जिस ओम पुरी को आप नहीं जानते

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आलोक तोमरओम पुरी पंद्रह नवंबर को दिल्ली आ रहे हैं। फोन करके उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के ठहरने का इंतजाम रेडीसन होटल में हैं मगर वे मेरे पास ठहरेंगे। तो क्या वे अपनी पत्नी नंदिता का सामना नहीं करना चाहते? उनके बारे में लिखी गई नंदिता की किताब का विमोचन एक भव्य समारोह में होगा और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल उसके कुछ पन्नों का पाठ भी करेंगे। कपिल सिब्बल की आवाज बहुत कड़क हैं और उस आवाज में नंदिता की शानदार अंग्रेजी सुनना कम कमाल का नहीं होगा। वहां ओम पुरी भी मंच पर रहेंगे और पूरी उम्मीद है कि कपिल सिब्बल उनके स्त्री प्रसंगों वाले अध्यायों का पाठ नहीं करेंगे। वैसे कपिल सिब्बल खुद भी काफी रसिया हैं मगर फैसला नंदिता को करना है। नंदिता कह रही हैं कि वे खाना खाने घर आएंगी। उनका स्वागत है मगर अपन भी पति-पत्नी के बीच आतिशबाजी देखने के लिए तैयार हैं। आखिर ओम पुरी मामूली आदमी नहीं है। बहुत छोटे से गांव से निकल कर लंदन में सर बनने तक और हॉलीवुड के सितारों की बराबरी करने तक ओम पुरी ने एक लंबा सफर किया है। उनकी जिंदगी में स्त्री प्रसंग से ज्यादा बहुत कुछ है। एक बार जब मुंबई में उनके त्रिशूल अपार्टमेंट गया तो दरवाजा खोलते ही उन्होंने फिर से लिफ्ट में बिठाया और नीचे पार्किंग में ले गए। उन्होंने मारुति-1000 मॉडल की गाड़ी खरीदी थी।

उसमें बिठाया और एक लंबा चक्कर लगवा कर लाए और इस चक्कर में एक कहानी भी सुनाई। 'अर्ध सत्य' हिट हो गई थी और निर्माता ने पहले तो ओम पुरी को सिर्फ पचास हजार रुपए दिए थे मगर लाभ में साझेदारी करने के इरादे से उन्होंने ओम पुरी को एक लाख रुपए और दिए। आखिर वे फिल्म के नायक थे। ओम पुरी ने बताया कि वे जेब में पैसे डाल कर सीधे दादर स्टेशन पहुंचे और पुणे रवाना हो गए जहां सेकेंड हैंड कारों का मेला लगता था।

ओम पुरी ने अपनी पहली पुणे से खरीदी। अच्छे खासे मैकेनिक रह चुके थे इसलिए ठोक बजा कर सिर्फ पैंतीस हजार में खरीदी। ये कार फिएट की थी। इसके बाद शान से कार चलाते हुए वे मुंबई आए और पैतीस हजार की कार के जश्न में पांच हजार रुपए खर्च कर के पार्टी की। तब तक वे एक चाल में किराए पर रहते थे। उसके बाद तो ओम पुरी के पास कारों के नए मॉडल आते गए। बरसोवा में त्रिशूल अपार्टमेंट में सातवीं मंजिल पर पेंट हाउस खरीदा, वहां अच्छा खासा बागीचा लगाया और तीन कछुए पाले। अक्सर घर में पार्टी होती थी और उस पार्टी के दौरान कछुओं की पीठ पर मोमबत्ती जला दी जाती थी और कछुए घूमते रहते थे।

ऐसी ही एक पार्टी में जावेद अख्तर, राजकुमार संतोषी, अनुपम खेर और उस समय सिर्फ फाइटर स्टार के तौर पर मशहूर अजय देवगन भी हुआ करते थे जिन्हें ओम पुरी अब मजाक में अपना समधी कहते हैं क्योंकि ओम पुरी का कुत्ता अजय की पालतू कुतिया से प्यार करता है। इस पार्टी में स्टीरियो बाहर रख कर कुमार गंधर्व के भजन लगाए। ओम पुरी की शास्त्रीय संगीत में कोई खास गति नहीं हैं मगर मुग्ध हो कर उन्होंने कहा कि भीमसेन जोशी कितना अच्छा गा रहे हैं। उनकी तत्कालीन पत्नी और हमारी तत्कालीन दोस्त सीमा कपूर ने सबके सामने कहा कि किस अनपढ़ और गंवार से मेरी शादी हो गई है जिसे भीमसेन जोशी और कुमार गंधर्व में फर्क नहीं मालूम। ओम पुरी अचानक उठे और जब देर तक नहीं आए तो अंदर जा कर देखा तो बेडरूम में फूट फूट कर रो रहे थे। फिर मुंह धो कर बाहर आए और सफल अभिनेता की तरह हंसी मजाक में शामिल हो गए।

