ये न्यू मीडिया नहीं, नव दलालों के अड्डे हैं, जरा इन्हें ही देखिए

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आदरणीय सम्पादक महोदय, नमस्कार, महोदय मैं गोण्डा के एक वित्तीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल का लिपिक हूं और लिपिक बनने से पहले मैं भी एक पत्रकार था। महोदय मैं यहां अपके माध्यम से गोण्डा की कंलकित पत्रकारिता का चेहरा समाज के सामने खोलना चाहता हूं और मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इस कार्य में मेरी मदद करेंगे।

महोदय इस आधुनिक युग में समाचार परस्पर बांटने के माध्यम बढ़ते चले जा रहे है और इसी के साथ पत्रकारिता का स्तर भी गिरता चला जा रहा है। पहले तो समाचार जानने का माध्यम केवल रेडियो या समाचार पत्र ही हुआ करते थे, लेकिन आजकल तो माध्यमों की बाढ़ आ गई है, जैसे मोबाइल न्यूज सर्विस, वेब न्यूज साइट, न्यूज चैनल इत्यादि। जैसे-जैसे माध्यम बढे़ तो बढ़ने लगा दलाली, ब्लैकमेलिंग और स्वहिततापूर्ण कार्य।

बात करते हैं न्यूज वेब साइटों की। एक न्यूज वेब साइट है आपकी खबर डाट काम। इस साइट में काम करते हैं राजीव श्रीवास्तव, जो इस साइट का प्रयोग करते है दलाली, ब्लैकमेलिंग और अपने बाप के काले कारनामों को छुपाने के लिये। इनके बाप ओम प्रकाश श्रीवास्तव एक स्कूल में प्रबंधक थे, वहां पर उन्होंने 8 लाख रुपये लेकर एक अध्यापक की फर्जी नियुक्ती कर दी, जब बेसिक शिक्षा अधिकारी के यहां वह एप्रूवल के लिये आया तो नियुक्ति फर्जी होने के कारण उसे बीएसए ने रद्द कर दिया।

जब बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ऐसा किया तो राजीव श्रीवास्तव, जो आपकी खबर डाट काम में कार्य करते हैं, ने अपने पिता के कार्यों पर परदा डालते हुये खबर लिखना शुरू कर दिया। मैं उनके द्वारा प्रकाशित खबरों को स्कैन कर आपके पास भेज रहा हूं। अब आप ही बताइये कि--

1- क्या किसी पत्रकार को किसी के ऊपर आरोप लगाने से पहले या समाचार लिखने के बाद उसका वर्जन नहीं लेना चाहिये?

2- अनके द्वारा अपने आप को एंटी करप्‍शन संस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बताया जा रहा है और उस पर भी भिन्न-भिन्न विभागों की शिकायत की जा रही है और फिर ब्लैकमेलिंग कर पैसा वसूला जा रहा है, अब आप बतायें कि यह कार्य कितना सही है?

3- इनके पिता ने 8 लाख रुपये लेकर नियुक्ति कर ली और जब विभाग ने उसे रद्द कर दिया तो यह मामला हाई कोर्ट चला गया। हाई कोर्ट ने इस नियुक्ति को फर्जी पाया और प्रबंधक को स्वंय कोर्ट में 25 तारीख को पेश होने का आदेश दिया है, तो आप लोग बतायें कि इस तरह का समाचार प्रकाशन क्या अनुचित दबाव डालने के लिये नहीं है?

अगर हम आप इनकी सारी बातों को सही भी मान लें तो आखिर इन्होंने अपने तीन भागों में लिखे जो समाचार प्रकाशित किये, पहला 13.3.2011, दूसरा 14.3.2011 और तीसरा 16.3.2011 को, आखिर इन तीनों समाचार में क्या किसी बडे अधिकारी का वर्जन लगा है? अगर नहीं लगा तो क्यों नहीं लगा? क्या इन्होंने किसी बडे़ अधिकारी का वर्जन लेना उचित नहीं समझा? और इन्‍होंने ये सारे समाचार हाई कोर्ट द्वारा इनके पिता को तलब किये जाने के बाद ही क्यों प्रकाशित किया। और अन्त में, जब किसी न्यूज एजेन्सी का प्रयोग निजी स्वार्थ के लिये किया जायेगा तो वह जनहित में कितना कार्य करता होगा यह सोचना आप का कार्य है, आप बुद्धजीवियों का।

