ब्लागिंग एथिक्स पर वर्धा में दो दिनी वर्कशाप

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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा 9-10 अक्टूबर को हिंदी ब्लॉगिंग पर आधारित एक कार्यशाला और विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर अंतर्जाल की इस हिंदीजीवी दुनिया में नवप्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों व अन्य अभ्यर्थियों को ब्लॉग बनाने और नियमित संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी दी जाएगी। हिंदी में काम करने के विभिन्न औजारों का प्रयोग करने के तरीके बताए जाएंगे।

साइबर जगत के कायदे कानून (Cyber Law) की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा ब्लॉगिंग की दुनिया में नैतिकता के प्रश्न की पड़ताल की जाएगी। इस प्रश्न पर विचार किया जाएगा कि इस आभासी दुनिया में हमें जो स्वतंत्रता मिली हुई है उसके समुचित उपयोग के लिए क्या किसी आचार संहिता की परिकल्पना की जा सकती है। हम यहाँ जैसा व्यवहार देख रहे हैं, वह क्या हमारे सामाजिक सरोकारों की मर्यादा रख पा रहा है? क्या हिंदी ब्लॉग जगत एक जिम्मेदार मनुष्य की छवि प्रस्तुत कर पा रहा है?

यहाँ जानने का प्रयास किया जाएगा कि इस मंच को एक गम्भीर, सार्थक, समाजोपयोगी और सुव्यवस्थित अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने और सकारात्मक प्रतिष्ठा दिलाने के लिए क्या कुछ किया जाना चाहिए, और यह भी कि यहाँ क्या कुछ नहीं किया जाना चाहिए। यहाँ संभावनाएं तो अनन्त हैं लेकिन क्या अच्छा हो कि यहाँ विष की मात्रा अमृत की तुलना में नगण्य हो। सकारात्मक सोच का बोलबाला हो और नकारात्मक शक्तियाँ निरुत्साहित हों।

दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन अनुभवी विशेषज्ञों के माध्यम से एक कार्यशाला आयोजित कर हिन्दी चिठ्ठाकारी के तकनीकी कौशल और ब्लॉग प्रबन्धन के उपयोगी सूत्र इच्छुक विद्यार्थियों और अन्य पंजीकृत अभ्यर्थियों को सिखाये जाएंगे। कार्यक्रम के दूसरे दिन देश भर के नामचीन ब्लॉगर्स का सम्मेलन होगा। इस अवसर पर कम से कम चार अध्ययन पत्र पढ़े जाएंगे और उनपर खुली बहस होगी। इस बार जिस विषय पर चर्चा होगी वह है- ब्लॉगरी की आचार संहिता (blogging ethics)। इस विषय के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन पत्र आमन्त्रित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के संयोजक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी हैं जो विवि में आंतरिक संपरीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। हिंदी ब्लॉग जगत में सक्रिय कई लोगों को इस सेमिनार में पैनेलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया है। इसमें कई हिंदी ब्लागर दिल्ली के भी हैं। इनके वर्धा आने व वापस जाने का मार्ग व्यय विश्वविद्यालय द्वारा वहन किया जाएगा। वर्धा में ठहरने और भोजन इत्यादि का इन्तजाम भी विश्वविद्यालय द्वारा ही किया जाएगा।


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