8 बड़े प्रभावशाली करप्टों को बचाने के लिए 4 अन्य करप्टों पर पिल पड़ने की परियोजना पर पक्ष-विपक्ष की सहमति!

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संदेहवाद अमर रहे! : मुझसे कई लोग पूछते कहते हैं कि गासिप, अफवाहों, चर्चाओं को खबर की तरह पेश क्यों किया जाता है भड़ास पर. मैं उनसे कहता हूं कि न्यू मीडिया के लिए गासिप, चर्चाएं और अफवाह भी खबर की तरह हैं और ये सच हैं या नहीं, इनका खंडन मंडन तुरंत कमेंट्स के जरिए किया जा सकता है. पर मेरी बात से बहुत लोग संतुष्ट नहीं हो पाते.

फिर मैं उन्हें समझाता हूं कि भड़ास कोई मीडिया नहीं है, इसलिए भी नहीं कि हम लोगों को कहीं से कोई मीडिया होने का लाभ नहीं मिलता और न ही कोई लंबी-चौड़ी टीम व संसाधन है जिसके दम पर छापने से पहले हम हर चर्चा को पुष्ट कर लें. यह भी कहता हूं कि न्यू मीडिया पर दुनिया भर में शुरू इस बहस का नतीजा नहीं आ सका है कि अनाम कमेंट्स का क्या करें और गासिप को न्यूज मानें या न मानें. और, सच बात तो ये है कि जो बड़े मीडिया घराने हैं, वे खुद अपनी वेबसाइटों पर अनाम-बेनाम कमेंट्स व गालियों को जमकर प्रकाशित करते हैं और गासिप को खबर बनाकर पेश करते हैं.

खैर, मेरा मकसद यहां किसी को गलत और खुद को सही साबित करने का नहीं है. संभव है, मैं गलत होउं. पर यहां एक खास उद्देश्य से बात कर रहा हूं. शीबा असलम फहमी ने फेसबुक पर अपने वाल पर जो लिखा है, वो न सिर्फ चौंकाता है बल्कि सोचने को मजबूर करता है. और उनके लिखे पर प्रियंकर पालीवाल ने एक शानदार कमेंट दिया है- संदेहवाद अमर रहे. शीबा जी ने जिस संदेह, जिस चर्चा को अपने वाल पर चस्पा किया है, वो संभव है सच न हो, लेकिन आज राजनीति की जो स्थिति व स्तर है, उसमें ऐसा कुछ भी संभव है. आखिर क्यों कलमाड़ी, बरखा, वीर, नीरा, अंबानी, टाटा आदि जेल में नहीं हैं, और क्यों दो दलितों-मुस्लिमों पर सभी पिले पड़े हैं. भ्रष्टाचारियों में क्यों विभेद हो रहा है. पहले शीबा जी के वाल को पढ़ें और उस पर आए अब तक कमेंट्स को. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


Sheeba Aslam Fehmi : क्या डील यह थी की विपक्ष 'अंतरिक्ष-देवास' पर चुप रहे जिसमे पीएमओ लपेटे में आ रहा था, तो 2G पर JPC बना दी जाएगी. यह भी तय हुआ कि सुरेश कलमाड़ी, बरखा, वीर सांघवी, नीरा राडिया, अरूण शौरी, अनिल अम्बानी, रतन टाटा, विनोद गोयनका और वेणुगोपाल धूत को छोड़ कर भ्रष्टाचार के चार चेहरे होंगे- ए राजा, हसन अली, शाहिद बलवा और के जी बालाकृष्णन.

Kuldeep Wasnik : जिस तरह से स्पेक्ट्रम समेटने के लिए ही देवास की स्थापणा हुई थी और स्पेक्ट्रम हथियाया गया उस हिसाब से देखा जाए तो हो सकता है यह सब भी पहले से हि तय होगा ।

Ajay Gathala : quite possible :-)

Raja Zaid Khan : Its very unfortunate to hide the real names behind the scam.

Sanjay Khobragade : Uran, Raigad Near to mumbai desh ke sab se bade ghotale ki bu aa rahi hai please try to collect from your sources. @ post ye charo system ke bakre hai katenge hi taki sachyi kuch had tak chipai ja sake.

Dilip Mandal : शेयर किया शीबा जी। शुक्रिया।

Prasad Suresh : sahi likha apne ..

Saqib : Sana you are 100% correct,.. aur fir ek khaas tabqe ko achhi tarah badnam karne ka bahana bhi........