यहां एक और किस्सा सुनाना जरूरी लगता है। नंदिता ने ओम के स्त्री प्रसंगों के बारे में चाहे जो लिखा हो मगर स्त्री के प्रति आदर ओम पुरी में हमेशा रहा है। एक बार ओरछा के होटल में मेरी पत्नी सुप्रिया को चाणक्य सीरियल से मशहूर चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने मेरी मौजूदगी में फिल्म की हीरोइन बनाने का प्रस्ताव दिया था और उठते हुए यह भी कह दिया था कि रात को अकेले कमरे में आना और वहां बात करेंगे। मतलब साफ था। ओम पुरी को यह कहानी बताई तो वे इतने आवेश में आए कि उन्होंने चंद्र प्रकाश को फोन लगा कर उनकी आंसरिंग मशीन पर हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में जो धारावाहिक गालियां सुनाई तो चंद्र प्रकाश आधी रात को ही घर पर पहुंच कर चरणों में गिर पड़े। उस समय चंद्र प्रकाश एक धारावाहिक में ओम पुरी को नायक बनाना चाहते थे। अनुबंध हो चुका था मगर ओम पुरी ने वह अनुबंध फाड़ कर चंद्र प्रकाश के हाथ में रख दिया। दो थप्पड़ लगाए सो अलग।

ओम पुरी की जिंदगी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य सीमा कपूर रही हैं जिन्होंने पति-पत्नी के रिश्ते का कभी आदर नहीं किया। ये सही है कि ओम पुरी ने अपना अकेलापन बहुत सारी औरतों के साथ बांटा मगर उन्होंने वेश्यावृत्ति नहीं की। जिन महिलाओं को साथ रखा, उनका पूरा आदर किया और सामाजिक तौर पर सबसे परिचय कराया। मगर सीमा सुंदर हैं और अपने आपको परम बुद्धिजीवी समझती रही हैं इसलिए उन्होंने ओम पुरी को जूते के नोक पर रखा। वे अक्सर कहा करती थी कि तुम्हे रिक्शे वाले और हवलदार थानेदार जैसे रोल ही मिल सकते हैं। बाद में जब रिश्ता टूटा तो सीमा ने राजस्थान में बहुत सारी जमीन, मुंबई में एक फ्लैट और अनाप शनाप रकम वसूली। मुझे लगता है कि नंदिता को ओम पुरी और सीमा के इस अभागे रिश्ते पर भी लिखना चाहिए था।

चलते चलते ओम पुरी की एक और बात। एक फिल्म की कहानी दिमाग में थी और फिल्म चंबल घाटी पर बननी थी। बात बात में यह कहानी महेश भट्ट को सुनाई और उन्हें बहुत पसंद आई। हालांकि महेश भट्ट ने उस पर कभी फिल्म नहीं बनाई मगर ओम पुरी को जब यह कहानी और महेश भट्ट प्रसंग बताया- ये तब की बात है जब मैं केबीसी लिख रहा था- तो ओम पुरी ने बॉलीवुड का एक सूत्र वाक्य दिया। उन्होंने कहा कि कहानी तो दूर, मुंबई में किसी को स्टोरी आइडिया भी नहीं बताना चाहिए। फटाक से चोरी होती है और फिल्म सिटी में स्क्रिप्ट राइटर घूमते रहते हैं। अपन को फिल्में नहीं लिखनी थी सो मुंबई में नहीं टिके।

एक और किस्सा याद आता है। बहुत साल पहले सिर्फ सात हजार रुपए में मॉरिस माइनर नाम की एक पचास साल पुरानी कार खरीदी। उसमें सिर्फ चार लोग घूमे थे। एक ओम पुरी, एक प्रभाष जोशी, एक राहुल देव और एक सिंगापुर चले गए हमारे पत्रकार दोस्त राहुल पाठक। काम चलाऊ ड्राइविंग आ गई थी। शादी के दौरान ओम पुरी ने दिल्ली से एक मारुति वैन खरीदी और मेरे हवाले कर दी कि इसे झालावाड़ ले आना। तब तक मैंने जिंदगी में सौ किलोमीटर तक भी कार नहीं चलाई थी। फिर भी भगवान भरोसे कार उठाई और एक सांस में जयपुर तक भगा ले गया। रात जयपुर में बिताई और अगले दिन झालावाड़। तब तक ड्राइवरी लाइसेंस भी नहीं था। ओम पुरी ने अपनी शैली में इसका नाम दिया। उन्होंने एक चेक काट दिया डेढ़ लाख रुपए का और कहा कि दिल्ली जा कर मारुति 800 खरीद लेना। वह चेक आज तक मेरे पास वैसे ही सुरक्षित है जैसे ओम पुरी ने पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट की केंटीन का उधार का बिल फ्रेम करवा कर रखा हुआ है। उन्हें अपने गरीबी के दिन याद हैं।


हिंदी पत्रकारिता के चर्चित नाम लेखक आलोक तोमर अपने बेबाक व स्पष्टवादी लेखन के लिए मशहूर हैं.


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