संजय की गायकी और भड़ास का नया प्रयोग

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पत्रकारिता के कंधों पर कितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है, पत्रकार की संवेदना कितनी व्यापक व उदात्त होती है, इसे समझने वालों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है. अच्छी बात है कि कई पत्रकार अपनी सीमाओं और अपने जीवन संघर्षों के बावजूद वृहद मानवीय सरोकारों को जी रहे हैं, पत्रकारिता के धर्म व पत्रकार के दायित्व के पैमाने पर 24 कैरेट सोने की तरह खरे उतर रहे हैं. उन्हीं में से एक संजय तिवारी हैं. इलाहाबाद के एक गांव के एक गरीब परिवार से निकले संजय इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पढ़ाई मुश्किल से कर सके. आर्थिक दिक्कतों ने न तब पीछा छोड़ा था न अब. तब पढ़ने की दिक्कत थी, अब अपनी सोच व समझ के हिसाब से जीवन जीने का संकट है. विस्फोट डाट काम के जरिए हिंदी वेब पत्रकारिता में एक मुकाम हासिल किया है संजय ने.

बाजार और प्रलोभनों के इस विकट दौर में संजय खुद को आज भी डाउन टू अर्थ और जमीनी किस्म के आदमी बनाए हुए हैं.  अगले महीने के दिन कैसे कटेंगे, इसकी चिंता तो उन्हें सताती है लेकिन उनके लिए यह उतनी बड़ी चिंता नहीं जितनी की इस देश के हाशिए पर जी रहे लोगों के दुखों को सत्ता, समाज व सिस्टम द्वारा उपेक्षित कर दिया जाना. इसीलिए वे बाजार व सिस्टम के बने बनाए रास्ते से अलग जाकर, वेब पत्रकारिता के जरिए सच बोलो रे, बेधड़क कहो रे और एकला चलो रे का नारा लगाए हुए हैं.  आपाधापी भरे इन दिनों में भटक-भटक कर जीवन, समाज व देश को समझने की कोशिश करने वाले संजय को एक दिन मैंने एक शाम दिल्ली के मयूर विहार फेज थ्री इलाके में पकड़ा.

संजय के जीवन में वह वो दौर था जब उनका आफिस उनके झोले में लैपटाप की शक्ल में होता था और उनका घर कोई पार्क या किसी मित्र का आतिथ्य. संजय दिल्ली में उस जगह से किन्हीं साजिशों-झंझटों के चलते अचानक बेदखल हो गए जहां उन्होंने अपने कई वर्ष जिये, कई तरह के इन्नोवेटिव काम किए. शाम, फिर रात और फिर संगीत. दौर शुरू हुआ. मांस-मदिरा से कोसों दूर रहने वाले संजय पान के शौकीन हैं. संजय कम बोलते हैं, गाते हुए बिलकुल नहीं दिखते. लेकिन संजय उस रात गाए. कई बार गाए. अवसाद की परतों को श्लोकों-भजनों के जरिए बाहर निकाला. उनके गायन के वीडियो हम यहां पेश कर रहे हैं.

भड़ास4मीडिया प्रयोगों का नाम है और इसी कड़ी में एक नया प्रयोग, बेहद चुपचाप तरीके से शुरू कर रहे हैं. मीडिया के बंदों, मीडिया के कर्मियों की गायकी को हम लगातार भड़ास4मीडिया पर पेश करने का इरादा बना चुके हैं. अच्छे गाने वालों को एक निर्णायक मंडल पुरस्कृत करेगा, नगद ईनाम भी देगा. इसके लिए नियम-शर्तों को तैयार किया जा रहा है. ईनाम देने के लिए नगद राशि मुहैया कराने वाले कई लोग सामने आ चुके हैं. यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि सूफियों-संवेदनशीलों-फक्कड़ों-मानवीयों की परंपरा मजबूत हो, बुरे दिनों में आशा की उम्मीदें मजबूत हों. संजय के गाने के इन वीडियोज को 'भड़ास मीडिया म्यूजिक मुकाबला' में हम शामिल कर रहे हैं और इन वीडियो को मुकाबले के लिहाज से प्रथम इंट्री मान रहे हैं. अगर आप भी फुरसत के वक्त में, मुश्किल के वक्त में, अकेलेपन में कुछ गाते-गुनगुनाते हैं, संगीत से प्यार करते हैं और अच्छे गीत आपकी जुबान पर आ जाते हों तो उसे रिकार्ड कर हमें This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर भेज दीजिए. उसे वीडियो को हम यहां दिखलाएंगे. ध्यान रहे, एक वीडियो में केवल एक गाना रहे ताकि वीडियो फाइल बड़ी न हो सके. लीजिए, संजय की आवाज में दो-तीन गीत, भजन, श्लोक, जज्बात, बात को सुरीले तरीके से सुनिए.

- यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


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