'मीडिया को सिर्फ हीरो-हीरोइन से मतलब'

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अंजन श्रीवास्तव‘वागले की दुनिया’ के वागले साहब उर्फ अंजन श्रीवास्तव आपको याद हैं? दूरदर्शन के इतिहास में ‘मील का पत्थर’ साबित हुए इस धारावाहिक के नायक वागले साहब उर्फ अंजन श्रीवास्तव आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘व्हाट्स योर राशि’ के जरिए फिर मुखातिब हैं। भड़ास4मीडिया से संक्षिप्त बातचीत के दौरान अंजन मीडिया के प्रति अपनी नाराजगी छिपा न सके। उन्होंने अफसोस जताया कि मीडिया  में चरित्र अभिनेताओं के काम को तवज्जो नहीं दिया जाता। सुभाष घई की फिल्म 'युवराज' चली नहीं लेकिन इस फिल्म में मुख्य विलेन का दमदार रोल निभाने वाले अंजन कहते हैं कि मीडिया ने मेरे काम को नोटिस नहीं लिया।

सभी फिल्में टिकट खिड़की पर नहीं चलती हैं। मीडिया की यह जिम्मेदारी है कि वो अच्छे काम की सराहना करे। दर्शकों को उनके बारे में बताए। अंजन कहते हैं कि फिल्मों से जुड़े विवाद को मीडिया बहुत उछालता है। कई बार विवाद होते ही नहीं है, लेकिन मीडिया हवा देता है, लेकिन अच्छे काम को लेकर कोई सुगबुगाहट तक नहीं होती। अगर कलाकार के अच्छे काम को नोटिस ही नहीं किया जाएगा, तो उसके अंदर की बेचैनी-छटपटाहट खत्म हो जाएगी। मीडिया को इस ओर ध्यान देना चाहिए। कभी-कभी तो लगता है कि मीडिया को सिर्फ हीरो-हीरोइन और फिल्म से जुड़े विवाद से मतलब होता है। 'युवराज' में मेरे काम तारीफ निर्देशक ने जमकर की, लेकिन लोगों को कुछ नहीं मालूम। मीडिया में इस बारे में जिक्र ही नहीं हुआ।

'वागले की दुनिया' से पहचान बनाने वाले अंजन मानते हैं कि कई फिल्में करने के बावजूद उन्हें पहचान वागले के किरदार की वजह से मिली। अंजन के मुताबिक- मैं 20 साल से ज्यादा वक्त से फिल्मों में सक्रिय हूं। शाहरुख के साथ मैंने 'कभी हां कभी ना' जैसी फिल्म में काम किया तो आज हरमन के साथ भी काम कर रहा हूं। राजकुमार संतोषी से लेकर सुभाष घई और आशुतोष गोवारिकर जैसे तमाम बड़े निर्देशकों के साथ काम किया। लेकिन, मुझे पहचाना आज भी वागले के किरदार की वजह से जाता है। इसका मतलब यही है कि फिल्मों में चरित्र अभिनेता का होना भले जरुरी है, लेकिन उसकी कोई कद्र नहीं करता। खासकर मीडिया चरित्र अभिनेताओं के काम को तो कोई तवज्जो नहीं देता।

'व्हाट्स योर राशि' में अपनी भूमिका के बारे में अंजन कहते हैं कि यह एक फेमिली ड्रामा है, जिसमें मेरी भूमिका फैमिली के हेड की है। भरत भाई नाम का किरदार निभाया है मैंने। हरमन बावेजा ने मेरे बेटे की भूमिका निभाई है। पारिवारिक उलझनों के चलते भरत भाई अपने बेटे पर शादी के लिए दबाव डालता है, और इसी कड़ी में हरमन 12 राशियों की 12 लड़कियों से मुलाकात के बाद अपने लिए पत्नी चुनता है। चक दे इंडिया में अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए अंजन एक प्रसंग सुनाते हैं। चक दे इंडिया का लॉस एजेंल्स में जब प्रीमियर हुआ तो फिल्म देखने के बाद दर्शक मुझे यानी मेरे किरदार को गाली देने लगे। ये कहते हुए कि ऐसे लोगों की वजह से ही भारतीय खेल बर्बाद हो चुका है।

भविष्य के बारे में अंजन कहते हैं कि उन्हें इंतजार है अमिताभ बच्चन की 'तीन पत्ती' का। इसमें अंजन ने यूनिवर्सिटी में गणित विभाग के हेड का रोल निभाया है और अमिताभ उनके जूनियर हैं। इस फिल्म में भी अंजन का नगेटिव किरदार है।


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