'मुंबई मिरर' को माफी नहीं, अगले जन्म पत्रकार बनूंगा : अमिताभ

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सिटिजन जर्नलिस्ट पुरस्कार से नवाजे गए संजीव शर्मा की हथेली पर अभिताभ ने ऑटोग्राफ दिया : अमिताभ बच्चन आजकल पत्रकारिता और पत्रकारों की वजह से चर्चा में हैं. ‘मुंबई मिरर’ अखबार ने ऐश्वर्य राय के पेट में टीबी होने की वजह से उनके गर्भवती न हो पाने की एक खबर पिछले दिनों प्रकाशित की, उसी के बाद अमिताभ बच्चन भड़के हुए हैं. वे 'मुंबई मिरर' की खुद से संबंधित खबरों पर पहले भी नाराजगी जता चुके हैं. इस बार बहू ऐश्वर्य के बारे में टिप्पणी कर दिए जाने से वे बेहद गुस्से में हैं. अमिताभ का साफ कहना है कि- ‘मुंबई मिरर’ इस लेख के लिए माफी मांगे. अमिताभ ने अपने ब्लॉग ‘बिगबी डॉट बिगअड्डा डॉट कॉम’ पर लिखा है कि, "मुंबई मिरर जैसे प्रतिष्ठित और सम्मानित समाचारपत्र में इस तरह का गैर-पेशेवर और झूठा लेख प्रकाशित होना परेशानी की बात है. इससे इस लेख को लिखनेवाले पत्रकार, प्रकाशित करनेवाले संपादक और समाचारपत्र का अपमान हुआ है. इस लेख में भारतीय प्रेस परिषद द्वारा निर्धारित पत्रकारिता के मानदंडों का उल्लंघन हुआ है. इसने खुद के अपमान के अलावा बच्चन परिवार को भी नुकसान पहुंचाया है."

ज्ञात हो कि अखबार के गुरुवार के अंक में ‘प्रेग्नेंट पॉज-ऐश्वर्य राय बच्चन’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ. इस लेख में कहा गया था कि ऐश्वर्य राय बच्चन पेट की तपेदिक और उसके इलाज के कारण गर्भवती नहीं हो पा रही हैं. लेख में यह भी कहा गया था कि अमिताभ अपने बेटे और बहू पर पोते के लिए दबाव बना रहे हैं. अमिताभ ने ‘मुंबई मिरर’ की संपादक मीनल बघेल को भी पत्र लिखा है, इसमें उन्होंने कहा है कि समाचारपत्र के इंटरटेनमेंट सेक्शन के फर्स्ट पेज पर लिखकर माफी मांगी जाए और इसमें संबंधित पत्रकार और संपादक के हस्ताक्षर भी हों. उन्होंने बच्चन परिवार के अपमान की भरपाई के लिए टीबी के मरीजों के लिए काम करनेवाली किसी राष्ट्रीय धर्मार्थ संस्था को कुछ कोष देने के लिए भी कहा है.

अमिताभ बच्चन ने ऐश्वर्य के बारे में अफवाहों के ‘मुंबई मिरर’ में प्रकाशन को निम्न स्तरीय पत्रकारिता करार दिया. अमिताभ कहते हैं कि यह खबर पूरी तरह से गलत है, यदि किसी ने ऐश्वर्य के प्रति कुछ भी अपमानजनक कहा तो वे उसके खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ेंगे. अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "मैं लेख में प्रकाशित सामग्री से बहुत कुपित और नाराज हूं. इस लेख का कोई भी हिस्सा सत्य नहीं है. मैं अपने परिवार का मुखिया हूं. ऐश्वर्य मेरी बहू नहीं हैं, वे मेरी बेटी और मेरे घर की एक महिला हैं. यदि कोई उनके विषय में अपमानजनक टिप्पणी करेगा तो मैं उनके लिए अपनी अंतिम सांस तक लडूंगा. यदि आप घर के पुरुषों अभिषेक या मेरे बारे में कुछ कहेंगे तो मैं इसे सहन कर लूंगा, लेकिन यदि मेरे घर की महिलाओं के लिए कोई अपमानजनक टिप्पणी की जाएगी तो मैं उसे नहीं सहूंगा।"

