आए हो मेरी जिंदगी में तुम बिहार बनके

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विष्णु शंकर: पत्रकार विष्णु शंकर ने भोजपुरिया और बिहार-झारखंड के लोगों के दर्द को गानों में उड़ेला : भड़ास4मीडिया पर हफ्ते भर तक विष्णु के गीत सुन सकेंगे- ...ताना मारे देसवा के लोग ई बिहारी हवे... : मीडिया में कार्यरत कई साथी कई-कई प्रतिभाओं से लैस होते हैं, कई क्षमताओं के धनी होते हैं लेकिन उन्हें अपने टैलेंट को दिखाने का अवसर कम ही मिल पाता है. लेकिन जब वे ठान लेते हैं तो कुछ ऐसा रच देते हैं कि इतिहास कायम हो जाता है.

ऐसे ही एक साथी हैं विष्णु शंकर जो आजतक, स्टार न्यूज कई जगहों पर रहे हैं. थिएटर और साहित्य से गहरा अनुराग रहा है. उन्होंने बिहार चुनाव के दौरान कुछ गीत लिखे और गाए हैं. एक बैंड बनाकर. बैंड में रिक्शे वाले, मजदूर, पान वाले सदस्य हैं. इन सभी आम लोगों ने कुछ खास रच डाला है. एक पत्रकार साथी ने मेल कर भड़ास4मीडिया को विष्णु व उनके बैंड के बारे में जानकारी दी तो उनसे संपर्क कर उनके गाए कुछ गीत सुनने के लिए मंगाए गए. गीत सुनने के बाद उसे औरों को भी सुनाने और इन गीतों को तैयार किए जाने की पृष्ठभूमि के बारे में बताने का मन हुआ. विष्णु से फोन पर विस्तार से हुई बातचीत के बाद उनके बयान, उनकी बात को उन्हीं के शब्दों में प्रस्तुत किया जा रहा है. उनकी बातों में तल्खी, प्यार, संगीत, उम्मीद, निराशा... सारे भाव हैं. आप सब उनके गाए गीत को ध्यान से सुनेंगे और उनकी भावना को, जो शब्दों के रूप में नीचे दर्ज है, महसूस करेंगे. गीत सुनने के लिए भड़ास4मीडिया के होम पेज पर बाईं ओर बिलकुल उपर दिए गए दो एमपी3 को एक-एक कर क्लिक करें. इनके नाम हैं- e bihari have... और chhodin maharaj...

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया


हमारा बैंड 'बिहारी ओशियन', इसके सिक्योरिटी गार्ड, रिक्शा वाले और मजदूर लोग सदस्य हैं

ओय..(???? यहां अपने पसंद की गाली भर लें) बिहारी...
ओए बिपबिपबिप ब्यारी
ब्यारियो ने दिल्ली को कचरा कर दिया....
ओय बिहारी...टिकिट बोल...
स्स्स्साला ब्यारी....

बिहार को छोड़कर हिंदुस्तान के हर हिस्से और कोने में बिहार और भोजपुरी के लोगों के लिए सत्कार के ऐसे सम्मान जनक शब्द सड़क पर, बस में, गलियों में, मोहल्लो में आपने भी सुने होंगे या अगर आप बिहार या भोजपुरी से ताल्लुक रखते हों तो डायरेक्ट इस सम्मान से कहीं ना कहीं सम्मानित हुए होंगे. ''...ओए ब्यारी...'' मुहावरा नेशनवाइड स्वीकृत हो चुका है. भोजपुरी और बिहारियों को छोड़कर हिंदुस्तान का हर आदमी इसका कॉपीराइट हासिल कर चुका है.

और जहां कहीं कुछ भी नकारात्मक हो मसलन सड़क पार करते वक्त कोई लड़खड़ा गया तो कार से मुंडी निकालकर भाइ साहब अपने कॉपीराइट का प्रयोग करेंगे- ''...ओय बिहारी...''. रिक्शे वाले ने साइड देने में दो सेकेंड ज्यादा ले लिया, तुरंत इनाम पाएगा-  ''...ओए बिपबिपबिप ब्यारी...'' दिल्ली के बसों में कंडक्टर साहब लोग तो यही गाना ही गाते हैं- ''...ओय बिहारी...टिकिट बोल...''

