राहुल गांधी पर रेप के आरोप झूठे, लड़की हाजिर हुई कोर्ट में, याचिकाकर्ता पर जुर्माना, वेबसाइट बंद करने के आदेश

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राहुल गांधी पर लगा गैंग रेप का आरोप पहली ही सुनवाई में खारिज हो गया. पूरे प्रकरण की पोल तब खुल गई जब जिस पीड़ित लड़की व उसके परिजनों को याचिका में लापता बताया जा रहा था, वे लोग अदालत में हाजिर हो गए और कोई भी घटना होने से इनकार कर दिया. ऐसे में अदालत ने याचिका करने वाले पर पचास लाख रुपये का जुर्माना ठोंक दिया और उस वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए जिसने अमेठी में रहने वाली सुकन्या और उसके मां-पिता को राहुल द्वारा बंदी बनाए जाने की खबर प्रसारित की थी.

अभी ये मालूम नहीं चला है कि हाईकोर्ट को किस वेबसाइट के बारे में बताया गया और कोर्ट ने किस वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है. भड़ास4मीडिया में भी इस प्रकरण की दो खबरें प्रकाशित की गईं जिसमें पहली खबर कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को नोटिस जारी किए जाने से संबंधित थी. दूसरी खबर यूट्यूब पर राहुल के खिलाफ पड़े वीडियोज से संबंधित थी जिसमें इस तथ्य की जानकारी दी गई कि सुकन्या प्रकरण से संबंधित कई टेप व वीडियोज यूट्यूब पर पड़े हुए हैं और उनके हटवाने के लिए गांधी परिवार या उनके किसी शुभचिंतक ने कोशिश नहीं की. दूसरे, इस प्रकरण से संबंधित खबरें देश के कई छोटे-बड़े अखबारों में छोटे-बड़े रूप में प्रकाशित हुईं. ऐसे में किसी एक वेबसाइट को टारगेट करके आदेश जारी करना कितना न्यायोचित है. फिलहाल वेबसाइट से संबंधित आदेश के बारे में जानकारी किया जा रहा है.

ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक किशोर समरीते और गजेन्द्र पालसिंह ने बीते एक मार्च को राहुल गांधी के खिलाफ दो अलग-अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थीं जिसमें कहा गया था कि साल 2006 में राहुल गांधी अपने कुछ विदेशी मित्रों के साथ पार्टी के कार्यकर्ता बलराम सिंह के घर में रुके. उसी दिन से बलराम सिंह, उनकी पत्नी सावित्री और पुत्री सुकन्या गायब हैं. याचिका में कहा गया था कि गांधी ने सभी का अपहरण करके गैरकानूनी तरीके से उन्हें बन्दी बनाकर रखा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस महासचिव और अमेठी के सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ही 50 लाख रूपये का जुर्माना ठोक दिया. इसके साथ ही खण्डपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि जुर्माने की रकम एक महीने में जमा की जाए. इसके अतिरिक्त अदालत ने याचिकाकर्ताओं की सीबीआई जांच कराने का भी आदेश दिया. जस्टिस उमानाथ सिंह और जस्टिस सतीश चन्द्र की बेंच ने कथित रूप से अमेठी में रहने वाली सुकन्या और उसके माता-पिता को राहुल द्वारा बंदी बना लिए जाने की खबर देने वाली एक वेबसाइट पर भी प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं.

अदालत के पिछले शुक्रवार के आदेश के तहत उत्तर प्रदेश के डीजीपी करमवीर सिंह ने कथित सुकन्या और उसके माता-पिता को अदालत में पेश किया और उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें किसी ने बंधक नहीं बनाया था. सुकन्या बताई जा रही ल़डकी ने अदालत को अपना असली नाम कीर्ति सिंह बताया, जबकि अपने पिता का नाम बलराम सिंह, मां का नाम सुशीला उर्फ मोहिनी होने की पुष्टि की. अमेठी थाना प्रभारी ने इन तीनों कथित बंदियों की शिनाख्त की. इस परिवार ने अदालत को बताया कि वे किसी की अवैध हिरासत में नहीं हैं. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि अमेठी की सुकन्या और उसके माता-पिता को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है, लिहाजा उसे अदालत में पेश कर मुक्त कराया जाए.

यशवंत की रिपोर्ट


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