विकीलीक्‍स का खुलासा : मनमोहन सरकार ने खरीदे थे सांसद

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: रालोद के सांसदों को दस-दस करोड़ दिए जाने का जिक्र : संसद के दोनों सदनों में हंगामा : परमाणु डील पर विश्वास प्रस्ताव जीतने के लिए क्या मनमोहन सरकार ने वोट खरीदे थे? विकीलीक्स के एक खुलासे के बाद उठे इस सवाल से सियासत में हड़कंप मच गया है. इस खुलासे की खबर के बाद संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ और विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्‍तीफा मांगा है.

खबर है कि अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोकदल को कांग्रेस की तरफ से पैसे दिए गए थे. हालांकि अजित सिंह ने इस खुलासे को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि उनकी पार्टी के पास तो उस वक्त सिर्फ 3 सदस्य थे. खुलासे में 4 का जिक्र किया गया है. विकीलीक्स के मुताबिक कैप्टन सतीश शर्मा के सहयोगी नचिकेता कपूर ने अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी को बताया था कि आएलडी के चार सांसदों को इसके लिए 40 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

जुलाई 2008 में संसद में विश्वास प्रस्ताव पेश होने के ठीक 5 दिन पहले कपूर ने ये जानकारी दी थी और उन्होंने 2 बैग भी दिखाए थे. बताया गया था कि इसके अंदर पैसा है और वोट खरीदने के लिए कांग्रेस ने 50 से 60 करोड़ रुपये जुटा रखे हैं. खुलासे के मुताबिक अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने कैप्टन सतीश शर्मा से मुलाकात की थी और शर्मा ने बताया था कि कोशिश अकाली दल का वोट खरीदने की भी हुई. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद इसके लिए संत सिंह चटवाल के जरिये कोशिश की, लेकिन कामयाबी मिली नहीं.

इस खुलासे के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार अब देश को चलाने का नैतिक आधार खो चुकी है और उसे अब इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मसले पर जवाब देने को कहा. भाकपा सांसद गुरदास दास गुप्ता ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को सदन में आकर जबाव देना चाहिए या फिर उन्हें इस्तीफा देना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि भारतीय इतिहास में आज तक ऐसी खबर नहीं छपी है, यह बेहद गंभीर आरोप है.

राज्य सभा में भाजपा नेता अरुण जेटली ने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग की. उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है और इसका जवाब सरकार को देना चाहिए. यह मसला बहुत ही गंभीर है. जेटली के बाद सीपीएम सांसद सीताराम येचुरी ने भी मामले को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा. उन्‍होंने कहा कि इस खुलासे पर सरकार को अपना पक्ष स्‍पष्‍ट करना चाहिए कि सच्‍चाई क्‍या है?

उल्‍लेखनीय है कि विश्वासमत से ठीक पहले बीजेपी ने लोकसभा में लाखों रुपये कैश से भरा बैग लाकर हंगामा किया था और आरोप लगाया था कि वह रकम सांसदों को सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए दी गई थी. विश्वासमत के आंकड़ों पर गौर करें तो यूपीए सरकार के पक्ष में 275 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 256 वोट पड़े. 10 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था. इनमें से दो सांसद पार्टी के फ़ैसले के तहत तथा आठ पार्टी के खिलाफ़ जाकर सदन से अनुपस्थित रहे.


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