यह गोरखधंधा नहीं, टीवी है भाई !

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ना तो ऐसा कोई कानून है और ना ही ऐसी कोई नीति, जिसके जरिए इंटरनेट पर टीवी के जरिए खबरों को दिखाए जाने पर एतराज किया जाना चाहिए। और जिनको एतराज है, उनको अपना एतराज जताने से पहले यह ज्ञानवर्द्धन कर लेना चाहिए कि इंटरनेट पर अपनी एक साइट या पोर्टल बनाकर जिस तरह से न्यूज पेश की जाती है, ठीक उसी तरह से अब साइट या पोर्टल पर टीवी की तरह खबरें भी परोसी जाने लगी है। यह भी मीडिया का ही एक अंग है। अखबारों और पत्रिकाओं में छपी हुई खबरें पढ़ी जाती हैं, उसे हमारी जुबान में प्रिंट कहते है। यह टीवी है, जहां खबरें बोलते हुए दिखाई और पढ़ाई जाती हैं। और यह वेब है।

वेब यानी इंटरनेट, जहां प्रिंट का मौन संसार भी है और टीवी का बोलता हुआ बाजार भी। इस पर खबरें पढ़ी जा सकती हैं और टीवी खोलकर देखी भी जा सकती है। कुछ लोगों को इस नए माध्यम पर बड़ा एतराज है। यह एतराज खालिस नासमझी के अलावा कुछ भी नहीं माना जाना चाहिए। यह ठीक वैसा ही एतराज है, जैसे कोई यह कहे कि सिर्फ उन्हें ही अखबार माना जाना चाहिए, जो स्टॉल पर बिकते हैं या फिर सुबह - सुबह हॉकर घर पर डाल जाता है। डाकिये के जरिए आपके और हमारे घरों में पोस्ट से आनेवाले साप्ताहिक और पाक्षिक क्या अखबार नहीं है ?

इसलिए हुजूर, ये जो इंटरनेट पर टीवी है ना, यह भी टीवी ही है। वे टेलीविजन सेट पर चैनलों के जरिए खबरें दिखाते हैं। और यहां कंप्यूटर पर इंटरनेट के जरिए खबरें मिलती हैं। सो, इंटरनेट पर टीवी कोई ठगी का तरीका नहीं है। यह भी खबरें देने का ही धंधा है। ठीक वैसा ही, जैसा आप और हम सब किसी एक टीवी सेट में देखते हैं। खबरें पहुचाने का यह बिल्कुल वैसा ही तरीका है, जैसा आप और हम सब, पहले सीधे सेटेलाइट, फिर केबल और उसके बाद डीटीएच यानी डायरेक्ट टू होम डिश के जरिए टीवी देखते रहे हैं।

इंटरनेट अब नया जरिया है, जिस पर भी टीवी देखा जा सकता है। यह आम आदमी तक देश और दुनिया की खबरें पहुंचाने का नया तरीका है। वैसा ही, जैसे बाकी माध्यम है। इंटरनेट पर भी टीवी दो तरीकों से देखा जा सकता है। एक तो कंप्यूटर में और एक साधा टीवी सेट में। इसका नाम है आईपीटीवी, यानी इंटरनेट प्रोटोकोल टेलीविजन। हमारी जिंदगी में सूचना तकनीकी का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है, उससे भी ज्यादा तेजी से सूचनाओं के आदान प्रदान के तरीके भी विकसित हो रहे हैं। जो लोग नहीं जानते, या जो लोग कम जानते हैं या फिर वे लोग जो सिर्फ परंपरागत प्रिंट और नए पैदा हुए टीवी को ही मीडिया मान बैठे हैं, उनकी जानकारी के लिए यह बता देना जरूरी है कि आईपीटीवी बाकायदा भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा भी चलाया जाता है। यह ब्रॉड़बैंड के जरिए आप और हम तक आता है। भारत सरकार ने आईपीटीवी का देश भर में जोरदार प्रचार किया है और अगर अपने बीएसएनएल या एमटीएनएल के बिल को ध्यान से देखेंगे तो उस पर भी आईपीटीवी का भरपूर विज्ञापन किया हुआ देखा जा सकता है। आप उस पर खबरें दिखाइए, मनोरंजन पेश कीजिए या फिर कुछ और।

आईपीटीवी बाकायदा मीडिया है, और उसके मीडिया होने पर जिसको भी एतराज है, उनको अपने ज्ञान का संसार विकसित करना चाहिए। वह ठीक वैसा ही एतराज है, जैसा 10 साल पहले प्रिंट के कुछ लोगों को टीवीवालों के अपने आपको पत्रकार बताने पर था। अपन 15 साल इंडियन एक्सप्रेस जैसे संस्थान के प्रिंट से टीवी होते हुए आजकल वेब पर भी हैं। सो अनुभव सुनाने के लिए दिल पर हाथ रखकर यह स्वीकार करने में भी अपने को कोई हर्ज नहीं हैं कि बहुत सारे प्रिंटवाले आज भी टीवीवालों को पत्रकार नहीं मानते और कोई बहुत सम्मान की नजर से नहीं देखते। पर, माध्यम तो माध्यम है। यह कोई आपके और हमारे एतराज पर तो खड़ा नहीं। कि आप मानेंगे तो ही उसकी हैसियत बनी रहेगी। और आप खारिज कर देंगे तो उसकी हस्ती ही मिट जाएगी। जिस तरह सेटेलाइट के जरिए हम टीवी देखते हैं, वे सारे चैनल आईपीटीवी पर उपलब्ध हो सकते हैं। जो केबल ऑपरेटर हमको घर बैठे बाकी सारे चैनलों के साथ अपना एक इलाकाई या कस्बाई न्यूज बुलेटिन भी दिखाते हैं, उन्ही की तरह आईपीटीवी प्रोवाइडर भी अपने अलग न्यूज बुलेटिन या न्यूज चैनल दुनिया भर में दिखाते हैं।

अब भारत में भी इंटरनेट पर न्यूज और व्यूज के बुलेटिन और प्रोग्राम दिखने लगे हैं। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। स्वागत नहीं भी करें तो कोई बात नहीं। लेकिन इंटरनेट पर न्यूज टीवी को खबरों का गोरखधंधा कहकर इसको खारिज नहीं करें। क्योंकि भारत में यह नया है, इसलिए आप भले ही नहीं जानते, लेकिन जानने वाले यह अच्छी तरह जानते हैं कि सारे ही विकसित देशों में इंटरनेट पर न्यूज टीवी भरपूर चल रहा है और इतना चलता हैं कि सरकारें तक उनसे डरती हैं। आप लिख के रखिए, थोड़ा सा विकसित होने दीजिए, अपने यहां भी इंटरनेट पर टीवी धड़ल्ले से चलेगा। अपन जिंदा रहे, तो जरूर आपको याद दिलाएंगे।  


लेखक निरंजन परिहार वरिष्ठ पत्रकार हैं.


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Comments (2)Add Comment
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written by gautam, January 15, 2010
bhai निरंजन परिहार ji aapne sahi likha h. aasha h isbare me or vistar se btai to jyada thik ho ga.
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written by Jaydeep Shukla, January 15, 2010
Niranjan Sir, Ye print wale apne alaava kisi ko bhi patrakar samaz hi nahi sakte, aapne bilkul sahi likha hai ki ye media ka vistar hai. Ye naya media hai, in logo ke bheje me jaldi nahi utrega.

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