तकनीक के जमाने में भी साहित्य आकर्षक : वजाहत

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Asghar Wajahatदिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान सभागार में हिन्द-युग्म ने 'कथापाठ : एक विमर्श' का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध कहानीकार असग़र वजाहत ने की। इस कार्यक्रम में लंदन से पधारे वरिष्ठ कहानीकार व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी संस्था कथा (यूके) के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा और हिन्दी कहानी में नया नाम गौरव सोलंकी का कहानीपाठ हुआ। हरियाणा के वरिष्ठ साहित्यकार और कार्यक्रम के संचालक डॉ. श्याम सखा 'श्याम' ने कहानी के उदगम, उदभव और विकास पर प्रकाश डाला।

डॉ. श्याम सखा ने अपनी एक कहानी 'महेसर का ताऊ' का भी पाठ किया। संस्था के संस्थापक और प्रधान संपादक शैलेश भारतवासी ने हिन्द-युग्म की गतिविधिओं पर प्रकाश डाला। तेजेन्द्र शर्मा ने अपनी प्रसिद्ध कहानी 'पासपोर्ट के रंग' का पाठ किया वहीं गौरव सोलंकी ने अपने ख़ास अंदाज़ वाली दो छोटी-छोटी कहानियों 'डर के आगे' और 'तुम्हारी बाँहों में मछलियाँ क्यों नहीं हैं' का पाठ किया। युवा कथाकार अभिषेक कश्यप ने 'यवा कहानी और नये प्रयोग' पर बोलते हुए कहा कि नये Kathapaath : Ek Vimarshकहानीकार भाषा और शब्द-चयन को लेकर बहुत सहज हैं, लेकिन इनको वह पहचान नहीं मिल सकी हैं, जिसकी ये हक़दार हैं। नामी साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों को इस तरह की भी कहानियों को प्रकाशित कर इनका प्रोत्साहन करना चाहिए।  कार्यक्रम के अध्यक्ष और मुख्य वक्ता असग़र वजाहत ने गौरव सोलंकी की कहानियों की तुलना शशांक, बलराम, मधुसूदन आनंद कहानियों से की। असग़र वजाहत ने तेजेन्द्र शर्मा को एक संपूर्ण कथाकार बताया। युवा कथाकार अजय नावरिया ने कथापाठ की इस परम्परा के निर्वहन के लिए तेजेन्द्र शर्मा की प्रसंशा की और कहा कि कहानी लिखने का कोई ककहरा नहीं है। तेजेन्द्र की कहानियाँ एक नया अनुभव देती हैं, जो अन्य प्रवासी कथाकारों की नॉस्टेलजिया से आने निकलकर वास्तविकता की धरातल पर चलती हैं।

कथाकार असग़र वजाहत ने कहा कि हिन्दी सिर्फ हमारी मातृभाषा ही नहीं है, बल्कि दुनिया की दूसरी नंबर की सबसे बड़ी भाषा है, हम अपनी-अपनी भाषा के प्रमोशन का हठ लेकर न बैठें बल्कि दुनिया की दूसरी बड़ी भाषा के विकास और प्रसार में अपना योगदान दें क्योंकि कहीं न कहीं यह हमारे सांस्कृतिक विकास से भी जुड़ी है और सांस्कृतिक विकास कहीं न कहीं हमारे हर तरह के विकास से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम में उपस्थित सैकड़ों श्रोताओं की भीड़ से यह ज़ाहिर होता है कि तकनीक के जमाने में भी साहित्य का आकर्षण कम नहीं हुआ है। कार्यक्रम में हिन्द-युग्म की ओर से निखिल आनंद गिरि, प्रेमचंद सहजवाला, भूपेन्द्र राघव, सजीव सारथीअनुराधा शर्मा, मनुज मेहता, रंजना भाटिया, मनु बेतखल्लुस, नीलम मिश्रा, अभिषेक पाटनी, तपन शर्मा इत्यादि के अलावा वरिष्ठ पत्रकार अजीत राय, सीएमएस मीडिया लैब के मीडिया-प्रबंधक अभिषेक सिंह, युवा पत्रकार आकांक्षा पारे, साहित्यकार सुभाष नीरव व प्रेम जनमेजय, चोखेरबाली डॉट इन वेबसाइट की मुख्य मॉडरेटर सुजाता तेवतिया, ब्लॉगर राजीव तनेजा, अविनाश वाचस्पति, सुशील कुमार छोक्कर, पवन चंदन, उमाशंकर इत्यादि उपस्थित थे।


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