मुझे खुद 16 साल दिल्ली में हो गए. डीयू में पढ़ाइ के वक्त से ये प्रतिष्ठा हासिल करता  रहा हूं. मजेदार / यातनादायी वाकया है मेरे एक बिहारी दोस्त के जीवन का जब उससे उसकी पंजाबी गर्ल फ्रेंड ने ब्रेकअप के वक्त कहा था ''...आए हो मेरी जिंदगी में तुम बिहार बनके...''

जितने सिर हैं... उतनी कहानियां हैं... उतने वाकये हैं.... किसी के लिए मजेदार... किसी के लिए यातनादायी... कितनी बताएं, किसकी किसकी सुनाएं...

ये भी याद है कि डीयू के दिनों में मैंने खुद को गोरखपुर का बताकर विजय नगर में कैसे मकान पाया था. बट जब मकान मालिक को पता चला तो फिर क्या हुआ, मेरा वहीं सत्कार हुआ- ''...ओय बिहारी...''

इन बातों को पहले मैं दिल से लेता था अब मजे लेता हूं. मजा आता है उस चेहरे को देखर जो सड़क पर अपनी औकात दिखाता है किसी भी एक्स वाइ जेड को बिहारी बोलकर गाली देते हुए. काश उस वक्त वो अपना चेहरा आइने में देखता और अपनी भद्दी आवाज को रिकॉर्ड करके सुनता. रही सही कसर मुंबई में परम आदरणीय पुरुष राज ठाकरे साहब पूरी कर देते हैं और नॉर्थ इस्ट में बरुआ जी और गोगोइ जी. दिल्ली में चड्डा और चावला साहब सरकार की ओर से बिहारी बोलकर गाली देने के लिए बकायदा तैनात किए गए हैं.

बिहार के नेता लोग और बाहुबली भैया लोग जो गुल बिहार में खिलाते रहे हैं, उसी गुल के गुलिस्तां की गाली हम भोजपुरी और बिहारी बिहार के बाहर खाते रहे हैं.... रोटी की तरह...

तो इन्हीं गालियों ने प्रेरित किया और मैने ऐंवीं कुछ लाइनें लिखकर ऐंवीं म्यूजिक कर दिया और ऐंवीं, पारक के परली साइड में अपने उन संगीतज्ञ दोस्तों के साथ जो मजदूर हैं, उन्होंने ढोलक और हारमोनियम बजा दिया और बन गया एक गाना ...ताना मारे देसवा के लोग, इ बिहारी हवे... आप भी सुनिए. अच्छा लगे तो दोबारा सुन लेना और बुरा लगे तो बोलना- ''...स्साला व्यारी...'' और दोनों ही स्थितियों में, This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर मुझे मेल भेज दें तो आभारी रहूंगा.

बिहार और भोजपुरी के लोगों के बारे में कुल 6 गाने हमने और हमारे बैंड (बिहारी ओशियन जिसमें सिक्योरिटी गार्ड, रिक्शा वाले और मजदूर लोग हैं.) ने बनाए हैं. अगर आपको पसंद आएगा तो एक-एक करके सुनायेंगे. पहले सुने पहला गाना- ताना मारे देसवा के लोग इ बिहारी हवे....

बाकी रही मेरी खुद की बात कि मैं कौन हूं तो क्या कहूं. मेरी तस्वीर (उपर प्रकाशित) को जरा गौर से देखिये. ये इंसान की शक्ल में एक पत्रकार है. 16 साल पहले बिहार (बगहा चम्पारम) से दिल्ली भाग आया था. पहले वैज्ञानिक बनना चाहता था फिर ऑटोमोबाइल इंजिनियरिंग में डिप्लोमा अधूरा (लेकिन ज्ञान पूरा) आगे.. दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्कम्युनिकेशन में बीए ऑनर्स... फिर नाटकों की शुरुआत... डीयू में तमाम नाटकों और नुक्कड़ (सोलो) में खूब रगड़ाई... एनएसडी के नेशनल फेस्टिवल में कई नाटकों में अभिनय... पुनर्नवा नाम की नाट्य मंडली बनाकर भिखारी ठाकुर के नाटकों के साथ-साथ उर्दू के कुछ कहानियें का दिल्ली और देश भर में मंचन... और हबीब तनवीर साहब के नाट्य मंडली नया थियेटर के लोभ में भोपाल में 6 माह डेरा डाला... ग्रुप के लोगों को चाय-पानी पिलाता रहा...

