शीला की जवानी और मुन्‍नी की बदनामी ठीक नहीं

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: प्रतिबंध लगाने के लिए याचिका दायर : आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ बेंच में डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा तीस मार खान के निर्माता ट्विंकल खन्ना, शिरीष कुंदर, रोनी स्क्रूवाला तथा निर्देशक फराह खान, दबंग के निर्माता अरबाज़ खान, मलाइका अरोड़ा तथा ढीलीन मेहता एवं निर्देशक अभिनव कश्यप, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सेंसर बोर्ड) तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विरुद्ध एक रिट याचिका दायर किया गया. अशोक पांडे इस प्रकरण में याचिकर्त्री के अधिवक्ता हैं.

इस याचिका में यह कहा गया है कि फिल्म दबंग तथा तीस मार खान और अन्य सभी हिंदी तथा अन्य भाषाओं के फिल्मों में सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट मिलने के पूर्व ही कई सारे नाच, गाने, डॉयलाग, सीन आदि दिखाया जाना शुरू कर दिया जाता है, जिनमें कई बार ऐसा भी होता है कि ये आगे चल कर सेंसर बोर्ड द्वारा काट दिए जाते हैं अथवा इनकी स्वीकृति नहीं दी जाती है. यह सिनेमेटोग्राफी एक्ट 1952 की धारा 3(1), 4, 5(ए), 5(सी) तथा 5(ई) का स्पष्ट उल्लंघन है. अतः डॉ ठाकुर ने हाई कोर्ट से यह अनुरोध किया है कि सेंसर बोर्ड और सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय को निर्देशित करें कि वे इस प्रकार से फिल्मों के सेंसर बोर्ड द्वारा सर्टिफिकेट दिए जाने के पूर्व टेलीविजन, रेडियो, ऑडियो कैसेट, विडियो कैसेट या किसी भी अन्य तरह से गाना, डांस, डॉयलाग, सीन, ऑडियो माध्यम या प्रोमो आदि के जरिये अपने फिल्म के भागों को जनता के समक्ष पब्लिक डिस्प्ले के लिए प्रस्तुत नहीं करें.

डॉ. ठाकुर ने यह भी अनुरोध किया है कि दो गाने- दबंग का गाना ‘मुन्नी बदनाम हुई’ और आगामी फिल्म तीस मार खान का गाना ‘शीला की जवानी’ खास तौर कर पब्लिक डीसेंसी, मोरालिटी, पब्लिक आर्डर के खिलाफ हैं और इनसे अपराध के कारित होने की भी संभावना रहती है. यह सीधे तौर पर सिनेमेटोग्राफी एक्ट के धारा 5(बी)(1) का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि स्कूलों तथा कॉलेजों में जाने वाली लडकियां, दफ्तरों के जाने वाली कामकाजी महिलाएं और यहाँ तक कि घरेलू महिलायें भी इस गाने के कारण गलत रूप से प्रभावित हो रही हैं, खास कर के वे जिनके नाम शीला, मुन्नी, मुनिया या ऐसे ही मिलते-जुलते नाम हैं. अतः डॉ ठाकुर ने इन दोनों गानों के प्रदर्शन को तुरंत रुकवाने का अनुरोध किया है. इसके लिए भारत के अलावा पाकिस्तान के लाहौर की एक मुन्नी नामक दो बच्चों की माँ का जिक्र प्रस्तुत किया गया है, जिसे इसी गाने के चलते अपनी दुकान तक बंद करनी पड़ गयी.

अनंतिम प्रार्थना के रूप में याचिकर्त्री ने तीस मार खान फिल्म के प्रदर्शन पर ‘शीला की जवानी’ गाने के नहीं हटने तक और दबंग फिल्म के प्रदर्शन पर ‘मुन्नी बदनाम हुई’ गाने के नहीं हटने तक रोक लगाने का अनुरोध किया है. इस बारे में सुनवाई की तारीख तीन जनवरी 2011 लगाई गयी है.

यह याचिका अंग्रेजी में इस प्रकार है.

A Writ petition has been filed today 23/12/2010 in the Allahabad High Court, Lucknow Bench by Dr Nutan Thakur against Twinkle Khanna, Shirish Kunder and Ronnie Screwvala, Producers of  Tees Maar Khan, Farah Khan, Director of Tees Maar Khan,  Arbaaz Khan, Malaika Arora Khan and Dhillin Mehta  , Producers of Dabangg,  Abhinav Kashyap, Director of Dabangg, Central Board of Film Certification (Censor Board) and Union of India through the Secretary of Information and Broadcasting. Asok Pandey is the advocate Counsel of the Petitioner.

The petition presents the fact that in film ‘Dabangg’ and Tees Maar Khan, as in almost all other cases of Hindi films and films of other languages, many indecent, immoral and vulgar songs, dialogues and visual representations start being shown and disseminated to general public through the means of channels of mass media like Televisions, radios and audio/ video cassettes even before the issue of certificate under the law of the land. This is completely against sections 3(1), 4, 5(A), 5(C) and 5(E) of the Cinematography Act 1952 because in many cases such songs, dances, scenes, dialogues etc do not get certificate
later on but by that time it has been publicly exhibited to a very large extent. Hence the petitioner has requested the High Court to direct the Censor Board and Ministry of Information and Broadcasting to intervene and issue directives to the film-makers in all the languages and all other concerned bodies like the Television channels, radio stations, audio cassette and video cassette companies not to display anything (including songs, dances, dialogues, audio inputs, sequences, promos or other such materials of the film) before the Censor Board has issued the required Certificate to the respective films.

Dr Thakur has also prayed that in the songs Munni Badnam Hui and Sheila ki jawaani, there  is the specific problem of use of such songs which are against decency, morality and public order and which can incite commitment of offences. This is against the provisions of section 5(B)(1) of the Cinematographer Act. She says that such unfortunate events have already started taking place where helpless and poor girls studying in schools and colleges, working women in all kinds of establishments, Institutions and organizations and even housewives are being teased, molested and sarcastically treated, more so when the name of the women/girls is Sheila/ Sheela/ Munni/ Muniya or other similar sounding ones. Hence she has requested to issue orders to immediately stop the public exhibition of these two songs. She has presented an example from Lahore, Munni, a mother of two in this Pakistani city, was harassed so much that she has shut her small shop.

As an interim relief, the petitioner has requested ordering the respondents to stop the release of the Hindi film ‘Tees Maar Khan’ as long as the song ‘Sheila ki jawaani’ is not removed from the film and to stop the screening/ public exhibition of the Hindi film ‘Dabangg’ as long as the song ‘Munni badnaam hui’ is not removed from the film. The mater shall come for hearing on 03rd January 2011.


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