फेसबुक के संस्‍थापक मार्क को टाइम ने चुना पर्सन ऑफ द ईयर

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दुनियाभर में लोकप्रिय सोशल साइट फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जकरबर्ग को प्रतिष्ठित अमेरिकी मैगजीन टाइम ने पर्सन ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा है. टाइम प्रतिवर्ष ऐसे व्‍यक्ति को इस अवार्ड से सम्‍मानित करती है, जिसने दुनिया पर सबसे ज्‍यादा सकारात्‍मक या नकारात्‍मक प्रभाव डाला हो. इस दौड़ में मार्क जकरबर्ग के साथ पूरी दुनिया में तहलका मचाने वाले विकी‍लीक्‍स के संस्‍थापक-संपादक जूलियन असांजे भी थे.

इसी वर्ष 26 साल के होने वाले मार्क जकरबर्ग टाइम मैगजीन के वार्षिक अंक में पर्सन ऑफ द ईयर चुने जाने वाले कम उम्र के दूसरे शख्‍स हैं. उनके यह सम्‍मान कम उम्र में अर‍बपति होने के साथ उनकी दानवीरता के लिए भी दिया जा रहा है. जकरबर्ग ने हाल ही में शिक्षा सुधार के लिए 10 करोड़ डॉलर की रकम दान में दी है.

जकरबर्ग ने 4 फरवरी 2004 को हावर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते वक्त अपने साथियों एदुआर्दो सॅवेरिन, डस्टिन मॉस्कोविट्ज़, क्रिस ह्यूएस के साथ मिलकर फेसबुक की शुरुआत की थी. फेसबुक इंटरनेट पर एक निःशुल्क सोशल नेटवर्किंग साइट है, जिसके माध्यम से इसके सदस्य अपने मित्रों, परिवार और परिचितों के साथ संपर्क रख सकते हैं. अपनी बातों को शेयर कर सकते हैं. यह साइट एक निजी कंपनी द्वारा संचालित है.

वर्ष 2004 में जब मार्क जकरबर्ग ने इसकी शुरुआत की थी, तब इसका नाम द फेसबुक था. कॉलेज नेटवर्किंग इंटरनेट के रूप में शुरू होने के बाद यह बहुत जल्‍द कॉलेज परिसरों में लोकप्रिय होती चली गई. कुछ समय में इसकी धमक यूरोप में भी बढ़ने लगी. यह साइट पूरे यूरोप में पहचाना जाने लगा. अगस्‍त 2005 में इसके नाम के आगे से 'द' हटाकर इसका नाम फेसबुक कर दिया गया. फेसबुक पर अंग्रेजी-हिंदी समेत कई भाषाओं में अपने संदेश प्रेषित करने की सुविधा उपलब्‍ध है. वर्तमान में फेसबुक से 50 करोड़ से ज्‍यादा लोग जुड़े हुए हैं.

फेसबुक ने भारत सहित 40 देशों के कई मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों से समझौता किया है. जिसके तहत इन कंपनियों के नेटवर्क वाले मोबाइल पर फेसबुक का नि:शुल्‍क उपयोग किया जा सकता है. हालांकि इसे लेकर समय समय पर विवाद भी होते रहे हैं. पाकिस्‍तान में इस साइट पर कुछ समय के लिए पाबंदी लगा दी गई थी. सीबीसी न्‍यूज के एक कार्यक्रम में गूडचाइल्‍ड ने फेसबुक के कई खतरों के बारे में बताया है. उसके अनुसार इससे निजी और गोपनीय जानकारियां खतरे में पड़ सकती हैं.

पहली है इसकी डेटा शेरिंग, इसमें आपकी जानकारी आपके मित्रों तक ही सीमित नहीं रहती है बल्कि यह जानकारी थर्ड पार्टी अप्लिकेशन डेवलपरों तक भी पहुंच जाती है. दूसरा सीबीसी न्यूज़ के 'द अर्ली शॉ ऑन सटरडे मोर्निंग' कार्यक्रम के दौरान गूडचाइल्ड ने फेसबुक कई खतरों के बारे में जानकारी प्रदान की जिससे निजी और गोपनीय जानकारियों की गुप्तता खतरे में पड़ सकती है. दूसरा फेसबुक की रिडिजाइन के बाद उसकी प्राइवेसी सेटिंग चेंज हो जाती है वह अपने आप डिफाल्‍ट पर आ जाती है. सदस्‍य इसमें बदलाव कर सकते हैं, लेकिन ज्‍यादातर लोग इधर ध्‍यान ही नहीं देते हैं.


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Comments (1)Add Comment
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written by Rajendra upadhyay, December 18, 2010
i am seniour journalist.i want job in Pradesh today.

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