धन्यवाद।

न्‍यूज

न्‍यूज

न्‍यूज

आपका

एक साथी


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Comments (6)Add Comment
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written by Syed Rizwan Mustafa, March 25, 2011
Yashwant Bhai Aadab
aapke bhadas par aaj maine Benaam ka ek Ilzam Imandar Reporter Rajiv Srivastav k khilaf pada Afsos hua,
Aapko Bata Doon ki gonda Shiksha vibhag me Dalali jam k chal rahi ,Yaha Dalalo Ka bolbala hai,jis ka natija ye hai Ki Imandaar Ghut Raha Hai Agar Usne Awaz Uthayee to Beimano ki Fauj Ulte Hi Usko Hi Beimaan Kahne Lagti Hai,
Dalalo,Rishwatkhoro tumhr har jagah imandaar Rajiv Milenge Tumhari Beimani Bakhiya Udehedege
Rajiv Tum Sangarh Karo Hum Tumhare saat Hai,Choro Makkaro,Beimano,Rishwatkhoro se Darna Mat,Yashwant Bhai Hame Umeed Hai Tumhari madad Karenge .Bhagwan to bahhar Hall Tumhari Imandari ki Qadr bhi Karenga,Aur Tumhare Beimano k liye Is Inquilabi Tewar ka Phal bhi Mita dega
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written by Pankaj Tandon, March 19, 2011
राजीव जी.... मैं आपको पिछले 15 सालों से जानता हूँ आप दलाल हो कि नहीं हो इसकी सफाई देने कि जरूरत नहीं है आपको.... हाथी अपने रास्ते चलता है और कुत्ते भौका करते है...... आप तरक्की कर रहे हो ये सब उसी का परिणाम है... कोई बात नहीं मैं तो सिर्फ एक बात हे कहूँगा..... "जिस पेड़ पर फल लगा करते है लोग उसे पे पत्थर मारा करते है"....
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written by himanshu, March 19, 2011
rajeev ji dalaal ho na ho lekin aap logo ne unko hero jaroor bana diya .
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written by Anil kumar, March 18, 2011
pankaj ji..

rajeev ji ne jo kara wo alag bat hai aur ninda karne layak hai.. par..
yaha me to ek bat kehnaa chaunga ki patrkar hone ke bavjeed aap puri web ke liye aise gande aur galat shabd kyo istemaal kar rahe hai...
aap to patrkaro me antar kar kar rahe hai.. haa me aapse khnaa chunga ki ek acha patrkar banne ke liye sikhne aur jaanne ki jigyasa kI bahut jyada jrurat hoti hai... ye meri samajh anusar hai
me asha karta hu ki aap bura nahi manenge..
dhanyavad!

Anil Kumar(khabarindia,Delhi bureau)
www.khabarindiya.com
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written by Pankaj Dixit, March 18, 2011
इसमें एक खबर तो राजीव ने मेरी वेबसाइट www.jnilive.com से चुरा ली है, जिसे तोड़ मरोड़ कर गलत क्रम में लगा कर खबर का गडबडझाला कर दिया| राजीव ने इस खबर को लगाने के लिए न अनुमति ली और न ही साभार लिखा| जिस पत्रकार को घर की खबर नहीं थी वो अंतरराष्ट्रीय कंटेंट वेबसाइट पर इधर उधर से चस्पा कर नई मीडिया चलाने का दावा कर बैठा|

भाई मेरे ऐसी एस एम् एस और वेब्मेडिया चलाने वालों को मेरी सलाह है कि इस मीडिया की गम्भीरता को नष्ट न करें| अगर आपके पास लिखने को अपना मसाला नहीं है तो क्या डॉक्टर ने बताया कि पत्रकारिता करो| पल्लेदारी कर लो, नरेगा में काम कर लो, खोमचा लगा लो पैसा पैदा करने के लिए| इन कामो में कुछ तो आपका अपना होगा|
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written by ansumeet, March 17, 2011
rajeev patrakar kab se ho gaya wo to dalal hai. wo pahle gonda me city news chalata tha. usne city news ki ancar ke taraf se apne kai wirodhi patra karon ki khilaf balatkar ka kes darl kara diya tha. wo to dalal hai.

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