर पाएंगे। इस अवसर पर कथादेश के संपादक हरिनायरण ने कहा कि हिन्दी लोक की यह पहल उम्मीद जताती है कि आगे भी बेहतर साहित्य ऑलनाइन पाठकों के लिए उपलब्ध होगा।

इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए हिन्दी नेस्ट की संपादक मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हिन्दी में स्तरीय साहित्य का अभाव है,और कथादेश इस कमी को पूरा कर सकती है। उन्होंने कहा, इंटरनेट पर तमाम तकनीकी दिक्कतों के बावजूद अब हिन्दी दयनीय नहीं है,लेकिन हिन्दी के विद्वानों और सुधि लोगों को अब तकनीक को लेकर जागरुर होना होगा। उन्होंने सवाल किया, लोग हिन्दी के प्रचार प्रचार के लिए बड़ी बड़ी बातें करते हैं,लेकिन क्या इसके प्रचार के लिए इंटरनेट से बेहतर कोई साधन हो सकता है। लेकिन, हिन्दी के विद्वान लोग इस बारे में गंभीरता से विचार नहीं करते। हिन्दी भाषा को बाजार की जरुरत बताते हुए बृज खंडेलवाल ने कहा कि नयी तकनीकी ने हिन्दी को इंटरनेट पर सहज-सुलभ बना दिया है और हिन्दी लोक डॉट कॉम जैसे पोर्टल इसे और आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने बृज भाषा से जुड़े बुद्धिजीवियों से साइट पर कंटेंट देने की अपील की ताकि वो लाखों लोगों तक पहुंच सके।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार हर्षदेव ने हिन्दी साहित्य की इंटरनेट पर उपस्थिति को वर्तमान समय की जरुरत बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय हिन्दी संस्थान के कुलसचिव चंद्रकांत त्रिपाठी ने इस सार्थक पहल का स्वागत करते हुए देश के बीस करोड़ निरक्षर लोगों को भी इस माध्यम से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। हिन्दीलोक डॉट कॉम की इस पहल का कई हिन्दी साहित्यकारों ने स्वागत किया है, और इस कार्यक्रम में शिरकत न कर पाए कई साहित्यकारों के शुभकामना संदेश पीयूष ने पढ़े। इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक दिनेश शांडिल्य के बांसुरी वादन से हुई। कार्यक्रम का संचालन इप्टा के राष्ट्रीय सचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने किया। इस मौके पर मधुमोद के रायजादा, कलिका जैन, अश्निनी पालीवाल जैसे तमाम गणमान्य लोग मौजूद थे।


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