पीटीआई हीरक जयंती समारोह में सब खुलकर बोले

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नेताओं ने रिपोर्टिंग में सावधानी बरतने की सलाह दी : राजनीति के धुरंधरों ने मीडिया को रिपोर्टिंग में सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही आगाह भी किया है कि ब्रेकिंग न्यूज की होड़ मीडिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही है। हालांकि सभी ने लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया की लोकतंत्र में भूमिका को अहम माना है। पर मीडिया से हमेशा किसी भी सूचना की प्रामाणिकता की जांच करने की अपील भी की है। क्योंकि गलत खबर छापने के बाद माफीनामे से नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती। पीटीआई कर्मचारी संघों के फेडरेशन की तरफ से बुधवार को आयोजित पीटीआई के हीरक जयंती समारोह में केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह और श्रीप्रकाश जायसवाल ही नहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी मीडिया की दशा और दिशा के बारे में खुल कर बोले।

वीरभद्र ने कहा कि मीडिया उद्योग खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आज जो होड़ दिखती है वह खबर संकलन की नीति को बेशक प्रभावित करती है। गलत रिपोर्ट से होने वाले नुकसान को साधारण माफीनामे से दूर नहीं किया जा सकता। शीला दीक्षित ने भी उनकी राय से सहमति जताई और कहा कि प्रतिस्पर्धा के माहौल में खबर को ब्रेक करने की दौड़ में किसी भी सूचना को प्रामाणिकता को परखने के दायित्व से विमुख नहीं होना चाहिए।

शीला दीक्षित ने समाचार एजेंसी के तौर पर पीटीआई की लगातार बरकरार रही विश्वसनीयता की सराहना की और सुझाव दिया कि उसके प्रबंधन को टेलीविजन ट्रस्ट आफ इंडिया नामक दूसरी एजेंसी भी शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। लोगों को तथ्यात्मक सूचनाएं देने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने पीटीआई को देश की सबसे अधिक विश्वसनीय समाचार एजंसी बताया और कहा कि जब भी कोई खबर उसकी क्रेडिट लाइन से होती है तो एक पाठक के तौर पर उसमें सबका विश्वास रहता है। श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि मीडिया को देश के विकास में अहम भूमिका अदा करनी है।

जम्मू-कश्मीर के माकपा नेता एमवाई तारीगामी ने अफसोस जताया कि मीडिया स्कैंडल और हिंसा की खबरें ज्यादा दे रहा है और शांति और विकास की खबरों की अनदेखी कर रहा है। मीडिया से किसी भी घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष तस्वीर पेश करने की भी अपेक्षा जताई। पीटीआई के मुख्य कार्यकारी एमके राजदान ने एजेंसी के अब तक के सफर का ब्योरा दिया। समारोह में कर्मचारी नेताओं ने मीडिया की ट्रेड यूनियनों को फिर से मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। एनयूजे के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर त्रिखा ने पत्रकारों की सेवा परिस्थितियों में गिरावट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कर्मचारी संगठनों को फिर मजबूत करने पर जोर दिया ताकि पत्रकारों को उनका हक मिल सके। आईजेयू के अध्यक्ष सुरेश अखौरी ने चिंता जताई कि केंद्र और राज्य सरकारें पत्रकारों से जुड़े कानूनों को लागू करवाने और वेतन आयोगों की सिफारिशों पर अमल कराने का दायित्व भूल गई हैं। यूएनआई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष मोहन लाल जोशी ने मीडिया कर्मचारियों की यूनियनों को आत्मनिरीक्षण की सलाह दी। भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भी समारोह को संबोधित किया। साभार : जनसत्ता


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