श्रवण गर्ग, कल्पेश याज्ञनिक, यतीश राजावत बताएं

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: भास्कर डॉट कॉम की ये कैसी पत्रकारिता! : एक बार दैनिक भास्कर के संपादकीय विभाग के एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझे सलाह दी कि भड़ास4मीडिया बहुत अच्छा है लेकिन बस इसमें जो कमेंट आते हैं उस पर नियंत्रण लगाने की जरूरत है.

ये कमेंट गंदे गंदे, निजी आग्रह-पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर और बिलो द बेल्ट हमला करने वाले होते हैं. ऐसे कमेंटबाज अपनी पहचान छुपाकर दूसरों को बदनाम करते हैं. इन कमेंटबाजों की मंशा होती है दूसरों को बिना वजह बेइज्जत करना, उन पर कीचड़ उछालना. ऐसे कमेंट्स को हटाया जाना चाहिए. एक सिस्टम डेवलप किया जाना चाहिए कि ऐसे कमेंट पब्लिश न हो सकें. वरिष्ठ पत्रकार महोदय की बातों को मैं सुनता रहा और कुछ उन कमेंट्स को जिनसे वे परेशान थे, मैंने हटा भी दिया.

मैं निजी तौर पर मानता हूं कि मीडिया को या किसी को बिना आधार किसी के मानमर्दन का अधिकार नहीं है. इसी कारण जब भी कोई शख्स मुझे फोन या मेल से बताते हैं कि भड़ास पर फलां कमेंट उनके खिलाफ बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना तरीके से लिखा व प्रकाशित किया गया है तो मैं उन कमेंट्स को तुरंत हटा देता हूं. इसके पीछे मंशा हर पत्रकार, हर मनुष्य के सम्मान की होती है. पर दो रोज पहले एक पत्रकार साथी ने मेल भेजकर सूचित किया कि... ''यशवंत जी, भास्कर डॉट कॉम पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ इतने गंदे भद्दे व घटिया कमेंट्स पड़े हैं कि पढ़ने वाले शर्मा जाएं.''

मेल भेजने वाले पत्रकार साथी ने अपनी बात के समर्थन में भास्कर साइट पर प्रकाशित लेख व कमेंट्स का लिंक भी भेजा था, सो आज मैंने पूरा पढ़ा व कुछ कमेंट्स के स्क्रीनशाट लिए ताकि इसे भड़ास पर प्रकाशित कर भास्कर वालों को बताया जाए कि भई पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाली कहावत चरितार्थ न करें. अपनी वेबसाइट को भड़ास न बनाएं, भड़ास को ही भड़ास रहने दें, काहें को इतनी गंदी गालियां प्रकाशित कर रहे हैं. और अगर टीआरपी पाने के वास्ते इतनी गंदी गालियों की अनुमति दे रखी है तो फिर आपकी कथित पत्रकारिता, विजन व सोच को सलाम.

भास्कर की साइट पर जिस खबर पर घटिया कमेंट्स आए हैं, उस खबर में हेडिंग है- ''दिग्विजय ने बोला हमला, मध्य प्रदेश के बीजेपी नेता करते हैं आतंकियों की मदद''. इस खबर के अंत में वेबसाइट की तरफ से पाठकों से उनकी राय मांगी गई है. यह कहकर कि... ''आपकी राय-  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जब--तब हिंदू संगठनों पर तीखे हमले बोलते रहते हैं। आपको क्या लगता है यह राजनीति से प्रेरित है या फिर आरोपों में कुछ सच्चाई है? क्या वाकई मध्य प्रदेश में आरएसएस और बीजेपी के वरिष्ठ नेता आतंकवादियों की मदद करते हैं? इन सभी मुद्दों पर आप भी दे सकते हैं अपनी राय।''

