ठगी का नया तरीका है इंटरनेट पर टीवी!

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पत्रकारिता की आड़ में धंधा करने वालों को अब ठगी का नया तरीका मिल गया है और यह तरीका है इन्टरनेट पर ख़बरों का. इन्टरनेट के विस्तार के साथ-साथ ही देश और दुनिया की खबरें भी अब आसानी से इन्टरनेट पर मिलने लगी हैं लेकिन इन्टरनेट की इस खासियत को कुछ लोगों ने प्रभाव ज़माने और कमाई करने का जरिए बना लिया है. ताज्जुब की बात है कि इस पर अभी तक सूचना और प्रसारण मंत्रालय की नजर नहीं गयी है और दर्जनों लोग इन्टरनेट पर डोमेन बुक करवा कर न सिर्फ प्रेस के कार्ड जारी कर रहे हैं बल्कि अपने माइक आई.डी. लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पहुंच जाते हैं. इन्टरनेट पर चलने वाले टी.वी. चैनलों के मालिक पैसे लेकर माईक आई.डी. और प्रेस कार्ड उन लोगों को जारी कर रहे हैं जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. प्रेस कार्ड और माईक आईडी लेकर घुमने वाले ऐसे लोग मीडिया में ही कुछ लोगों के साथ सेटिंग कर लेते हैं और उनसे ही खबर की कॉपी लेकर भेजते हैं. ऐसे चैनल्स की ख़बरों के प्रोडक्शन का स्तर देख कर लोकल चैनल को भी शर्म आ जाये.

बेल्जियम आधारित एक ऐसा ही इन्टरनेट टी.वी. चैनल पंजाब की खबरें "महक पंजाब दी" टीवी के नाम से प्रसारित कर रहा है. इस इन्टरनेट टी.वी. की खबरें दोयम दर्जे की होती हैं और पंजाब के विभिन्न जिलों में इस इन्टरनेट टी.वी. के पत्रकार अपनी गाड़ियों पर प्रेस लिखवा कर धडल्ले से घूम रहे हैं और शान से प्रेस कांफ्रेंस में आते हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की सिर्फ इन्टरनेट पर एक डोमेन अपने नाम बुक करवा लेने भर से इन्हें "प्रेस" शब्द का प्रयोग करने की मंजूरी मिल जाती है? क्या कोई भी आम आदमी जिसका दूर-दूर से पत्रकारिता से वास्ता नहीं है, सिर्फ एक टी.वी. या अख़बार के नाम से डोमेन लेकर पत्रकारिता का ठेकेदार बन जायेगा और प्रेस कार्ड जारी करने लगेगा?

'महक पंजाब दी' ऐसा अकेला चैनल नहीं है. कई और चैनल भी कतार में हैं और जिसे पत्रकारिता की थोड़ी भी समझ है वह ऐसा डोमेन लेकर ही अपनी खबरें चलाने के लिए आतुर है. सूचना और प्रसारण मंत्रालय से अख़बार या टी.वी. का लाइसेंस लेने की बजाय अब लोगों को इन्टरनेट कमाई का आसान साधन लग रहा है ...हालांकि देश भर में विभिन्न अख़बारों और न्यूज़ चैनल्स ने भी अपने-अपने डोमेन बना रखे हैं और वीडियो कंटेंट इन्टरनेट पर डाला जा रहा है लेकिन इन चैनल्स या अख़बारों के पास प्रसारण सम्बन्धी अधिकार तो है. ये चैनल या अख़बार लघभग वही कंटेंट वेबसाइट पर डालते हैं जो अख़बार या चैनल में प्रसारित होता है लेकिन देश-विदेश में बेठे लोग सिर्फ इन्टरनेट पर एक डोमेन बुक करवा कर खबरें किस हैसियत से चला रहे हैं? सूचना प्रसारण मंत्रलय को जल्द ही इस सम्बन्धी कोई न कोई नीति तैयार करके इसे या तो कानूनी दर्जा देना चाहिए या महज डोमेन बुक करवा कर "प्रेस" शब्द के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए ताकि असल पत्रकारों की इमेज ऐसे पत्रकारों के कारण खराब न हो.

जालंधर से एक पत्रकार का पत्र


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