बी4एम में ये चेंज आपको कैसा लगा?

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दोस्तों-मित्रों, वरिष्ठों, कनिष्ठों.... आज मकर संक्रांति के दिन से भड़ास4मीडिया में बदलाव महसूस हो रहा होगा. कुछ नई चीजें जोड़ी गई हैं. अभी तक भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित खबरों और आलेखों पर कमेंट करने का आप्शन नहीं रखा गया था. वजह सिर्फ एक कि कमेंट आप्शन का कई लोग दुरुपयोग करते हैं. इसके जरिए अपनी कुंठा और भड़ास निकालते हैं. कुंठा और भड़ास निकालें, लेकिन मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अपनी असली आइडेंटिटी के साथ कुंठा और भड़ास निकालें. अगर आप पहचान छुपा कर ही कुछ कहना चाहते हैं तो ऐसी बात कहें जिससे दूसरों का भला हो, दूसरों का दिल खुश हो जाए. या फिर ऐसी बात जिससे नई जानकारियां सामने आ रही हों. ये मेरा निजी मत है. अनाम कमेंटों के जरिए हिंदी ब्लागिंग में जिस तरह से तमाम लोगों के उपर कीचड़ उछालने का चलन रहा है.

भड़ास4मीडिया पर हर खबर और लेख के बाद आपको कमेंट करने के लिए मौका मिलेगा.

संभवतः उसी भय से और उस नकारात्मकता से भड़ास4मीडिया को बचाने के लिए कमेंट आप्शन नहीं रखा गया था. पर समय के साथ, हिंदी पाठकों के मेच्योर होते जाने की प्रवृत्ति को देखते हुए, भड़ास4मीडिया के पाठकों की जबर्दस्त डिमांड के चलते कमेंट आप्शन को शुरू किया जा रहा है. अनुरोध है कि हम हिंदी वाले कमेंट की सुविधा का इस्तेमाल किसी के निजी जीवन पर कीचड़ उछालने के लिए न करें. तभी इस कमेंट के आप्शन का लाभ है वरना हम कमेंट आप्शन के जरिए अंतहीन निजी झगड़ों में उलझ जाएंगे.

जीवंतता के लिए भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित खबरों की हेडलाइन का रंग बदल दिया गया है.

दूसरा बदलाव किया गया है रंग का. इस पोर्टल पर खबरों की हेडिंग, लिंक आदि अब संतरे (ओरेंज) के रंग का होगा. अभी तक नीला हुआ करता था. हो सकता है कि रंग का यह बदलाव कई लोगों को खटके क्योंकि पुराने कलर पर हम सभी की आंख लयबद्ध हो गई थी. संतरे के रंग के इस्तेमाल के पीछे सिर्फ एक मकसद है, वह है, थोड़ी जीवंतता और थोड़ी उदात्तता का भान हो.

तीसरी चीज जो भड़ास4मीडिया पर शुरू हुई है वह है म्यूजिक सुनाने का प्रबंध. कई बार लगता था कि ये भजन, ये निर्गुण, ये संगीत, ये ग़ज़ल बहुत बढ़िया है पर उसे मैं चाह कर भी आप लोगों को सुनवा नहीं पाता था क्योंकि मल्टीमीडिया के कई आप्शन इस पोर्टल पर जोड़े नहीं गए थे. अब इसे जोड़ दिया गया है. साइट खोलते ही आपको आज उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का एक सुंदर गीत-संगीत सुनने को मिलेगा... सांसों की माला पे सिमरुं मैं भड़ास4मीडिया के होम पेज पर बाईं ओर सबसे उपर म्यूजिक प्लेयर.पी का नाम... अपने मन की मैं जानूं और, पी के मन की राम... यही मेरी बंदगी है यही मेरी पूजा.... इक था साजन मंदिर में और इक था प्रीतम मस्जिद में.... पर मैं सांसों की माला पे सिमरुं मैं पी का नाम.... प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप... प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम.... हम और नहीं कुछ काम के, मतवारे पी के नाम के, हर दम.... प्रीतम का कुछ दोष नहीं है, वो तो हैं निर्दोष... अपने आपसे बातें कर के हो गयी मैं बदनाम....

इस भजन को जिस सूफियाना अंदाज में नुसरत ने गाया है, वो आपके किसी और दुनिया में ले जाता है. अगर आप गीत-संगीत नहीं सुनना चाहते तो साइट पर बाईं तरफ बिलकुल उपर आपको जो म्यूजिक प्लेयर मिलेगा, उसके स्टाप बटन को दबा दें. वैसे, साइट खोलते ही गीत आटो प्ले होने वाला आप्शन केवल आज के दिन के लिए है. कल से आप तभी सुन सकेंगे जब आप उस पर क्लिक करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि आटो प्ले मोड में रखने पर साइट की बैंडविथ जबर्दस्त खर्च होने की बात बताई गई है.

उम्मीद है, इन बदलावों को आप लोग पसंद करेंगे. अगर कोई सुझाव हो तो आप इसी पोस्ट के नीचे कमेंट के रूप में लिख सकते हैं. आप सभी लोगों का जो प्यार और सहयोग मिला है, मिलता रहा है, उससे मैं निजी तौर पर खुद को धन्य समझता हूं. उम्मीद है, ये अपनापा बनाए रखेंगे.

मकर संक्रांति की आप सभी को ढेरों शुभकामनाओं और आभार के साथ

यशवंत सिंह

एडिटर, भड़ास4मीडिया

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