Amit Tiwari : कांग्रेस और भाजपा हमेशा ही 'A ' टीम और 'B ' टीम की तरह दोस्ताना मैच खेलते रहते हैं.. तुम हमारी खुजली सहलाओ, हम तुम्हारी खुजली सहलायेंगे.. वाला करार है इनमे... यह सब भी उसी का हिस्सा है..

Dinesh Maurya :  Private property disclosure Act: if Government really want to fight against Corruption, there need a law like Private property disclosure Act in which every firm, company (foreign and Indian), NGO, political and non political organisation..., party, religious institution, Minister, bureaucrat, judiciary as well as every individual have at least minimum property ( ie like who come under Concept of CREME LAYER or at least have one car) will bound to disclose his property every year at the time of paying Income tex............
but govt really does not want..........

Ajay Gathala : [email protected]..all wht u hav said is already provided nd enquired in various statutes nd laws...wht doesn't happen is d implementation of them :-)

Dinesh Maurya : In my knowledge there is no law, which expressly make bound every individual as well as orgenisation. if in your knowledge share it......

Ajay Gathala : [email protected]..section 245c of d income tax act...also all public servants hav to disclose their income...nd politicians in their application form

Dinesh Maurya : @ Ajay Gathala.........section 245c of d income tax act...also all public servants hav to disclose their income...it says about income not property. may be u right but i am just saying Total property 'in every year' so that their source of income can be investigated............

Ajay Gathala : [email protected].look frnd...almost every upper-middle class person files tax returns 'every year' nd most of dem file wrong datas(dat form has columns regarding total property)...even if dat thing is checked much cud b improved...also d NGO syste...m has caused most of d damage(85 % of dem r fake acc. to UN report)...ppl earn money nd invest in very tricky way..
FOR EXAMPLE...Aishwarya Rai invested 8 crore in a wind mill system in rajasthan nd didn't had to pay even a single paisa as tax cos of govt. policy to encourage investment in dat particular sector !!!

Dinesh Maurya : I know, the short coming of legal implication, but Judge like Krishna iyar only want to disclose the property only ex Chief justice Balakrisnan and not sabbarwal and many other corrupt judge it is their mindset. but we need to support or demand such law which make system transparent and empower common people. implication will change with the system.

Ajay Gathala : [email protected]..RIGHT...but even den d dedication to implement dem will make d difference nd nthing else

Nadim S. Akhter : hmmm...sochna to banta hai iss pe...kyon bhai logon..????

Mahboob Hasan : bharshtachaar ke moamle men saare neta log mile hue hain @ in sabon ne eik lakhshaman rekha kheech rakhi hai- usko cross nahin karte- NAAG hain ye sab- das rahe bharat ki bholi bhaali janta ko-
RATAN TATA, MEDIA QUEEN - BARKHA DUTT - jaisa......e log jis desh men bharsht honge- wahaan ki ghareeb janta ko sadak pe aana hi padega eik din. BADI MURGHIYON ko bacha kar choti ki QURBAANI chadhaya ja raha

Raja Zaid Khan : One Big Question is that whom to trust when Media personalities are become accuse of playing foul game.

Nikhil Anand : बरखा, वीर सांघवी, नीरा राडिया, अरूण शौरी, अनिल अम्बानी, रतन टाटा, विनोद गोयनका और वेणुगोपाल धूत- ये सभी सत्ता पक्ष और विपक्ष के कॉमन इन्टरेस्ट ग्रुप के पार्ट हैं। शायद इसलिए बक्श दिये गये। सत्ता प्रतिष्ठानों से जुड़े होने का यही तो लाभ है। मिडिया को लेकर गलतफहमी पालने की जरूरत नहीं है, आज के दौर के सभी मिडिया समूह कॉरपोरेट प्रोमोटेड हैं।

Priyankar Paliwal : संदेहवाद अमर रहे!

इस पूरी बहस को यहां जाकर देख सकते हैं- Sheeba Aslam Fehmi


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Comments (1)Add Comment
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written by वकार सिद्दिकी , March 13, 2011
मुझे लगता है यशवंत जी ,आप भी शीबा फहमी कि शाश्वत ग़लतफ़हमी और दिलीप मंडल जैसे गिरोहबंदो द्वारा फैलाई जा रही इन बेतुकी अफवाहों को और गरम कर रहे है .अपराध और घोटालों का भी आरक्षण और संप्रदायीकरण पर तुले है ये तथाकथित नव मीडिया के नौटंकी बाज़

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