दोनों कश्‍मीर के रिश्‍तों की पड़ताल करती 'आठ अक्‍टूबर'

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भारतीय जनसंचार संस्थान में दो फ़िल्में दिखाई गईं. इन फिल्मों को भारतीय फौज के अफसरों ने देखा. ये अफसर एक प्रशिक्षण वर्कशॉप में हिस्सा लेने यहाँ आए हैं. वरिष्‍ठ पत्रकार और वृतचित्र फिल्म निर्माता-निर्देशक राजेश बादल की इन फिल्मों पर देर तक बातचीत हुई. पहली फिल्म 'आठ अक्टूबर' थी, जो कश्मीर में आए भूकम्प के बाद की स्थितियों पर केन्द्रित थी.

राजेश बादल की इस बहुचर्चित फिल्म में पाकिस्तान के एक छात्र से बातचीत दिखाई गई. मुद्दसर नाम का यह नौजवान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से भारतीय कश्मीर में एक शादी में हिस्सा लेने आया था. उसके लौटने से पहले ही भूकम्प आ गया और कमान अमन सेतु टूट गया. वह नहीं लौट पाया. इस समय का फायदा उसने कश्मीर घूमने में उठाया.

फिल्म में मुद्दस्सर कहता है कि पाकिस्‍तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारतीय कश्मीर को लेकर गलत जानकारियां बताई जाती हैं. कहा जाता है कि भारतीय कश्मीर में अभी भी लोग कबीलों में रहते हैं. कोई विकास नहीं है. कोई आजादी नहीं है. केवल फ़ौज ही दिखाई देती है. लेकिन यहाँ आकर तो सारे ख्याल गलत साबित हुए. दरअसल हम लोग वहां जिन स्थितियों में रहते हैं, वे भारतीय कश्मीर से बहुत बदतर हैं. वहां तो बीते साठ साल में कोई विकास नहीं हुआ.

इससे पहले राजेश बादल की फिल्म 'कलम का महानायक राजेंद्र माथुर' दिखाई गई. इस फिल्म में भारतीय पत्रकारिता में राजेंद्र माथुर के योगदान के अलावा कश्मीर समस्या और पाकिस्तान के साथ बनते-बिगड़ते रिश्तों पर राजेंद्र माथुर के विचार एक अलग हिस्से में दिखाए गए हैं. इसमें माथुर कहते हैं कि दरअसल पाकिस्‍तान भारत से नफरत के आधार पर ही जिंदा है. जिस दिन अपने खातिर जिंदा रहने वाला पाकिस्तान अस्तित्व में आ जाएगा, उस दिन बहुत सारी समस्याओं का हल भी हो जाएगा.

वे कहते हैं कि जब पाकिस्तान बना तो जिस ज़मीन में पाकिस्तान बना, वहां मुस्लिम लीग कभी बहुमत में नहीं रही और उन इलाकों के लोग वास्तव में पाकिस्तान नहीं चाहते थे. पाकिस्तान चाहने वाले जो लोग थे, वे उत्तर प्रदेश या अन्य इलाकों से थे. जब वे लोग अपने चाहे पाकिस्तान में पहुंचे तो वहां मुहाजिर कहलाए. आज दो पीढ़ियों के बाद भी उन्हें वास्तविक पाकिस्तानी नहीं माना जाता. वे वहां शरणार्थियों की तरह रह रहे हैं तो अगर पाकिस्तानी दो पीढ़ियों के बाद भी पकिस्तान में शरणार्थी हैं, तो पाकिस्तान बना ही कहाँ? इस फिल्म  का यह आठवां प्रदर्शन था. इस साल फिल्म के 75 शो आयोजित होंगे. इसके बाद कलम का महानायक -ग्रन्थ को जारी किया जाएगा.


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