जेएनयू के गंगा ढाबे की चस्केबाजी और आनंद पटवर्धन के साथ डॉक्यूमेंट्री लेकर दिल्ली के टोले मोहल्लों में घूमा.... जनसत्ता और दैनिक जागरण में फिल्म और कल्चरल मुद्दों पर लिखता रहा... 8-9 माह नॉर्थ इस्ट में घुमक्कड़ी और पत्रकारिता.... 2003 के अंत में आजतक पहुंचा, शम्स भाई का शागिर्द बना.... जुर्म... वारदात.. सिनेमा आजतक... प्रोड्यूस करता रहा. क्राइम रिपोर्टींग में भी हाथ आजमाता रहा... और क्या-क्या करता बनाता रहा... फिर स्टार न्यूज पहुंचा.... 'कौन है' का प्रोडक्शन, रिपोर्टिंग करता रहा... यहीं पर 2-3 फिल्में बनाईं जिसमें बेनजीर भुट्टो पर बनी फिल्म को विशेष सराहना मिली... फिर 'शूटआउट' और 'ब्लास्ट' नाम का प्रोग्राम प्रोड्यूस किया.... (शूटआउट के कॉन्सेफ्ट पर 'टुमॉरो' नाम से फिल्म भी बन चुकी है)... हां स्टार न्यूज के एक डेली फिल्मी प्रोग्राम में कुछ-कुछ एंकर जैसा कुछ-कुछ करता था... पढने का शौक तथा लेखन और निर्देशन में विशेष रुचि... गाहे-बगाहे अभिनय में हाथ आजमा लेता हूं....

एक आनेवाली फीचर पिल्म के लिए पटकथा लेखन कर रहा हूं... फिलहाल नेशनल जॉगरफिक चैनल की डाक्यूमेंट्री डायरेक्ट कर रहा हूं... और आदत से लाचार हर हालत में मंडी हाउस के किसी कोनों में बैठकर 10 मिनट गा-बजाकर रायता फैला लेता हूं... तो अधकचरा नहीं एक कचरा गायक भी बन गया हूं... लेकिन मेरा सबसे बड़ा सच... मैं एक बुरा इंसान... जो अपनी कड़वी जुबान को कइ बार काबू नहीं कर पाता है... जिससे कई अपने रुठ गए.. कई छूट गए... कई रुठेंगे..कई छूटेंगे...

आपका

विष्णु शंकर

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(विष्णु शंकर से हुई बातचीत पर आधारित. विष्णु के गाने सुनने के लिए आप इस वेबसाइट के होम पेज यानि प्रथम पृष्ठ पर जाएं. बाईं ओर बिलकुल उपर दो गानों के नाम होंगे, ebihari have... और chhodin maharaj... इसमें से किसी एक पर क्लिक करें और सुनें. ये दोनों गीत इस खबर के प्रकाशन के एक सप्ताह तक वेबसाइट पर मौजूद रहेंगे.)


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Comments (6)Add Comment
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written by humtum, November 10, 2010
cool col cool cool...........
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written by SHYAM TYAGI, November 10, 2010
मैं एक बुरा इंसान ??????? sir ye aapse kisne keh diya naam to btana jara........aor bahut hi sarahniya prayas hai aapka jo ki bahut jyada safal ho ......
smilies/smiley.gif
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written by rashmi priyadarshini, November 08, 2010
ab shayad log bhojpuri geeto ko serious le
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written by amit pandey, November 08, 2010
bahut saarthak prayaas hai
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written by vivek chandra , November 07, 2010

accha laga--- kahi to roshani lana ke pahal ho rahi haa
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written by gumnam , November 06, 2010
kya jhooth bolte ho bhai ...adhoora chood rrakha hai ..poora to kar do

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