इस तरह कायम हुआ असांजे के खिलाफ अपराध

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अमिताभजीजूलियन असांजे लन्दन में गिरफ्तार किये गए और अब काफी हो-हल्ला के बाद कोर्ट द्वारा जमानत पर रिहा किये जा चुके हैं. लेकिन शायद अभी भी हम में से बहुत लोग यह नहीं जानते कि असांजे के खिलाफ अपराध कैसे कायम हुआ. दस्तावेजों के अनुसार दरअसल यह कहानी शुरू हुई 11 अगस्त 2010 को जब असांजे स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम पहुंचे थे.

वहाँ वे एक रेडिकल फेमिनिस्ट महिला (जिन्हें स्वीडिश अधिकारियों ने असली नाम नहीं बता कर मिस ए बताया है, जैसा हमारे देश में भी बलात्कार की शिकार महिला का असली नाम नहीं बताने का नियम है), जिनसे उनकी पहले कोई मुलाक़ात नहीं थी, के घर पर रुके. सब ठीक चला और 14 अगस्त को वे दोनों डिनर पर गए. फिर वहाँ से लौट कर आये और रजामंदी से उनके बीच सहवास हुआ. अब हुआ यह कि संभवतः दुर्भाग्यवश सेक्स के दौरान असांजे का कंडोम फट गया. मिस ए की शिकायत के मुताबिक़ एक तो असांजे ने उस कंडोम के फटने के बाद भी सेक्स का उपक्रम जारी रखा और दूसरे अपने वजन का इस्तेमाल करते हुए उन्हें सेक्स के दौरान प्रताडि़त भी किया.

फिर कहानी आई एक दूसरी महिला की, जिसे स्वीडन के अधिकारी कागजों पर मिस डब्ल्यू कह रहे हैं. अगले दिन, 15 अगस्त को असांजे इस महिला के साथ लंच पर गए. वहाँ से वे लोग सिनेमा देखने गए और वहीं वे दोनों ‘नजदीक’ आ गए. दोनों ने ट्रेन पकड़ा और उस महिला के घर आ गए. वहाँ उन दोनों में अंतरंग सम्बन्ध स्थापित हुए और इस दौरान भी असांजे ने कंडोम का इस्तेमाल किया था. फिर अपराध कहाँ हुआ. दरअसल, अपराध हुआ अगली सुबह जब जागने के बाद असांज ने बिना किसी सुरक्षा के मिस डब्ल्यू के साथ सहवास किया.

18 अगस्त को मिस ए ने स्वीडिश अधिकारियों के सामने असांजे के ऊपर ‘जानबूझ कर छेड़खानी’ (डेलीबेरेटेली मोलेस्ट) का आरोप लगाया. उन्होंने यह आरोप लगाया कि असांजे ने उनके साथ इस प्रकार सेक्स किया कि उनकी सेक्सुअल इंटेग्रिटी से खिलवाड़ हुआ. उन्होंने एक माध्यम से असांजे को अपना घर छोड़ देने को कहा और असांजे 20 अगस्त को उनका घर छोड़ के चले गए. दोनों महिलाएं स्टॉकहोम पुलिस के पास गयीं और उनकी शिकायत की. वे चाहती थीं कि असांजे का एचआईवी टेस्ट किया जाए.

दस्तावेजों के मुताबिक़ पुलिस अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि असांजे ने मिस डब्ल्यू का रेप किया और मिस ए को सेक्सुअली मोलेस्ट किया. अभियोजन अटॉर्नी ने असांजे पर रेप का चार्ज लगाने की बात रखी पर चीफ प्रोजेक्यूटर ने रेप के आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामूली अपराध है.

लेकिन कुछ दिनों बाद इस मामले में एक स्पेशल प्रोजेक्यूटर नियुक्त हुए और उसके बाद की बात तो हम सभी जानते हैं. स्वीडन के कानून के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति किसी महिला से सहमति के अनुसार सहवास कर रहा हो किन्तु उस महिला ने जब मना कर दिया, उसके बाद भी सेक्स करता रहे तो उसे ‘सेक्स बाई सरप्राइज़’ कहेंगे. इसका दंड 5000 स्वीडिश क्रोनर या 715 डॉलर है, यद्यपि यही कृत्य इंग्लैंड या कई अन्य पश्चिमी देशों में अपराध नहीं है.

अब सवाल यह है कि जब अपराध स्वीडन में हुआ तो अरेस्ट इंग्लैंड में क्यों? इसके पीछे कारण है यूरोपियन अरेस्ट वारंट की व्यवस्था. इसके अधीन यूरोप के कई देश एक दूसरे के क्रिमिनल वारंट का तामिला अपने-अपने देश में करते हैं यदि उन्हें इसकी जानकारी दी जाती है.

अब इस पूरे मामले में क्यों इतनी तेजी रही, किस तरह से सही-गलत किया गया, क्या इसके पीछे कोई बड़ी ताकतों का हाथ रहा है, इन सब के बारे में मैं उतना ही जानता हूँ, जितना कई माध्यमों से पढ़-सुन पा रहा हूं. असली कहानी तो बहुत ऊँचे स्तर के लोग ही जानते होंगे. यहाँ पर तो मैंने मात्र इस पूरे प्रकरण का विधिक पहलु प्रस्तुत किया है, जो सरकारी दस्तावेजों के अनुसार बताया जा रहा है और जो बातें इंग्लैंड के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और हाई कोर्ट में बहस के दौरान सामने लायी गयी थीं.

लेखक अमिताभ ठाकुर आईपीएस अधिकारी हैं. लखनऊ में पदस्थ हैं. इन दिनों आईआईएम, लखनऊ में अध्ययनरत हैं.


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