फ्राड कंपनी के एंबेसेडर बने अमिताभ

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अमितजी, साधुवाद, आज आपको एक ऐसी कंपनी के ब्रांड एंबेसेडर के रूप में देखा जिसके संचालकों को मध्यप्रदेश की पुलिस तलाश रही है। आपने न्यूट्रीचार्ज नामक जिस प्रोडक्ट का विज्ञापन किया है, उसकी निर्माता कंपनी पेनजॉन फार्मा है। इस कंपनी के संचालक मध्यप्रदेश के सैंकड़ों बुजुर्ग निवेशकों का करोड़ों रुपया लेकर फरार हैं। ये निवेशक आपको ‘हमारा बागबान’ मानते हैं और लंबे अरसे से मजबूरी की जिंदगी जी रहे हैं। इनकी लड़ाई का सूत्र वाक्य हरिवंशराय बच्चन की वह कविता ही है, जिसका आप गाहे-बगाहे पाठ करते रहते हैं। कविता यूं है-

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छांह भी,
मांग मत, मांग मत, मांग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ
तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ
यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ

इंदौर पुलिस व इंदौर प्रशासन की मदद से पेनजॉन फार्मा संचालक फरार हैं और फिलहाल मुंबई में काबिज हैं। आपको इसका विज्ञापन करते देख वे हैरान व परेशान है। आप जैसे लिविंग लिजेंड से ये उम्मीद किसी का नहीं थी।

हो सकता है कि आपकी भी कुछ कारोबारी मजबूरियां हों व आप तर्क दें कि मुझे जो पैसा देंगे उसके साथ विज्ञापन करुंगा। आप जिस कंपनी का विज्ञापन करें वह बाद में भाग जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन जो पहले से ही फरार हो, तो उसके बारे में आप क्या कहेंगे? मुझे यह बताते हुए भी बेहद दुख है कि फ्राड का साथ देने के आरोप के चलते मीडिया को आपकी छवि के विपरीत समाचार प्रकाशित करने होंगे। निजी तौर पर मैं आपकी बेहद इज्जत करता हूं क्योंकि आपके लंबे करियर में मुझे कोई दाग नहीं दिखता।

सचिन तेंदुलकर का पाठ : विज्ञापनों की दुनिया में सितारों का इस्तेमाल करके लोगों से फ्राड करने वालों के लिए कुछ समय पहले महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने एक सबक पेश किया था। करोड़ों का ऑफर होने के बाद भी सचिन ने एक शराब कंपनी का विज्ञापन करने से इसलिए इंकार कर दिया था कि इससे देश के युवा पथभ्रष्ट हो सकते हैं। यह जानकरी आप के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.

शायद इन तथ्यों से टूटे अँधियारा : न्यूट्रीचार्ज बनाने वाली कंपनी के बारे में मैं आपको कुछ चौंकाने वाली जानकारी देना चाहता हूं। यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि संभव है कि विज्ञापन से आपकी छवि पर विपरीत असर हो-

तथ्य एक : न्यूट्रीचार्ज बनाने वाली कंपनी का नाम पेनजॉन फार्मा है। इस कंपनी के संचालक मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के बाशिंदे हैं और मध्यप्रदेश के 500 से अधिक परिवारों के साथ 350 लाख से अधिक रुपए की धोखाधड़ी करके फरार हैं।

तथ्य दो : संचालकों के नाम मनोज नगीन चंद्र कोठारी व अंजु मनोज कोठारी है। इंदौर की पुलिस ने इन दोनों पर पांच-पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। ये दोनों ही इंदौर पुलिस की नजर में घोषित धोखेबाज व अपराधी हैं। चाहें तो इंदौर के सीनियर सुप्रीडेंट ऑफ पुलिस डी. श्रीनिवास राव से 094795 55590, एडिशनल एसपी कुमार सौरभ 94799 93364 या सीएसपी अमरेंद्र सिंह 094254 13030  मोबाइल नंबर पर बात करके जानकारी ले सकते हैं।

तथ्य तीन : पेनजॉन फार्मा संचालकों पर अपराध साबित होने के बाद इंदौर कलेक्टर ने इनकी संपत्ति को कुर्क कर रखा है। मनोज कोठारी के भाई विजय कोठारी पर भी मध्यप्रदेश पुलिस ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है।

तथ्य चार : जिन लोगों के रुपए लेकर कंपनी संचालक फरार हुए हैं, उनमें से अधिकांश बुर्जुग लोग हैं। इन लोगों ने जिंदगीभर की मेहनत की कमाई कंपनी संचालकों को दी थी। आज ये बुजुर्ग पाई-पाई को मोहताज हैं। कुछ की हालत तो आत्महत्या करने जैसी हो गई है।

तथ्य पांच : पेनजॉन फार्मा संचालकों को उत्तरांचल की पुलिस भी खोज रही है। वहां ये एक जमीन का घोटाला करके भागे हैं। उत्तरांचल पुलिस की वांटेड सूची में मनोज व अंजु कोठारी का नाम शामिल है।

तथ्य छह : टाइम्स ऑफ इंडिया ने पेनजॉन फार्मा के साथ एक करार किया था जो अधर में है। कंपनी को टाइम्स ने नोटिस जारी कर रखा है।

तथ्य सात : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंकें भी पेनजॉन फार्मा को लोन देकर फंस चुकी हैं। दोनों ही बैंकें संचालकों को खोज रही है। डेब्ट ट्रिब्यूनल भी संचालकों के खिलाफ फैसला दे चुका है।

तथ्य और भी हैं। अमितजी, धोखेबाज कंपनी के प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए आपके चेहरे-मोहरे का इस्तेमाल किए जाने से उन लोगों को भारी ठेस पहुंचेगी जो कंपनी के कारण कंगाली के दौर से गुजर रहे हैं। आप चाहेंगे तो मैं आपको उन लोगों के नंबर भी दे सकता हूं। पीडि़त लोगों की संख्या दो हजार से अधिक है। अमर कृति ‘मधुशाला’ की दो पंक्तियों में उपजे सवालों के साथ अपनी बात को विराम देता हूं।

कहां गया वह स्वर्गिक साकी, कहां गयी सुरभित हाला,
कहां गया स्वपिनल मदिरालय, कहां गया स्वर्णिम प्याला!

लेखक विजय चौधरी इंदौर के निवासी हैं.


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