कलर्स को 'ना आना इस देश लाडो' के लिए नोटिस

E-mail Print PDF

बिग बास-3 वाली नोटिस का अभी तक जवाब नहीं आया- अंबिका सोनी : केंद्र सरकार ने 'कलर्स' चैनल को कड़ी फटकार लगाते हुए उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा है कि अगर उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमन कानून 1995 का उल्लंघन जारी रखा तो उसका लाइसेंस रद कर दिया जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज कलर्स चैनल पर प्रसारित टेलीविजन धारावाहिक 'ना आना इस देश लाडो' में एक जिलाधिकारी की नकारात्मक छवि पेश करने के मामले को लेकर चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि अगर उसने 15 दिन के भीतर समुचित जवाब नहीं दिया तो उसे कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा।

नोटिस में कहा गया है कि इस बात से इंकार नहीं है कि किसी सरकारी अधिकारी की नकारात्मक भूमिका को एक सीमा के भीतर दिखाना सृजनात्मक माध्यम का अधिकार है लेकिन जानबूझकर जिला स्तर पर सरकार के प्रतिनिधि की छवि को बदनाम करना सार्वजनिक संस्थान की छवि को धूमिल करना है और ऐसा किया जाना केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमन कानून का उल्लंघन है। नोटिस में कहा गया है कि कलर्स चैनल को 12 जून 2008 को जिन शर्तों एवं मानदंडों के आधार पर अनुमति दी गई थी, उनका पालन करना उसके लिए आवश्यक है। मंत्रालय ने नोटिस में कहा है कि पूरे धारावाहिक में जिला अधिकारी की छवि को नकारात्मक दिखाया गया है। उसे न केवल भ्रष्ट बल्कि अनेक औरतों के साथ संबंध रखने वाला दिखाया गया है। धारावाहिक की एक किस्त में तो महिलाओं को उसके साथ परेड करते हुए दिखाया गया है। इस धारावाहिक के जरिए जिला प्रशासक की छवि को बदनाम करने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि कलर्स चैनल को पहले भी तीन कारण बताओ नोटिस तथा दो परामर्श भेज चुका है। जारी किए जा चुके हैं।

'बिग बास' और 'बालिका वधू' जैसे कार्यक्रमों के प्रसारण के कारण विवादों में आए कलर्स चैनल ने इस सप्ताह के आरंभ में बिग बास को लेकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से भेजे गए नोटिस का जवाब अब तक नहीं भेजा है। यह जानकारी दी सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने। उन्होंने दिल्ली में क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय की स्वर्ण जयंती समारोह के मौके पर भारतीय जनसंचार संस्थान में आयोजित एक समारोह के दौरान संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कलर्स चैनल को नोटिस भेजे जाने को सही बताते हुए कहा कि बिग बास 3 को एक अंतरमंत्रिमंडलीय समिति ने भी देखा और इस चैनल के कई दृश्यों को लेकर आपत्तियां जताई। इस समिति में सदस्य महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं अन्य मंत्रालयों से जुड़े हैं।


AddThis