राय मांगने वालों ने राय तो मांग ली लेकिन ये देखने भर की फुर्सत नहीं है कि किस तरह की राय आ रही है. भास्कर वाले अगर दूसरों के लिए ऐसे कमेंट्स एलाउ करते हैं तो उन्हें खुद के लिए और खुद के मालिकों व कर्मियों के लिए भी ऐसे कमेंटों के लिए तैयार रहना चाहिए. हालांकि वेब ब्लाग की दुनिया में कमेंट के स्तर को लेकर लंबी बहसें चली हैं और चल रही हैं. दुनिया भर में ये बहस का विषय है कि क्या अनाम कमेंट्स को एलाऊ करना चाहिए. क्या वेबसाइटों व ब्लागों में कमेंट्स को माडरेट करना चाहिए या सभी तरह के कमेंट्स को एलाऊ कर देना चाहिए. यह बहस अभी जारी है. लिहाजा, लोग अपनी नैतिकता, सोच-समझ और संवेदना के हिसाब से अपनी-अपनी साइटों-ब्लागों पर कमेंट्स के साथ व्यवहार करते हैं. कुछ लोग कमेंट्स को डायरेक्ट पब्लिश नहीं होने देते तो कुछ लोगों के यहां कमेंट सबमिट करते ही वो प्रकाशित मिलता है.

हिंदी ब्लागिंग के शुरुआत काल उर्फ भड़ास काल में हम लोग भड़ास ब्लाग www.bhadas.blogspot.com पर जब गालियों भरी भाषा में पोस्ट लिखते थे, कमेंट्स लिखते थे तो ये पत्रकारिता के कुलीन व भद्र लोग नाक-मुंह-भौं, जो कुछ सिकोड़ सकते थे, सिकोड़ते थे, लेकिन अजब खेल ये कि जब हम भड़ासी सुधर गए हैं तो ये भद्र लोग लोकप्रियता के लिए इतने नीचे गिर गए हैं कि लगता है कि इनके पास अब नाक-मुंह-भौं, जो कुछ सिकोड़ने लायक होता है, अब बचा नहीं है ताकि सिकोड़ सकें.

भास्कर में कई ऐसे पत्रकार काम कर रहे हैं जो हिंदी के ब्लागर भी हैं और ब्लागिंग में शुचिता के बड़े हिमायती रहे हैं, भाषा की शालीनता के बड़े पक्षधर रहे हैं, लेकिन ये नैतिक लोग आज भास्कर की साइट पर प्रकाशित कमेंट्स को लेकर कोई मुखर पक्ष रखने की हिम्मत नहीं करेंगे, ये लोग अपने मुंह पर पाखंड व हिप्पोक्रेसी की पट्टी बांधकर चुप ही रहेंगे क्योंकि इनकी रोजी रोटी के लिए कुछ पैसे जो भास्कर के एकाउंट से इनके एकाउंट में हर महीने ट्रांसफर होते रहते हैं और इस मनी ट्रांसफर में रुकावट आने जैसा रिस्क ये लोग नहीं ले सकते हैं क्योंकि इस तरह के रिस्क तो इनके पिताजी लिया करते थे, ये भला क्यों लेंगे. ऐसे हिप्पोक्रेट संपादकों, पत्रकारों को मेरा प्रणाम. चलिए, आपको भास्कर डॉट कॉम पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को लेकर प्रकाशित घटिया कमेंट्स में से कुछ कमेंट्स पढ़ाते हैं.

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया

संपर्क : This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it


भास्कर डॉट कॉम में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर प्रकाशित एक खबर के नीचे आए 'असाधारण' कमेंट्स में से कुछ नमूने पेश हैं...


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Comments (3)Add Comment
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written by manmohan shrivastav sagar, January 23, 2011
yashwantji karmyogi garg shaab ka interview utshah ka sabab hai dhanyabad
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written by Shyam Sharma, January 20, 2011
me bhi Bhaskar Jaipur me editor hu. is bhasa se logo ne apni bhadas nikali hai.
Bhaskar me bhi bade padon par aise hi kutte baithe hain. jaisa diggi. kalpesh
bhi unme se ak hai. navnit gurjar to madar chod hai

Shyam Sharma
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written by Dreamer, January 20, 2011
Yashwant Ji

First of all congratulations for publishing this story. Anyone can disagree but using abusive language of this standard is distasteful.

Secondly, I would like to point out that certain websites including Rediff and even TOI now let almot any sort of comment published. They include abuses, racial, regional and all sort of nonsense. The aim is to generate anger so that more people comment and thus the more hits.

If you check rediff, there are remarks against Hindus, Muslims, Fair, Dark, North Easterns, Brahmins, Dalits South Indians, Biharis, every section. Pleaes also write about them.

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