अखबार और पत्रकार से नाराज अमिताभ बच्चन सीएनएन-आईबीएन द्वारा आयोजित सिटिजन जर्नलिस्ट पुरस्कार वितरण समारोह में बोले कि उनकी दिली इच्छा पत्रकार बनने की है पर यह अगले जन्म में पूरी होगी. राजदीप सरदेसाई ने अभिताभ से पूछा था कि आप अपने विचार व्यक्त करने के लिए वह ब्लाग लिखते हैं और उनके पिता हरिवंश राय बच्चन भी यशस्वी कवि थे तो क्या उन्होंने कभी पत्रकार बनने के बारे में नहीं सोचा. इस पर अभिताभ ने कहा कि उनके पिता ही नहीं, श्वसुर भी जाने-माने पत्रकार रहे हैं. राजदीप के प्रश्न पर कि क्‍या वह खुद कभी पत्रकार बनना चाहते है, उन्होंने कहा .. अगले जन्म में. सिटिजन जर्नलिस्ट के पुरस्कार से नवाजे गए संजीव शर्मा को अभिताभ ने उस समय गदगद कर दिया जब उनकी फरमाइश पर संजीव की हथेली पर अपना ऑटोग्राफ दिया. संजीव ने अमिताभ से गुजारिश की थी कि उनके दोस्त ने उन्हें अभिताभ का ऑटोग्राफ अपनी हथेली पर लाने को कहा है. संजीव विकलांग हैं और वह जमीन पर बैठे हुए थे. बिग-बी ने तुरंत झुक कर उनकी हथेली पर ऑटोग्राफ दे दिया.

अभिताभ ने हालांकि पुरस्कार पाने वालों में सबसे कम उम्र 13 वर्षीय रजिया सुल्तान की इस जिद को पूरा नहीं किया कि वह उनका गाना सुनना चाहती है. रजिया ऐसी बहादुर बच्ची है जो पहले बाल मजदूर थी. लेकिन उसने न केवल अपने आप को बाल मजदूरी से मुक्ति कराया बल्कि अपने अदम्य साहस के चलते 48 अन्य बाल मजदूरों को भी इससे मुक्ति दिलाकर उन्हें स्कूल जाने को प्रेरित किया. बिहार सरकार से अपनी सम्मान पेंशन बहाल कराने के लिए राजधानी की सडकों पर पिछले चार साल से संघर्ष कर रही 90 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी गायत्री देवी के अथक प्रयासों से अमिताभ बहुत प्रभावित हुए. उन्होंने मंच पर उनकी आपबीती सुनने के बाद गायत्री देवी को पिछले पांच वर्ष की उनकी मासिक पेंशन की रकम स्वयं देने की घोषणा करवा दी. अमिताभ से जब राजदीप ने सभी पुरस्कार विजेताओं के हौसले बढ़ाते हुए अपने पिता की कोई कविता सुनाने की गुजारिश की तो उन्होंने अग्निपथ की पंक्तियां सुनाईं. हिंदुस्तान और जोश18 से साभार


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Comments (1)Add Comment
jhutha dikhava
written by sanjay kumar mishra..faizabad up, February 21, 2010
main maanta hoon ki Amitabh Bachchan bahut achhe insaan hain par mujhe lagta hai ki unke ander dikhava bhi bahut jyada hai....achha to tab hota ki wo apni achhayion ko sabke saamne laate aur chhoti si pyari si Rajiya ki iss khowayish ko poora karte ki usko Amitabh ka gaana sunna hain....kya bigad jaata Amitabh ka agar Rajiya ko do kadi suna dete...unki mahanta bhi bach jaati aur pyari Rajiya ki khowayis bhi poori ho jaati....dikhane ke liye wo kisi ko 5 saal tak pention dene ka waada kiya ho par isse unki jyada achhayie nazar nhi aati....kisi ki aapbeeti sun lena bahut nhi hai...kisi ki khowayis poora karna bhi jaroori hai...

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